अयोध्या पर फैसला: निर्मोही अखाड़े का विवादित जमीन पर दावा खारिज, लेकिन ट्रस्ट में मिलेगा प्रतिनिधित्व
नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि की विवादित जमीन पर निर्मोही अखाड़ा का दावा तो खारिज कर दिया है, लेकिन उसे राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व देने का फैसला सुनाया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल-142 का उपयोग किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का निर्मोही अखाड़ा ने स्वागत किया है।

अयोध्या में रामजन्मभूमि की विवादित जमीन पर एक दावेदार निर्मोही अखाड़ा भी था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दावेदारी ठुकरा दी है। हालांकि अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में उसे भी प्रतिनिधित्व दिया जाय। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्मोही अखाड़ा के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने कहा है कि, "150 वर्षों के हमारे संघर्ष को पहचानने के लिए निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट का आभारी है और इसने निर्मोही अखाड़ा को केंद्र सरकार की ओर से बनाए जाने वाले श्री राम जन्मस्थान मंदिर के निर्माण एवं प्रबंध के लिए गठित होने वाले ट्रस्ट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है।"
क्या है संविधान का आर्टिकल-142
गौरतलब है कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जिस आर्टिकल 142 का इस्तेमाल किया है, उसमें उसे यह अधिकार है कि किसी ऐसे दुर्लभ मामले में जहां कानून से उसे कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिखाई देता, वह अपने विवेक का उपयोग कर सकता है।
आपको बता दें कि रामजन्मभूमि में निर्मोही अखाड़ा भी अपने स्वामित्व का दावा करता रहा है, लेकिन वह शुरू से रामलला के पक्ष में ही रहा है।












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