Ram Mandir: राम मंदिर में लोहे या स्टील का प्रयोग नहीं, उम्र 1000 वर्ष से अधिक, निर्माण में छिपा है रहस्य
Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर राम मंदिर अब प्राण- प्रतिष्ठा के लिए तैयार है। 22 जनवरी को पीएम मोदी हाथों मंदिर के गर्भ गृह में रामलला के विग्रह की स्थापना के साथ दिव्य अनुष्ठान संपन्न होगा। दुनिया भर के सनातनधर्मी इस अनुष्ठान को बड़ी निष्ठा के साथ देख रहे हैं। इस बीच रामलला की जन्मभूमि पर बने दिव्य भवन की खूबियों का भी जिक्र जोर शोर से हो रहा है। ट्रस्ट और निर्माण एजेंसियों की मानें तो ये मंदिर 1000 वर्षों से अधिक समय तक टिकने वाला है। मंदिर भूकंपरोधी तकनीकी के अलावा कई खूबियों से भरा है।
राम मंदिर के शिल्पकार चंद्रकांत सोमपुरा ने वर्षों पहले जो मंदिर की डिजाइन तैयार की थी, वो कुछ अहम बदलावों के साथ अब साकार हो चुकी है। मंदिर के आर्किटेक्ट को डिजाइन करने से पहले सोमपुरा परिवार 100 से अधिक मंदिरों को डिजाइन कर चुका है। दरअसल चंद्रकांत सोमपुरा का परिवार 15 पीढ़ियों से मंदिर की डिजाइन तैयार करने का काम रहा है।

वास्तुशिल्प डिजाइन चंद्रकांत सोमपुरा द्वारा नागर शैली या उत्तरी भारतीय मंदिर डिजाइन के अनुसार बनाया गया था, जो 15 पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक परंपरा के रूप में विरासत मंदिर संरचनाओं को डिजाइन कर रहे हैं। परिवार ने 100 से अधिक मंदिरों को डिजाइन किया है।
कुतुब मीनार की 70% ऊंचाई
राम मंदिर परिसर का कुल क्षेत्रफल क्षेत्रफल 2.7 एकड़ है। जिसमें से करीब लगभग 57,000 वर्ग फीट पर मंदिर का निर्माण किया गया है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के मुताबिक राम मंदिर तीन मंजिला होगा। मंदिर की ऊंचाई 161 फीट या कुतुब मीनार की ऊंचाई का लगभग 70% होगी।
राम मंदिर की उम्र 1000 वर्ष क्यों?
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर के निर्माण को लेकर पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंदिर में हाई क्वालिटी के ग्रेनाइट, बलुआ पत्थर और संगमरमर का उपयोग किया गया है। जोड़ों में सीमेंट या चूने के मोर्टार का कोई उपयोग नहीं किया गया है। पूरे मंदिर में केवल ताला और चाबी ही लोहे की होगी। वहीं सीबीआरआई का कहना है कि राम मंदिर में 2,500 साल टिकने वाली भूकंप रोधी तकनीकी का इस्तेमाल किया गया है। नृपेंद्र मिश्रा का कहना है कि मंदिर एक हजार साल से अधिक समय तक चलने के लिए बनाया गया है। उनके एक बयान के मुताबिक मंदिर में लोहे या स्टील का इस्तेमाल नहीं किया गया है क्योंकि लोहे की उम्र महज 80-90 साल होती है।












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