2024 में इन सात राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव, जानें किसकी है सरकार और क्या हैं नए समीकरण?
Assembly elections 2024, देश में 2024 में लोकसभा चुनाव के चुनाव होने हैं। लेकिन लोकसभा चुनावों के अलावा इस साल 7 राज्यों में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं। इन सात राज्यों में चार राज्यों में बीजेपी या बीजेपी समर्थित सरकारें हैं।
बीजेपी फिलहाल लोकसभा के चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है। जिसमें उसके लिए इन सात राज्यों में एक स्टेट सबसे अहम है। वह है महाराष्ट्र जहां 48 लोकसभा की सीटें हैं। जिनमें सबसे अधिक सीटें बीजेपी या उसकी सहयोगी पार्टियों के पास हैं।

महाराष्ट्र:
288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में फिलहाल बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजीत पवार गुट) की मिलीजुली सरकार काम कर रही है। राज्य में 2019 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। जिसमें बीजेपी को 105 सीटों पर जीत मिली, वहीं शिवसेना 56 सीटों पर जीती थी। लेकिन चुनाव के बाद सीएम पद को लेकर दोनों दलों में खींचतान शुरू हो गई।
जिसके बाद शिवसेना ने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़कर कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनी ली। सीएम बने उद्धव ठाकरे। लेकिन जू 2022 में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत कर दीऔर वह 39 विधायकों के साथ पार्टी से अलग हो गए थे और उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना ली थी। बाद में अजीत पवार भी एनसीपी से विधायक तोड़ गठबंधन सरकार में शामिल हो गए।
हरियाणा
90 सीटों वाले हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी गठबंधन की सरकार है। राज्य में बीजेपी के नेता मनोहर लाल खट्टर सीएम हैं और जेजेपी के दुष्यंत चौटाला डिप्टी सीएम हैं। लेकिन 2019 के चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। सत्ता धारी बीजेपी 40 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। कांग्रेस ने 31 सीटों पर कब्जा जमाया है। जेजेपी 10 सीटों पर विजयी रही है। हरियाणा लोकहित पार्टी 1, आईएनएलडी 1 और 7 सीटें अन्यों को मिली है। बीजेपी ने जेजेपी के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई।
ओडिशा
147 सीटों वाले ओडिशा में पिछले कई दशकों से एक ही पार्टी का वर्चस्व है। वहां बीजेडी के नवीन पटनायक पिछले पांच कार्यकाल से राज्य के मुख्यमंत्री हैं। राज्य में 2019 के विधानसभा चुनावों में 46 विधानसभा सीटों में से नवीन पटनायक की पार्टी 112 सीट पर जीत हासिल की थी। बीजेपी 23, कांग्रेस 9 और लेफ्ट एक सीट जीत मिली थी। लेकिन इस बार मुकाबला थोड़ा कठिन होने वाला है। क्योंकि नवीन पटनायक की काफी उम्र हो चुकी है। वे इस अपने किसी उत्तराधिकारी को चुनाव में चेहरा बनाकर उतार सकते हैं।
आंध्र प्रदेश;
175 सीटों वाले आंध्र प्रदेश में फिलहाल वाईएसआर कांग्रेस की सरकार है। राज्य के मुखिया जगन मोहन रेड्डी हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू को हराकर पहली बार सत्ता हासिल की थी। जगन की पार्टी ने राज्य में 151 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं टीडीपी के खाते सिर्फ 23 सीटें आई थीं। इसके अलावा जनसेना पार्टी को 1 सीट मिली थी। हाल ही में तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। जिसका असर अब आंध्र में भी देखने को मिल रहा है। कांग्रेस राज्य में अपने खोए जनाधार को पाने की कोशिश में जुट गई है। वहीं टीडीपी फिर से सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है। वह जगन अपनी सत्ता को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं।
सिक्किम:
32 सीटों वाले राज्य सिक्किम में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा की सरकार है। यहां पार्टी के अध्यक्ष प्रेम सिंह तमांग मुख्यमंत्री हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव में कुल 32 सीटों में से 17 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि 15 सीटों पर सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने जीत हासिल की थी। लेकिन चुनाव जीतने के बाद सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग की पार्टी के 13 में से 10 विधायक भाजपा में शामिल हो गए। जिसके चलते राज्य में बीजेपी एक भी सीट ना जीतकर फिर भी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
अरुणाचल प्रदेश
60 सीटों वाले पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में फिलहाल बीजेपी की सरकार है। 60 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने बहुमत हासिल करते हुए घोषित 58 सीटों में से बीजेपी ने 37 सीटों पर जीत हासिल की थी। जेडीयू को 7 और कांग्रेस को 4 सीटें मिली थी। वर्तमान में बीजेपी के पेमा खांडू राज्य के मुख्यमंत्री हैं। इससे पिछले चुनाव में यहां कांग्रेस ने 42 सीट पर जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 11 सीटें जीती थीं।
जम्मू कश्मीर
114 सीटों वाले जम्मू कश्मीर में 2018 के बाद से कोई सरकार नहीं हैं। राज्य में अंतिम चुनाव 2014 में हुआ था। जिसमें पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। नतीजों में PDP 28 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि बीजेपी 25 सीटों के साथ दूसरी बड़ी पार्टी बनी थी। जिसके बाद बीजेपी औऱ पीडीपी ने मिलकर राज्य में सरकार बनाई। मुख्यमंत्री मुफ्ती मो. सईद बने।
लेकिन उनके निधन के बाद राज्य की सत्ता महबूबा मुफ्ती के हाथों में आ गई। जिसके बाद बीजेपी औऱ पीडीपी में दूरियां बढ़ने शुरू हो गई। भाजपा की ओर से समर्थन वापस लेने के बाद 19 जून 2018 को महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था और उसके बाद जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हुआ। बाद में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
इसके बाद पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए को हटा दिया। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठित किया गया। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के मुताबिक 31 अक्टूबर 2019 को अस्तित्व में आए केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में विधानसभा का प्रावधान है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल शासन की बागडोर संभाले हुए हैं।
हाल ही में हुए परिसीमन में विधानसभा क्षेत्रों की सीमा बदली गई है। उसमें नए इलाकों को शामिल किया गया है। सीटों की संख्या 107 से बढ़ाकर 114 कर दी गई है, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की भी 24 सीटें शामिल हैं। लेकिन चुनाव 90 सीटों पर होगा।
परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक नई विधान सभा के जम्मू क्षेत्र में 43 और कश्मीर घाटी संभाग में 47 सीटें होंगी। इनमें से नौ सीटें अनुसूचित जातियों और सात अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित होंगी। लोकसभा की पांच सीटों में दो-दो सीटें जम्मू और कश्मीर संभाग में होंगी जबकि एक सीट दोनों के साझा क्षेत्र में होगी।












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