Mumbai Satta Bazar: बीजेपी या कांग्रेस? असम में होगा सत्ता परिवर्तन! क्या है मुंबई सट्टा बाजार की भविष्यवाणी
Assam Election Result 2026: चुनावी नतीजों की घड़ी करीब आते ही देशभर में हलचल तेज हो गई है। असम सहित पांच राज्यों के भाग्य का फैसला कल यानि चार अप्रैल को होगा, लेकिन नतीजों से पहले अनौपचारिक सट्टा बाजार ने अपनी भविष्यवाणियों से सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। मुंबई का सट्टा बाजार, जो अपनी सटीक चालों के लिए चर्चित रहता है, इस बार असम के लिए क्या इशारा कर रहा है? आइए जानतें हैं मुंबई सट्टा बाजार के आंकड़ों में असम को लेकर क्या बड़े दावे किए जा रहे हैं
मुंबई सट्टा बाजार के ताजा रुझानों के मुताबिक, असम की 126 विधानसभा सीटों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। अनुमानों की मानें तो बीजेपी गठबंधन को 85 से 92 सीटें मिल सकती हैं, जो बहुमत के आंकड़े से काफी ऊपर है।

वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के महज 34-38 सीटों पर सिमटने की संभावना जताई जा रही है। सट्टेबाजों का मानना है कि राज्य में विकास और वर्तमान नेतृत्व पर जनता का भरोसा बरकरार है।
सट्टा बाजार न केवल असम बल्कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को लेकर भी चौंकाने वाले आंकड़े पेश कर रहा है। बंगाल की 294 सीटों में बीजेपी को 175-185 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि टीएमसी 127-132 सीटों पर पिछड़ती दिख रही है। तमिलनाडु में इस बार सत्ता परिवर्तन के संकेत हैं, जहां DMK को 145-155 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। पुडुचेरी में एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान है।
मतदान के रिकॉर्ड स्तर ने बदला गणित
असम में इस बार रिकॉर्ड 85.91% मतदान हुआ है, जिसमें महिला मतदाताओं की भागीदारी (86.50%) ने सबको हैरान कर दिया है। राजनीतिक एक्सपर्ट का मानना है कि भारी मतदान अक्सर सत्ता विरोधी लहर या फिर जबरदस्त जनसमर्थन का संकेत होता है। सट्टा बाजार इन्हीं आंकड़ों और जमीनी फीडबैक के आधार पर अपने भाव तय करता है। फलोदी सट्टा बाजार ने भी असम में हिमंत बिस्वा सरमा की वापसी और एनडीए को 100 के करीब सीटें मिलने का दावा किया है।
कैसे काम करता है सट्टा बाजार का तंत्र?
दरअसल, यह एक अनौपचारिक और अवैध व्यवस्था है, जहां जीत-हार की संभावनाओं पर 'भाव' तय किए जाते हैं। जिस पार्टी की जीत की संभावना अधिक होती है, उसका रेट कम रखा जाता है। ये बुकी फोन और सोशल मीडिया के जरिए अपना नेटवर्क चलाते हैं और चुनावी रैलियों, जनमत सर्वेक्षणों और वोटिंग प्रतिशत के आधार पर अपने अनुमानों में पल-पल बदलाव करते रहते हैं।
नोट: सट्टा बाजार के आंकड़े किसी वैज्ञानिक कैलकुलेशन पर आधारित नहीं होते, बल्कि ये सट्टेबाजी के व्यक्तिगत रुझानों पर टिके होते हैं। ये आंकड़े आधिकारिक नहीं हैं और हम इनकी पुष्टि नहीं करते। वास्तविक और सटीक परिणाम 4 मई को मतगणना के बाद ही स्पष्ट होंगे।















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