Ram Mandir Ayodhya: 2024 के चुनाव में 543 सीटों पर बीजेपी की क्या है तैयारी? बिहार के लिए तो है 'लव-कुश' प्लान

2024 के लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने जिस तरह से अयोध्या में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए आयोजित विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस के कार्यक्रमों को सक्रिय समर्थन दिया है, उससे स्पष्ट है कि पार्टी इसे चुनावों में इस बड़ा बड़ा मुद्दा बनाने के लिए तैयार है।

22 जनवरी, 2024 को आयोजित भगवान राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को पार्टी ने माइक्रो-लेवल पर एक अभियान बनाने की तैयारी की हुई है। देश के सभी 543 लोकसभा क्षेत्र उसके मिशन 2024 में शामिल हैं।

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राम मंदिर आंदोलन और निर्माण पर बुकलेट जारी करेगी बीजेपी
बीजेपी देशभर में राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या में पवित्र राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण में अपनी भूमिका को लेकर एक बुकलेट वितरित करने वाली है। इसमें अयोध्या आंदोलन की शुरुआत से लेकर अदालतों में अड़चनें लगाने वाली शक्तियों की कारगुजारियां भी उजागर की जा सकती हैं।

राम लला के प्राण-प्रतिष्ठा के दिन बूथों पर दीया जलाने की योजना
इसके अलावा इसी थीम पर भारतीय जनता पार्टी बूथ-स्तर के भी कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में है। 22 जनवरी, 2024, जिस दिन पवित्र राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया गया है, उस दिन पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से प्रत्येक बूथों पर दीया जलाने जैसे कार्यक्रम के भी आयोजन करने की योजना है।

वीएचपी-संघ के कार्यक्रमों में भाजपा का सक्रिय योगदान
अभी जो देश भर में वीएचपी और आरएसएस की ओर से राम मंदिर निर्माण से पहले कलश यात्रा और अयोध्या आने के निमंत्रण के साथ घर-घर जाकर 'अक्षत' वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, उसमें बजेपी का पूरा समर्थन हासिल है।

तीन महीने में 2.5 करोड़ लोगों को राम लला के दर्शन कराने की तैयारी
हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में ही बीजेपी ने सत्ता में आने पर मुफ्त में अयोध्या धाम की यात्रा कराने का वादा किया था। 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के समापन के अगले ही दिन यानी 23 जनवरी से पार्टी देश के 543 लोकसभा क्षेत्रों से करीब 2.5 करोड़ लोगों को राम लला के दर्शन करवाने की योजना तैयार कर चुकी है।

लोकसभा चुनावों के घमासान शुरू होने तक चलेगी अयोध्या यात्रा
यह कार्यक्रम तीन महीने यानी लगभग अप्रैल के आधे से ज्यादा समय तक चलेगा, जब देश में लोकसभा चुनाव के लिए घमासान जारी होगा। यही नहीं प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में जिस तरह से देश भर के प्रमुख चेहरों को राम मंदिर के पवित्र प्रांगण में जुटाने की तैयारी है, उसके माध्यम से भी सीधा संदेश देने की तैयारी हो चुकी है।

बिहार के लिए 'लव-कुश यात्रा' तैयार
बीजेपी को मालूम है कि बिहार में जो जातिगत समीकरण अभी बन गए हैं और जिस तरह से जातिगत जनगणना कराई गई है और ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर इंडिया ब्लॉक की सरकार ने अपना गणित बिठाने की कोशिश की है, उसमें सामान्य हिंदुत्व के एजेंडे पर हिंदुओं को एकजुट करने का काम आसान नहीं होगा।

इसलिए पार्टी ने बिहार के लिए खास रणनीति तैयार की है। यहां लालू-नीतीश के जातिगत 'तिकड़म' को तोड़ने के लिए पार्टी ने 20 दिनों की 'लव-कुश यात्रा' की योजना तैयार कर रखी है।

अगर अयोध्या और भगवान राम और माता सीता के संदर्भ में देखें तो लव और कुछ उनके जुड़वां पुत्र थे। लेकिन, बिहार में लव और कुश का बड़ा राजनीतिक आधार भी है। यहां लव और कुश का इस्तेमाल कुर्मी और कोयरी (कुशवाहा) जातियों के लिए होता है, जो खुद को 'लव और कुश' का वंशज मानते हैं।

राज्य में 'लव-कुश यात्रा' 2 जनवरी को पटना से शुरू करने की योजना है, जो राज्य के विभिन्न जिलों से होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। इस दौरान विभिन्न जगहों पर हवन और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है।

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