assembly election 2022: भारत में पहली बार होगा बिना रैलियों के चुनाव

नई दिल्ली, 08 दिसंबर: कोरोना की प्रचंड लहर के बीच उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से चुनाव टालने का अनुरोध किया था। लेकिन इसके बाद भी चुनाव प्रक्रिया 14 जनवरी से आरंभ हो रही है जो 7 मार्च तक समपन्न होगी। 10 मार्च को मतों की गिनती होगी। चुनाव आयोग का तर्क है, चूंकि लगभग सभी दल समय पर चुनाव कराये जाने के पक्षधर थे, इसलिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किये गये। पिछले 24 घंटे में कोरोना के करीब 1 लाख 41 हजार नये मामले आये हैं। भारत में 21 फीसदी की दर से कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री के घर कोरोना पहुंच चुका है। सीएम की पत्नी और पुत्र संक्रिमत हैं। सीएम के प्रधान सचिव भी आइसोलेशन में हैं। उत्तर प्रदेश में रोजाना करीब दो हजार नये संक्रिमत मिल रहे हैं। महामारी की तीसरी लहर के बीच चुनाव कराये जाने का एलान किया गया है। चुनाव आयोग का दावा है कि कोरोना में सुरक्षित चुनाव कराना उसका कर्तव्य है। लेकिन उसका यह दावा पिछले साल फेल हो गया था। तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ा कर चुनावी रैलियां की गयी थीं। मद्रास हाईकोर्ट ने यहां तक कहा था कि चुनाव आयोग ही दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है। इसलिए 2022 में चुनाव आयोग ने 15 जनवरी तक रैलियों पर रोक लगा दी है। आशंका है कि भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार कोई चुनाव बिना सभा और रैलियों के होगा।

पंजाब- 117 सीट , बहुमत -59

पंजाब- 117 सीट , बहुमत -59

पंजाब विधानसभा का चुनाव एक चरण में होगा जो 14 फरवरी को सम्पन्न होगा। पंजाब में कांग्रेस की सरकार है। पीएम की सुरक्षा में चूक का मामला अब पंजाब में चुनावी मुद्दा बन गया है। 2017 कांग्रेस के 77 विधायक जीते थे। उपचुनाव जीत कर इनकी संख्या 80 तक पहुंच गयी। तब कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे थे। अब वे अलग पार्टी बना कर भाजपा के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार कांग्रेस, प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की अगुवाई में चुनाव लड़ रही है। आप के 20 विधायक जीते थे। अब उसके पास केवल 11 विधायक बचे हैं। अब आप भगवंत मान को सीएम फेस घोषित कर नये जोश के साथ चुनाव मैदान में है। किसानों ने बलबीर सिंह राजेवाल को सीएम उम्मीदवार घोषित किया। किसानों के चुनाव लड़ने से राजनीकि दलों के समीकरण प्रभावित हुए हैं। चुनाव का चौथा कोण भाजपा और अमरिंदर सिंह का गठबंधन बना रहा है। पंजाब का चुनाव इस बार काफी उलझा हुआ है।

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    उत्तर प्रदेश - 403 सीट, बहुमत- 202

    उत्तर प्रदेश - 403 सीट, बहुमत- 202

    उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होगा जो 10 फरवरी से 7 मार्च तक सम्पन्न होगा। 2017 के चुनाव में भाजपा 325, सपा 47, बसपा 19, कांग्रेस 7 सीटों पर जीती थी। बाद में बसपा में भयंकर टूटफूट हुई। उसके 15 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। अब बसपा के केवल 4 विधायक बचे हैं। पिछले चुनाव में भाजपा ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था। लेकिन इस बार वह अपना दल और निषाद पार्टी के साथ मिल कर चुनाव लड़ रही है। सुहेलदेव पार्टी ने इस बार सपा से गठबंधन किया है। सपा के साथ जयंत चौधरी का पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और लालू यादव की पार्टी राजद भी है। कांग्रेस और बसपा अकेले चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस पहली बार उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के चुनावी चेहरा बना कर मैदान में उतरी है।

    उत्तराखंड - 70 सीट, बहुमत- 36

    उत्तराखंड - 70 सीट, बहुमत- 36

    उत्तरखंड में 14 फरवरी को मतदान है। यहां भाजपा की सरकार है। पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री हैं। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। 2017 के चुनाव में भाजपा को 57 और कांग्रेस को 11 सीटें मिली थीं। एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर से बचने के लिए भाजपा अब तक दो मुख्यमंत्री बदल चुकी है। पुष्कर सिंह धामी पांच महीना पहले की मुख्यमंत्री बने हैं। आम आदमी पार्टी भी यहां चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा बसपा और सपा भी यहां किस्मत आजमाती रही हैं। उत्तराखंड में कोरोना बढ़ने की रफ्तार तो तेज है ही, बर्फबारी से मौसम भी खराब हो गया है। कांग्रेस ने उत्तराखंड में प्रियंका गांधी को चुनाव में प्रचार में उतार कर अपनी रुठी किस्मत संवारने की कोशिश की थी। लेकिन कोरोना के बढ़ते प्रकोप की वजह से प्रिंयका की रैली रद्द हो गयी। उत्तराखंड में कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए जोर लगाये हुए है।

    गोवा- 40 सीट, बहुमत - 21

    गोवा- 40 सीट, बहुमत - 21

    गोवा में 14 फरवरी को मतदान है। प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा ने यहां 13 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 17 सीटें मिलीं थीं। लेकिन भाजपा ने गोवा फॉरवर्ड पार्टी और निर्दलियों के सहयोग से सरकार बना ली। बाद में कांग्रेस टूटफूट का शिकार हो गयी। उसके विधायक 15 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। अब कांग्रेस में केवल 2 विधायक बचे हैं। यहां तृममूल कांग्रेस और आम दमी पार्टी के चुनाव लड़ने से 2022 का चुनाव चतुष्कोणीय हो गया है। कांग्रेस के कई नेता तृणमूल में चले गये हैं। कांग्रेस इस बार गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ मिल कर चुनाव लड़ रही है। तृणमूल कांग्रेस ने महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी से गठबंधन किया है। आप अकेले सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

    मणिपुर - 60 सीट, बहुमत - 31

    मणिपुर - 60 सीट, बहुमत - 31

    मणिपुर में 27 फरवरी और 3 मार्च को वोटिंग। यहां भाजपा की सरकार है। एन बीरेन सिंह मुख्यमंत्री हैं। 2017 के चुनाव में यहां गोवा की तरह ही कांग्रेस सबसे अधिक 28 सीट जीत कर सरकार नहीं बना पायी थी। भाजपा ने 21 सीटें जीत कर नगा पीपल्स फ्रंट और नेशनल पीपल्स पार्टी के साथ मिल कर सरकार बनायी थी। गोवा की तरह मणिपुर में भी कांग्रेस में जबर्दस्त सेंधमारी हुई। अब कांग्रेस में 28 के बदले सिर्फ 15 विधायक हैं। जब कि भाजपा 21 से बढ़ कर 27 हो गयी। 2022 में भाजपा ने 40 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। कांग्रेस के अधिकतर नेताओं के पार्टी चोड़ने से वह कमजोर तो हुई है। लेकिन नये चेहरों के दम पर सत्ता में वापसी के लिए जोर लगाये हुए है। इस बीच चुनाव से पहले थौबल जिले में हुई राजनीतिक हिंसा ने चुनाव की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। शांति व्यवस्था को ध्यान में रख ही यहां दो चरण में चुनाव कराये जा रहे हैं।

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