Atul Subhash Case: बच्चे की चिंता या अहंकार का खेल? निकिता से अंतिम सांस तक लड़ेगा अतुल सुभाष का परिवार
Atul Subhash Case: समस्तीपुर के रहने वाले AI इंजीनियर अतुल सुभाष की सुसाइड मामले में उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया को बेंगलुरु के लोअर कोर्ट से शनिवार को जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद अतुल के भाई पवन मोदी ने कहा कि "वो लोवर कोर्ट की ओर से दी गई बेल के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।" बेंगलुरु की सिटी सिविल कोर्ट ने शनिवार को निकिता सिंघानिया, उनकी सास निशा सिंघानिया और साले अनुराग सिंघानिया को जमानत दी थी।
अतुल के भाई विकास मोदी ने कहा कि "हमने जमानत का विरोध करते हुए 15 आपत्तियां दी थीं, जो जमानत का विरोध करने के लिए बहुत मजबूत आधार थीं।" उनका आरोप था कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और जमानत देने के फैसले में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि "हम अपने भाई को न्याय दिलाने के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे।"

3 साल के बच्चे को बोर्डिंग स्कूल में डाला
विकास मोदी ने यह भी बताया कि अतुल सुभाष के 3 साल के बेटे व्योम को निकिता सिंघानिया ने फरीदाबाद के एक बोर्डिंग स्कूल में दाखिल करवा दिया है, और स्कूल के फॉर्म में माता-पिता के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी को बच्चे की कस्टडी को लेकर सुनवाई तय की है। 9 दिसंबर 2024 को अतुल सुभाष ने सुसाइड कर लिया था और इसके पहले उन्होंने वीडियो और 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी पत्नी और सास उन्हें "बैंक के एटीएम" की तरह इस्तेमाल करती थीं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
निकिता सिंघानिया को जमानत मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। एक यूजर ने सुभाष अतुल के भाई के बयान को साझा करते हुए लिखा कि निकिता सिंघानिया ने अपने 3 साल के बेटे को सतयुग दर्शन विद्यालय, फरीदाबाद में एक बोर्डिंग स्कूल में दाखिल कराया, जिसकी वार्षिक फीस 1.5 लाख रूपए थी, जबकि वह गुरुग्राम में काम करती थीं और उनका परिवार यूपी के जौनपुर में रहता था। उन्होंने अतुल सुभाष, बच्चे के पिता को अपने बेटे से मिलने तक की अनुमति नहीं दी, जबकि 40,000 रूपए प्रति महीने का भरण-पोषण मांग रही थीं। क्या यह उचित था?
क्या यह फैसला सच में बच्चे के भले के लिए था, या यह अहंकार, गुस्से या लालच से प्रेरित था?एक 3 साल के बच्चे को प्यार और देखभाल की जरूरत होती है, न कि अलगाव और कोर्ट कचहरी के झगड़े।
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी को लेकर जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट में समस्तीपुर के AI इंजीनियर अतुल सुभाष के सुसाइड मामले में बच्चे की कस्टडी को लेकर सुनवाई जारी है। अतुल की मां, अंजू देवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपने 4 साल के पोते की कस्टडी मांगी है। याचिका में अंजू देवी ने कहा है कि निकिता और उसके परिवार ने अतुल को झूठे मामलों में फंसा कर मानसिक उत्पीड़न किया, जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या की। अब उन्हें डर है कि निकिता के पास उनका पोता सुरक्षित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल बच्चा अपनी मां के पास है, और इस मामले पर हरियाणा सरकार और अतुल की पत्नी निकिता से बच्चे की स्थिति पर हलफनामा मांगा है। अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया हलफनामा जमा करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक बच्चा अपनी मां के पास है, तब तक उसे लेकर कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि बच्चे का पता लगाने के लिए दाखिल की गई हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि बच्चा अपनी दादी से संपर्क में नहीं है और दादी उसके लिए अजनबी है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनाया था यह फैसला
अतुल सुभाष के सुसाइड मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को निकिता सिंघानिया की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। निकिता के वकील ने कोर्ट में कहा था कि शिकायत में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो यह साबित करता हो कि निकिता ने अतुल को आत्महत्या के लिए उकसाया। इस पर जस्टिस एसआर खन्ना ने एफआईआर खारिज करने से इंकार कर दिया।
अतुल की आत्महत्या और आरोप
9 दिसंबर 2024 को बेंगलुरु में अतुल सुभाष ने आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक घंटे 20 मिनट का वीडियो और सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी निकिता पर गंभीर आरोप लगाए थे। अतुल के परिवार ने निकिता और उसके परिवार पर अतुल को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया।
इस मामले में निकिता, उनकी मां, भाई और चाचा पर एफआईआर दर्ज की गई थी। 4 जनवरी को कर्नाटक की निचली अदालत ने निकिता, उनकी मां और भाई को जमानत दे दी थी, जबकि चाचा पहले ही जमानत पर हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
अंजू देवी ने अपनी याचिका में कहा था कि निकिता के जेल जाने के बाद से उन्हें अपने पोते के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है, और बच्चे का पता लगाकर उसे उनके पास सौंपा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 20 दिसंबर को इस याचिका पर हरियाणा, यूपी और कर्नाटक सरकारों को नोटिस जारी किया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को तय की है, जब बच्चे की कस्टडी पर नया फैसला लिया जाएगा।












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