Diwali 2021: इन उपायों को अपनाकर बढ़ते वायु प्रदूषण से अपनी सुरक्षा कर सकते हैं अस्थमा के मरीज
दिवाली वैसे तो हर्षोल्लास का त्योहार है, लेकिन अस्थमा मरीजों के लिए यह मुसीबत लेकर आता है। दिवाली पर पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा मरीजों की समस्या दोगुनी हो जाती है।
नई दिल्ली, 4 सितंबर। दिवाली वैसे तो हर्षोल्लास का त्योहार है, लेकिन अस्थमा मरीजों के लिए यह मुसीबत लेकर आता है। दिवाली पर पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा मरीजों की समस्या दोगुनी हो जाती है। यह विडंबना ही है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में शामिल के बावजूद भारत ने पटाखों पर पूरी तरह से बैन नहीं लगाया है। हालांकि इस बार राजधानी दिल्ली में पटाखों की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह से बैन है। फेफड़ों की समस्या में योगआसन और प्राणायाम को बेहद कारगर बताया गया है।

योग गुरु स्वामी रामदेव कहते हैं कि अस्थमा मरीजों के अलावा सामान्य नागरिक भी नियमित तौर पर योग और प्राणायाम कर अपने फेफड़ों को सुरक्षित रख सकता है। आइए जानते हैं फेफड़ों की विभिन्न बीमारियां और उनसे बचने के उपाय के बारे में....
वायु प्रदूषण से होने वाले रोग
अस्थमा, ब्रॉकाइटिस, ह्रदय रोग, एलर्जी, रक्त संबंधी रोग, फेफड़ों का कैंसर ये ऐसे रोग हैं जो वायु प्रदूषण के कारण होते हैं। हालांकि स्वस्थ जीवनशैली और नियमित तौर पर योग और प्राणायाम कर इन रोगों से न केवल बचा जा सकता है बल्कि इनसे मुक्ति भी पाई जा सकती है।
स्वस्थ फेफड़ों के लिए योगासन
योगिक जॉगिंग: योगिक जॉगिंग अस्थमा के मरीजों के लिए काफी मददगार है। यह फेफड़ों में ऑक्सीन के स्तर को बढ़ाती है। इसके अलावा इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है व शरीर मजबूत होता है। योगिक जॉगिंग भुजाओं और पैरों को मजबूत बनाने में भी असरकारक है।
सूर्य नमस्कार- सूर्य नमस्कार आपके शरीर से गंदगी बाहर निकालता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसे करने से पाचन शक्ति अच्छी होती है। यह ऊर्जा का स्तर बढ़ाने में मददगार है। इसके अलावा यह वजन बढ़ाने में भी सहायक है।
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सूक्ष्म व्यायाम: सूक्ष्म व्यायाम करने से थकावट नहीं होती, यह दर्द निवारक का काम करते हैं। सूक्ष्म व्यायाम से शरीर सारा दिन फिट रहता है। यह शरीर से आलस दूर करता है।
ताड़ासन- ताड़ासन शरीर को लचीला बनाता है। यह थकान, तनाव और चिंता को दूर करता है। यह गठिया के लिए विशेष तौर पर फायदेमंद है। ह्रदय रोगों में यह कारगर है। इसके अलावा यह कमर को मजबूती देता है।
इसके अलावा भुजंगआसन और मरकटासन के माध्यम से भी शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखा जा सकता है।
नियमित तौर पर करें ये प्राणायाम
अनुलोम विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका, भ्राम्री, उज्जई, उद्गीत इन प्राणायाम का अस्थमा मरीजों को नियमित तौर पर अभ्यास करना चाहिये। इसके अलावा अस्थमा मरीज योग करते समय गर्म कपड़े पहनें और अपनी डाइट का पूरा ध्यान रखें। इस तरह अस्थमा मरीज एक स्वस्थ जीवनशैली जी सकता है।
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