Assam News: डिब्रूगढ़ बनेगी असम की पावर कैपिटल, 284 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा मेगा प्रोजेक्ट
Assam News: असम के डिब्रूगढ़ को राज्य की दूसरी प्रशासनिक राजधानी बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। यह सिर्फ असम का पावर कैपिटल भर नहीं होगा, बल्कि पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के लिए इसे प्रशासनिक केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह ने नए विधानसभा परिसर परियोजना का शिलान्यास भी कर दिया है। इस कदम को ऊपरी असम के लिए प्रशासनिक सशक्तिकरण और क्षेत्रीय संतुलन की बड़ी पहल माना जा रहा है।
सरकार के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग ₹284 करोड़ खर्च किए जाएंगे। नया विधानसभा परिसर डिब्रूगढ़ बायपास रोड के पास 57 बीघा जमीन पर विकसित होगा। यह लगभग 250 एकड़ के मास्टरप्लान का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य केवल एक भवन बनाना नहीं, बल्कि डिब्रूगढ़ को एक आधुनिक प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।

Assam News: आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा परिसर
- प्रस्तावित विधानसभा भवन तीन मंजिला (G+2) होगा, जिसमें 150 विधायकों के बैठने की क्षमता रखी गई है।
- इसके अलावा विधायकों के लिए नौ मंजिला (G+8) MLA हॉस्टल बनाया जाएगा, ताकि सत्र के दौरान ठहरने की बेहतर सुविधा मिल सके।
- परिसर में 800 सीटों वाला ऑडिटोरियम, 100 सीटों का कॉन्फ्रेंस हॉल, मीडिया लाउंज, रेस्टोरेंट और 480 सुरक्षाकर्मियों के लिए बैरक भी शामिल होंगे।
- पूरा प्रोजेक्ट आधुनिक आर्किटेक्चर और ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित होगा।
Dibrugarh Second Capital: 30 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट
राज्य सरकार ने इस परियोजना को 30 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि 2027 से हर साल कम से कम एक विधानसभा सत्र डिब्रूगढ़ में आयोजित किया जाएगा। इससे ऊपरी असम के जिलों तिनसुकिया, धेमाजी, शिवसागर और चराइदेव के लोगों को अपनी समस्याओं के लिए बार-बार गुवाहाटी नहीं जाना पड़ेगा। इसके अलावा, यह पूर्वोत्तर के दूसरे राज्यों के लिए भी एक कनेक्टिविटी केंद्र बन सकेगा।
प्रशासनिक विकेंद्रीकरण पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। डिब्रूगढ़ पहले से ही शैक्षणिक और आर्थिक हब है, अब राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने से यहां निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे को नई गति मिलेगी। स्थानीय लोगों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी और सरकार तक पहुंच आसान बनेगी।












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