UCC आने से पहले असम में बहुविवाह बैन करने की तैयारी, इसके बारे में क्या सोचती हैं मुस्लिम महिलाएं? जानिए
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को कहा है कि उनकी सरकार राज्य में बुहविवाह प्रथा पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है। उनके मुताबिक आने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में बीजेपी सरकार इस संबंध में एक बिल सदन में पेश करेगी।
बहुविवाह एक ऐसी कुप्रथा है, जिसमें एक पुरुष की एक साथ एक से ज्यादा पत्नियां होती हैं या किसी-किसी मामले में एक महिला के एक से ज्यादा पति होते हैं। अभी देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर विधि आयोग लोगों से राय जुटा रहा है और इस वजह से यह कुप्रथा भी बहस का विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञों की टीम बना चुकी है असम सरकार
असम सरकार ने इस बहुविवाह पर रोक की योजना पर अमल के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई थी, ताकि इसके कानूनी पहलुओं पर विचार किया जा सके। इस कोशिश को यूसीसी की ओर ही राज्य सरकार का एक कदम माना जा रहा है। हालांकि समिति की रिपोर्ट अभी पेंडिंग है।
रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अगुवाई में बनी है समिति
मई में असम सरकार ने गुवाहाटी हाई कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रुमी फुकन की अगुवाई में यह समिति बनाई थी। इस समिति में असम के एडवोकेट जनरल देबाजीत सैकिया, असम के एडिश्नल एडवोकेट जनरल नलिन कोहली और गुवाहाटी हाई कोर्ट के वकील नेकीबुर जमान भी शामिल हैं।
मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है बहुविवाह-विरोधी बिल
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बहुविवाह पर रोक लगाने को लेकर गुरुवार को कहा, 'हम सितंबर में शुरू हो रहे विधानसभा (के मानसून) सत्र में यह विधेयक पेश करना चाहते हैं। अगर किसी वजह से हम ऐसा नहीं कर पाते, तो हम जनवरी में विधासभा (के शीतकालीन) सत्र के दौरान ऐसा करेंगे।'
हम बहुविवाह को तुरंत बैन करना चाहते हैं- हिमंता बिस्वा सरमा
राज्य के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 'असम में हम बहुविवाह को तुरंत बैन करना चाहते हैं। हालांकि, अगर यूसीसी आ जाता है तो हमें कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह यूसीसी के साथ मिल जाएगा।' हालांकि, उन्होंने पहले कहा था कि बहुविवाह पर प्रतिबंध, 'आम सहमति से (हासिल किया जाएगा), आक्रमकता के साथ नहीं।'
मुस्लिम महिलाओं के कल्याण की कर चुके हैं बात
पिछले 11 जुलाई को सीएम हिमंत ने मुस्लिम महिलाओं के कल्याण के लिए बहुविवाह पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि यूसीसी से महिलाओं को प्रॉपर्टी में समान अधिकार मिलेगा, जिससे उनका सशक्तिकरण होगा और वह पुरुषों के बराबर अधिकार पा सकेंगी।
76.5% मुस्लिम महिलाएं बहुविवाह प्रथा के खिलाफ- सर्वे
गौरतलब है कि हाल ही में न्यूज18 ने यूसीसी पर एक सर्वे किया है, जिसके मुताबिक देश की 76.5% मुस्लिम महिलाओं ने बहुविवाह की प्रथा के खिलाफ राय दी है। इस सर्वे में देश के 25 राज्यों की 8,035 मुस्लिम महिलाओं की राय शामिल की गई है।
ग्रैजुएट मुस्लिम महिलाओं में 78.6% बहुविवाह प्रथा के खिलाफ- सर्वे
खास बात ये है कि सर्वे में शामिल 18 वर्ष से अधिक उम्र की मुस्लिम महिलाओं में जो ग्रैजुएट थीं, उनमें से 78.6% का कहना था कि मुस्लिम पुरुषों को चार-चार निकाह करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।












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