बीजेपी के सीएम जोर देकर खुद क्यों ले रहे हैं अपने ऊपर हार की जिम्मेदारी?
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को अब महज कुछ ही महीनों का समय बचा है, ऐसे में जिस तरह से पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आए हैं उसने एक तरफ जहां कांग्रेस के हौसलों को बुलंद कर दिया है तो दूसरी तरफ भाजपा के लिए मुश्किल को बढ़ा दिया है। एक के बाद एक तकरबीन हर चुनाव में जिस तरह से भाजपा लगातार जीत दर्ज कर रही थी, उसे देखते हुए तमाम विपक्षी दलों के लिए भाजपा का सामना करना मुश्किल हो रहा था। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जबरदस्त लोकप्रियता। चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा के तमाम नेता जीत का श्रेय प्रधानमंत्री को देते आए हैं, लेकिन पांच राज्यों में पार्टी की हार के बाद पार्टी के नेता इसकी ठीकरा पीएम मोदी पर फोड़ने से बच रहे हैं।

शीर्ष नेतृत्व सकते में
पांच राज्यों में से तीन राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार काफी मायने रखती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि तीनों राज्यों को भाजपा के गढ़ के रूप में देखा जाता था। एक तरफ जहां मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल से भाजपा का शासन था तो दूसरी तरफ 2013 में राजस्थान में भाजपा ने जबरदस्त जीत दर्ज की थी। लेकिन तीनों ही राज्यों को गंवाने के बाद ब्रांड मोदी को बचाने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसकी मिसाल इन तीनों ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बयान में देखने को मिलती है।

मुख्यमंत्री खुद ले रहे हैं हार की जिम्मेदारी
चुनाव में हार के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने खुद आगे आकर चुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी ली और कहा कि इस हार की जिम्मेदारी मेरी है। यही नहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हार के बाद इसकी जिम्मेदारी ली और कहा कि हमे वोट तो खूब मिले लेकिन हम बहुमत से दूर हैं, लिहाजा सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करेंगे। हालांकि दोनों ही मुख्यमंत्रियों ने हार की जिम्मेदारी ली है लेकिन इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों ही राज्यों में ताबड़तोड़ चुनावी रैलियों को संबोधित किया था, ऐसे में चुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन की एक हद तक जिम्मेदारी उनपर भी बनती है, लेकिन पार्टी के भीतर से उनके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठी है।

मोदी मैजिक की हवा बनाए रखने की कवायद
हालांकि पार्टी के भीतर से तीन राज्यों में हार के बाद पीएम मोदी के खिलाफ कोई बड़ी आवाज नहीं उठी है, लेकिन पार्टी के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा की हार के बाद पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है। शत्रुघ्न सिन्हा ने शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि जब ताली कैप्टन को तो गाली भी कैप्टन को ही पड़नी चाहिए। बहरहाल भाजपा के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि मौजूदा समय में इन तीन राज्यों में हार के बाद भी पीएम मोदी ही एकमात्र ऐसा चेहरा नजर आते हैं जिनकी लोकप्रियता के दम पर पार्टी 2019 के चुनाव में जीत की उम्मीद कायम रख सकती है। लिहाजा पार्टी किसी भी सूरत में इस उम्मीद को खोना नहीं चाहती है। यही वजह है कि मोदी को हार की जिम्मेदारी से बचाने की तमाम कवायद हो रही है ताकि 2019 तक मोदी मैजिक की हवा बनी रहे।
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