अटल बिहारी वाजपेयी जब दब गए थे तांगे के नीचे

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    नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार को 93 साल की उम्र में निधन हो गया। लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के एम्स में उन्होंने आखिरी सांस ली। तबीयत बिगड़ने पर 11 जून को उन्हें एम्स लाया गया था। बीते कई दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी और वो वेंटिलेटर पर थे। अटल बिहारी वाजपेयी पांच दशक से ज्यादा वक्त तक भारतीय राजनीति में एक अहम चेहरा रहे। उनके नाम के साथ राजनीति में कई रिकॉर्ड हैं तो कई ऐसी बातें भी हैं, जो उनके साथ हुईं लेकिन ज्यादा लोगों को पता नहीं चल सका। एक ऐसा ही वाकया है उत्तर प्रदेश में उनका तांगा उलट जाने और उनके उसके नीचे दब जाने का।

    जब पलटा अटल बिहारी का तांगा

    जब पलटा अटल बिहारी का तांगा

    अटल बिहारी वाजपेयी 70 के दशक में उत्तर प्रदेश के मिरहची आए थे। यहां वो कच्चे रास्ते होने के चलते अपनी गाड़ी छोड़ कस्बे के ही रामभरोसे के साथ तांगे से मारहरा के लिए चल दिए। रास्ता खराब था, ऐसे में एक जगह बड़ा गड्ढा आया और तांगे का संतुलन ऐसा बिगड़ा कि तांगा पलट गया। अटल बिहारी वाजपेयी और रामभरोसे दोनों तांगे के नीचे दब गए।

    साथी सांसद को बताया था किस्सा

    साथी सांसद को बताया था किस्सा

    तांगे के नीचे दबे अटल बिहारी और रामभरोसे को खेतों में काम कर रहे लोगों ने निकाला और किसी तरह तांगे को सीधा कर उन्हें विदा किया। वाजपेयी के लिए राहत की बात ये रही कि उन्हें चोट नहीं आई और उन्होंने मारहरा पहुंचकर भी किसी से इसका जिक्र नहीं किया। कुछ समय बाद अटल बिहारी वाजपेई ने अपने साथी सांसद डा. महादीपक सिंह शाक्य को ये किस्सा सुनाया था कि कैसे वो तांगे के नीचे दबे थे।

    पैरोल मिलने के बाद पहुंचे मथुरा के पेडे खाने

    पैरोल मिलने के बाद पहुंचे मथुरा के पेडे खाने

    अटल बिहारी वाजपेयी खाने-पीने के भी काफी शौकीन थे मथुरा के पेड़े उनको खास पसंद रहे। मथुरा से उनसे मिलने के लिए जाने वाले लोग भी अकसर उनके लिए यहां के पेडे ले जाते थे। 1975 में वाजपेयी को भी गिरफ्तार किया गया था। वाजपेयी के करीब रहे भाजपा नेता बांकेबिहारी माहेश्वरी ने बताया था कि आपातकाल में जब अटल बिहारी वाजपेयी को पैरोल मिली तो वह मथुरा आ गए। हलवाई के यहां पहुंचकर मिठाई खाई।

    खुद भी बनाते थे खाना

    खुद भी बनाते थे खाना

    वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला ने बताया कि जब भी हमसे मिलने आते थे तो रसोई में घुसकर काफी व्यंजन बनाते थे। अपना बचपन याद करते हुए करूणा ने कहा कि अटल जी के साथ बीता उनका हर लम्हा बेहद खास हैं, वो हमेशा बहुत अच्छी-अच्छी बातें बताया करते थे। करूणा ने कहा कि उन्हें कढ़ी, गर्म गुलाब जामुन और खीर बहुत पसंद हैं।

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