Ayodhya Verdict: गृह मंत्री अमित शाह ने फैसले से पहले नहीं बुलाई है कोई अर्जेंट मीटिंग, पार्टी ने किया खबर का खंडन
नई दिल्ली। अब से कुछ देर बाद सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मामले में अपना फैसला सुनाएगा। 40 दिनों की सुनवाई के बाद आ रहे एतिहासिक फैसले से पहले देशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वहीं, कुछ ऐसी खबरें भी आई थीं कि बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने एक आकस्मिक मीटिंग बुलाई है। पार्टी की तरफ से अब इस खबर का खंडन कर दिया गयास है। पार्टी ने कहा है कि शाह की तरफ से पार्टी प्रवक्ताओं की कोई भी अर्जेंट मीटिंग नहीं बुलाई गई है। मीडिया में खबरें थीं कि शनिवार सुबह बुलाई गई यह मीटिंग सुबह 10 बजे से शुरू होगी। कहा जा रहा था शाह, पार्टी रणनीति को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं।

दिल्ली में रहेंगे RSS प्रमुख
इसी बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी राजधानी दिल्ली पहुंच चुके हैं। भागवत स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं और वह आज दिल्ली में ही रहेंगे। गृह मंत्री अमित शाह के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनके घर के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है और किसी को भी वहां से गुजरने की इजाजत नहीं है। अयोध्या विवाद की शुरुआत सन् 1853 में उस समय हुई थी जब पहली बार इसे लेकर सांप्रदायिक हिंसा की घटना दर्ज की गई। माना जा रहा है कि शनिवार को आ रहा फैसला इस पूरे विवाद पर पूर्णविराम लगाने में सफल होगा। दिसंबर 1992 में जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया था, उसके बाद से ही जमीन पर मालिकाना हक को लेकर विवाद जारी है। करीब तीन दशकों में इस मुद्दे ने देश की राजनीति को काफी बदला और एक नया स्वरूप दिया। शनिवार को आने वाले इस फैसले के मद्दनेजर अयोध्या समेत पूरे यूपी में धारा 144 लागू की गई है, साथ ही स्कूल-कॉलेज भी बंद रखे गए हैं। सरकार और प्रशासन ने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है। अयोध्या को किले में तब्दील कर दिया गया है। बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा 5 जजों की संविधान पीठ में जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं।












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