Ayodhya Verdict: 1949 में मस्जिद के भीतरी हिस्से में मूर्तियां रखना गलत था: SC

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    Ayodhya Verdict:अयोध्या में ही बनेगा Ram Mandir और Masjid, देखिए फैसले की बड़ी बातें |वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। देश के सबसे बहुचर्चित कोर्ट केस अयोध्या राम जन्मभूमि - बाबरी मस्जिद विवाद केस में शनिवार को फैसला आ गया है और इसके बाद अब तक विवादित रही जमीन पर रामलला विराजमान ही रहेंगे वहीं दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष को अलग से मस्जिद के लिए जमीन देने के निर्देश दिए हैं। आज पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में एतिहासिक फैसला सुनाया है, बता दें कि इस बेंच ने लगातार 40 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद बीती 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

    शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज

    शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज

    फैसला सुनाते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि मुस्लिमों ने इस बात के सबूत पेश नहीं किए कि 1857 से पहले स्थल पर उनका ऐक्सक्लुसिव कब्जा था। सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज कर दी, गौरतलब है कि मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि वहां लगातार नमाज पढ़ी जाती रही थी।

     1949 में मूर्तिया रखना कानून के विपरीत काम था: SC

    1949 में मूर्तिया रखना कानून के विपरीत काम था: SC

    कोर्ट ने यह भी कहा कि 1992 में बाबरी मस्जिद को ढहाना और 1949 में मूर्तिया रखना कानून के विपरीत काम था, मालूम हो कि 22/23 दिसंबर 1949 की रात मस्जिद के भीतरी हिस्से में रामलला की मूर्तियां रखी गईं थी, 23 दिसंबर 1949 की सुबह बाबरी मस्जिद के मुख्य गुंबद के ठीक नीचे वाले प्रभु राम की वहीं मूर्तियां प्रकट हुई थीं, जो कई दशकों या सदियों से राम चबूतरे पर विराजमान थीं और जिनके लिए वहीं की सीता रसोई या कौशल्या रसोई में भोग बनता था, राम चबूतरा और सीता रसोई निर्मोही अखाड़ा के नियंत्रण में थे और उसी अखाड़े के साधु-संन्यासी वहां पूजा-पाठ किया करते थे।

     '29 दिसंबर 1949 को मस्जिद कुर्क कर दी गई थी'

    '29 दिसंबर 1949 को मस्जिद कुर्क कर दी गई थी'

    23 दिसंबर को ही पुलिस ने मस्जिद में मूर्तियां रखने का मुकदमा दर्ज किया था, जिसके आधार पर 29 दिसंबर 1949 को मस्जिद कुर्क कर उस पर ताला लगा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि पुरात्व विभाग ने मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं, लेकिन पुरातत्व विभाग यह भी नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी।

    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड फैसले से असंतुष्ट

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि, कोर्ट के जजमेंट से हम असंतुष्ट हैं लेकिन न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की नाराजगी जमीन के बंटवारे को लेकर है। बोर्ड ने कहा कि हम फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन इससे संतुष्ट नहीं है। लोगों से अपील है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें और शांति बनाए रखें। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव एडवोकेट जफरयाब जिलानी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, कोर्ट के जजमेंट में बहुत सी बातें संविधान से है। हमारी जमीन को दूसरे पक्ष को दे दिया गया है, न्याय के रूप में सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला हमें स्वीकार नहीं है। हम अपना हक पाने के लिए कानूनी सहारा तलाशेंगे।

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