कौन हैं IAS संजीव हंस? रिशु श्री मामले में SVU को भेजी 4 पन्नों की सफाई, किस विवाद में गए थे जेल?

IAS Sanjeev Hans: बिहार के पूर्व IAS अधिकारी संजीव हंस (IAS Sanjeev Hans) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) उनकी तलाश कर रही है, लेकिन इसी बीच उन्होंने एजेंसी को चार पन्नों का विस्तृत पत्र भेजकर अपने ऊपर लगे आरोपों को चुनौती दी है। संजीव हंस कभी बिहार के सबसे प्रभावशाली नौकरशाहों में गिने जाते थे और राज्य सरकार के कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

प्रशासनिक फैसलों में उनकी मजबूत पकड़ और बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी भूमिका अक्सर चर्चा में रही। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में उनका नाम कई जांचों और विवादों से जुड़ता गया, जिसके बाद वे लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। अब जब SVU की कार्रवाई तेज हुई है और उनकी ओर से लिखी गई चिट्ठी सामने आई है। लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर संजीव हंस कौन हैं और उन पर लगे आरोपों को लेकर उनका पक्ष क्या है।

IAS Sanjeev Hans

कौन हैं IAS संजीव हंस? (IAS Sanjeev Hans)

संजीव हंस बिहार कैडर के पूर्व वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में काम किया और लंबे समय तक नौकरशाही के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। जल संसाधन विभाग में सचिव रहते हुए उन्होंने कई बड़ी परियोजनाओं की निगरानी की और विभाग से जुड़े अहम फैसलों का हिस्सा रहे। सरकारी तंत्र में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी की रही जो बड़े स्तर की योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से जुड़े रहे। यही वजह है कि प्रशासनिक हलकों में उनका नाम काफी जाना-पहचाना रहा है।

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हालांकि समय के साथ उनका नाम विभिन्न जांच एजेंसियों की पड़ताल में भी सामने आने लगा। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य एजेंसियों की जांच के कारण वह कई बार खबरों में रहे। हालांकि बाद के वर्षों में उनका नाम कथित भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों में सामने आया, जिसके बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गईं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था और वे लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहे। इसी वजह से संजीव हंस बिहार के उन पूर्व IAS अधिकारियों में शामिल हो गए, जिनका नाम प्रशासनिक उपलब्धियों के साथ-साथ विवादों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा में रहा है।

अब टेंडर घोटाला मामले में SVU की कार्रवाई और उनकी ओर से भेजे गए चार पन्नों के पत्र के बाद वह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एजेंसी लगातार उनकी तलाश कर रही है, जबकि संजीव हंस का कहना है कि उन्हें बिना पर्याप्त सबूत के आरोपी बनाया गया है।

SVU को भेजा चार पन्नों का पत्र

पूर्व IAS अधिकारी ने ADG पंकज दराद को लिखे पत्र में अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जिस आधार पर नया मामला दर्ज किया गया है, उससे जुड़ा पुराना केस पहले ही अदालतों में खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि SVU थाना कांड संख्या 05/2025 उन्हीं तथ्यों पर आधारित है, जिनसे जुड़ा रूपसपुर थाना कांड संख्या 18/2023 पटना हाईकोर्ट द्वारा रद्द किया जा चुका है। बाद में इस मामले से संबंधित अपील को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया था।

पत्र में संजीव हंस ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद ED द्वारा भेजी गई सूचना के आधार पर नई FIR दर्ज की गई। उनके अनुसार नई प्राथमिकी में पुराने आरोपों को ही दोहराया गया है और सिर्फ इतना जोड़ा गया कि जल संसाधन विभाग में उनके कार्यकाल के दौरान एक कंपनी को काम मिला था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामले के मूल तथ्य पहले ही अदालतों में परखे जा चुके हैं तो उन्हीं बातों को आधार बनाकर नया मामला दर्ज करने का क्या औचित्य है।

टेंडर प्रक्रिया को लेकर दिया जवाब

अपने बचाव में संजीव हंस ने कहा कि 350 लाख रुपये से अधिक के टेंडरों का फैसला किसी एक अधिकारी द्वारा नहीं किया जाता। उन्होंने बिहार लोक निर्माण विभाग के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में विभागीय निविदा समिति निर्णय लेती है और सचिव केवल समिति के अध्यक्ष होते हैं। उनके अनुसार बीरपुर फिजिकल मॉडलिंग सेंटर परियोजना विश्व बैंक सहायता प्राप्त योजना का हिस्सा थी। टेंडर जारी करने से पहले तकनीकी जांच, मूल्यांकन और विश्व बैंक की मंजूरी समेत सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।

संजीव हंस ने दावा किया कि परियोजना को विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति से प्रशासनिक मंजूरी मिली थी। इसके अलावा तकनीकी समिति, विभागीय निविदा समिति और अन्य सक्षम अधिकारियों ने भी अलग-अलग चरणों में फाइल की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में कई अधिकारी और संस्थाएं शामिल थीं। ऐसे में किसी एक व्यक्ति को पूरे मामले के लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है।

रिशु श्री से संबंध होने से किया इनकार

पूर्व IAS अधिकारी ने रिशु श्री और उससे जुड़ी कंपनियों के साथ किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में जिस 20 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन का जिक्र किया गया है, वह फरवरी 2022 का है और उस समय वे जल संसाधन विभाग में तैनात नहीं थे। उनका कहना है कि जिन कंपनियों के बीच पैसों के लेन-देन की बात कही जा रही है, वह दो निजी पक्षों का मामला है और उससे उनका कोई संबंध नहीं है।

अपने पत्र के आखिर में संजीव हंस ने SVU से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड, आधिकारिक दस्तावेजों और वास्तविक तथ्यों के आधार पर मामले की जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह जांच एजेंसी को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी ओर SVU की टीम मामले में आगे की कार्रवाई के साथ उनकी तलाश में जुटी हुई है।

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