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नज़रिया: भाजपा के लिए बिगड़ी अर्थव्यवस्था सुधारने का आख़िरी मौक़ा

By Bbc Hindi
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    बजट से उम्मीदें
    PUNIT PARANJPE/AFP/Getty Images
    बजट से उम्मीदें

    सोमवार से भारतीय संसद के बजट सत्र का पहला चरण शुरू हुआ जो 9 फ़रवरी तक चलेगा. इस सत्र के दौरान देश का आम बजट पेश किया जाएगा.

    इस साल पेश होने वाला बजट भाजपा सरकार का चौथा बजट है और आख़िरी पूर्ण बजट है. मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल अगले साल मई तक है और इससे पहले नई लोकसभा के लिए चुनाव होंगे.

    ऐसे में भाजपा के लिए ये बजट सत्र और बजट काफी अहमियत रखते हैं. पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक मामलों के जानकार एमके वेणु का नज़रिया.

    भाजपा को ऐसे वक्त आख़िरी बजट पेश करने का मौका मिल रहा है जब अर्थव्यवस्था ख़राब स्थिति में है.

    बीते तीन साल के जीडीपी आंकड़े देखें तो 2015-16 में ये 7.9 फीसदी था, 2016-17 में ये 7.1 फीसदी हो गया और 2017-18 में 6.5 फीसद तक नीचे आ गया. ये सभी सरकारी आंकड़े हैं.

    साथ ही कृषि क्षेत्र की ग्रोथ लुढ़क गई है और किसानों की आमदनी पर बहुत चोट पहुंची है. मोदी जब आए थे तो उन्होंने कहा था कि लागत पर पचास प्रतिशत मुनाफ़ा मिलेगा. बाद में उन्होंने कहा कि किसानों की आय को 2022 तक दोगुना किया जाएगा. मगर ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा है.

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    अरुण जेटली
    DOMINIQUE FAGET/AFP/Getty Images
    अरुण जेटली

    साथ ही बेरोज़गारी भी बढ़ती जा रही है और नोटबंदी के बाद से छोटे उद्योगों की स्थिति भी ख़राब हुई है. इसको ठीक करने का एक प्रयास होगा आख़िरी बजट में.

    सरकार के सामने बढ़ते वित्तीय घाटे की चुनौती भी है. जीएसटी को बड़ा आर्थिक सुधार बताया जा रहा था, लेकिन इस कारण सरकार की आमदनी कम होती दिख रही है. जानकारों का कहना है कि सरकार को जीएसटी को ठीक से लागू नहीं कर पाने के कारण एक लाख करोड़ रुपये का घाटा होगा.

    बजट से उम्मीद

    कहा जाए तो अर्थव्यवस्था पर सरकार संकट से घिरी है. लोगों की नज़रें भी इस बात पर हैं कि उन्हें बजट में कुछ ख़ास मिलेगा या नहीं.

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    बजट से उम्मीदें
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    बजट से उम्मीदें

    बेरोज़गारी और कृषि के मुद्दों का तो राजनीतिकरण हुआ है और इसका असर हमें गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान दिखा भी. यहां ग्रामीण इलाकों में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा जबकि शहरों में उसका प्रदर्शन अच्छा रहा.

    हाल में राजस्थान और मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव हुए थे जहां भाजपा का प्रदर्शन खराब रहा. कई राज्यों में अभी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और कुछ भी ठीक-ठीक कह पाना मुश्किल है.

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    नरेंद्र मोदी
    AFP
    नरेंद्र मोदी

    अचानक लगाई गई नोटबंदी और फिर जीएसटी की दोहरी मार के कारण अर्थव्यवस्था को जो नुकसान हुआ है उससे उबरने में देश को एक-डेढ़ साल लगेगा. 2019 के चुनावों तक हमें इनका सकारात्मक प्रभाव दिखने लगेगा.

    जीडीपी आंकड़ों में सुधार

    कुछ जानकार मानते हैं कि 2018-19 में जीडीपी के आंकड़ों में थोड़ा सुधार आएगा. लेकिन ये देखना अभी बाकी है. 2017 में दुनिया की ज़्यादातर अर्थव्यवस्थाओं में ग्रोथ बढ़ी है, लेकिन भारत में जीडीपी ग्रोथ गिरती दिख रही है.

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    बजट से उम्मीदें
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    किसानों में मैं ख़ासकर एक गुस्सा देख रहा हूं. उन्हें जो वायदे किए गए थे वो पूरे नहीं किए गए हैं और वो ख़ुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं.

    गुजरात चुनाव के बाद इन्होंने खुद बोला कि उन्हें कड़ी टक्कर मिली थी और बड़ी मुश्किल से उन्होंने चुनाव निकाला है. प्रधानमंत्री ने खुद अपनी संसदीय समिति के सदस्यों से कहा, "मैं ही जानता हूं कि कितनी मुश्किल से मैंने ये चुनाव निकाला है."

    बीते दो-तीन साल में जब भी संसद का सत्र बैठा है विपक्ष ने नोटबंदी का मुद्दा ज़रूर गरमाया है. साथ ही अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हालत का मुद्दा भी विपक्ष ने उठाया है.

    बजट पेश होगा तो अर्थव्यवस्था का मुद्दा तो गरमाएगा ही, लेकिन सत्र खुलते ही पद्मावत, करणी सेना और हाल में जो घटनाएं हुई हैं उन पर सवाल ज़रूर उठाए जाएंगे. जिस तरह देखा गया है कि राज्यों में भाजपा सरकारें मूकदर्शक बनी हुई हैं, इन मुद्दों पर सवाल उठेंगे ही.

    इस सत्र में हाल में सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने जो मुद्दा उठाया है उसकी भी बात होगी कि सरकार ने हमारे गणतंत्र के जो बड़े खंभे हैं उनके साथ कैसा व्यवहार किया है.

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    बजट से उम्मीदें
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    कांग्रेस ये मुद्दा बजट सत्र में उठा सकती है और उन्हें इस पर एनसीपी नेता शरद पवार का भी समर्थन मिल सकता है. मुझे लगता है कि ये एक बड़ा महत्वपूर्ण बनेगा.

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    पीएम मोदी की चुप्पी पर भी विपक्ष सवाल कर सकती है क्योंकि कई अहम मुद्दों पर उन्होंने अब तक कुछ भी नहीं कहा है.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Attitude The last chance to improve the worsening economy for the BJP

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