Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट के 1045 पेज के फैसले के बाद इन दो बड़े रहस्य से नहीं उठा पर्दा
नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने यह फैसला सुनाया है, लेकिन अभी तक इस मामले में दो बड़ी बातों की जानकारी सामने नहीं आ सकी है। पहली कि इस फैसले को किस जज ने लिखा। कोर्ट ने फैसला सुनाते समय कहा कि यह फैसला सर्वसम्मति से दिया गया है। लेकिन इसमे यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर किस जज ने इस फैसले का समर्थन नहीं किया।

किस जज ने लिखा फैसला?
कोर्ट अपने फैसले सुनाते समय इस बात की जानकारी देती है कि फैसले को बेंच की ओर से किस जज ने लिखा है। इस मामले में 1045 पन्नों के फैसले को जिस जज ने लिखा उसका नाम उजागर नहीं करने की वजह भी कोर्ट की ओर से नहीं जाहिर की गई है। लेकिन माना जा रहा है कि यह मामला काफी संवेदनशील था, इसी वजह से जज के नाम की जानकारी नहीं दी गई है। बता दें कि अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने की थी, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने की थी।

आखिर क्यों विवादित स्थल रामजन्मभूमि है?
कोर्ट के फैसले में 116 पन्नों में इस बात की जानकारी दी गई है कि आखिर क्यों विवादित स्थल भगवान राम की जन्मभूमि है। यही नहीं जजमेंट के इस हिस्से को किस जज ने लिखा है। पांच जजों की पीठ में एक जज ने जन्मभूमि के मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया था। जजमेंट के आखिरी हिस्से में कहा गया है कि राम जन्मभूमि के मसले पर हममे से एक जज ने सहमति नहीं जताई है। आखिर जज ने इसके खिलाफ आपत्ति क्यों जताई इस बात का जिक्र जजमेंट में है।

पिछले फैसले में था जवाब
इस मामले में 2010 के इलाहाबाद कोर्ट के फैसले को देखें तो उसमे इसकी जानकारी दी गई थी कि क्या भगवान राम का वहां जन्म हुआ था, क्या मंदिर को तोड़ा गया था ताकि उसपर मस्जिद बनाई जाए। उस फैसले में जजों की राय खुलकर लिखी गई थी। यही नहीं हाल के संवैधानिक पीठ के फैसलों पर नजर डालें तो उसमे भी जजों की राय सामने रखी गई है। आधार और गोपनीयता के अधिकार को लेकर कोर्ट ने जो फैसला दिया था उसमे जजों की राय को उनके नाम के साथ उजागर किया गया था।

विवादित स्थल पर बनेगा राम मंदिर
5-0 से कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में कहा गया है कि 2.77 एकड़ की अयोध्या में विवादित जमीन केंद्र सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट को दी जाएगी जोकि राम मंदिर के निर्माण का काम करेगी। पांच जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हिंदुओं को कुछ शर्तों पर मंदिर की जमीन दी जाएगी। हिंदू पक्ष को इस जमीन देने के साथ ही मस्जिद को बनाए जाने के लिए पांच एकड़ की जमीन देनी होगी।












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