Assam Election 2026: जोरहाट से ताल ठोक सकते हैं गौरव गोगोई, कांग्रेस ने 40 सीटों पर नाम किए फाइनल
Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। एक तरफ जहां भाजपा अपनी 'जन आशीर्वाद यात्रा' के जरिए माहौल बना रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी अपने 'ट्रम्प कार्ड' को मैदान में उतारने की तैयारी कर ली है।
ANI के मुताबिक, असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई आगामी विधानसभा चुनाव में जोरहाट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। यह सीट गोगोई परिवार का गढ़ रही है और गौरव वर्तमान में इसी क्षेत्र से सांसद भी हैं।

यहां विस्तार से और आसान भाषा में समझिए असम के जोरहाट सीट क्यों है खास, क्या BJP-कांग्रेस का चुनावी समीकरण...
कांग्रेस की बैठक में 40 नामों पर मुहर
शुक्रवार, 27 फरवरी की शाम नई दिल्ली में कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की मौजूदगी में असम की 126 सीटों में से लगभग 40 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर लिए गए हैं।
ANI के मुताबिक, पार्टी अपनी पहली सूची का औपचारिक ऐलान चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के तुरंत बाद करेगी। पार्टी इस बार उन सीटों पर पहले ध्यान दे रही है जहां कांग्रेस का आधार मजबूत है या जहां मौजूदा विधायक सक्रिय हैं।
Assam Election 2026 के लिए जोरहाट सीट क्यों है खास?
गौरव गोगोई का जोरहाट से चुनाव लड़ना एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।जोरहाट गौरव के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय तरुण गोगोई की राजनीतिक कर्मभूमि रही है। जोरहाट से चुनाव लड़कर गौरव सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा को चुनौती देना चाहते हैं, जिससे पूरे ऊपरी असम (Upper Assam) में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए 'पाकिस्तान लिंक' के आरोपों के बाद गौरव गोगोई स्थानीय जनता के बीच जाकर अपनी छवि और मजबूत करना चाहते हैं।
Jorhat Assembly Constituency का चुनावी समीकरण क्या है?
जोरहाट विधानसभा सीट असम की सबसे महत्वपूर्ण हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक है। जोरहाट जिले में कुल चार विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें जोरहाट, टियोक और मारीयानी प्रमुख हैं। 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का यहां पूरी तरह दबदबा रहा था और उसने जोरहाट, टियोक और मारीयानी तीनों सीटों पर जीत दर्ज की थी।
2021 के चुनाव में यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखा गया था। कांग्रेस ने जोरहाट और टियोक सीटों पर जीत बरकरार रखी, लेकिन मारीयानी सीट पर भाजपा को सफलता मिली। दिलचस्प बात यह रही कि मारीयानी से जीतने वाले नेता रुपज्योति कुर्मी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे जिससे भाजपा की स्थिति और मजबूत हो गई।
सामाजिक और जातीय समीकरणों की बात करें तो जोरहाट में अहोम समुदाय एक निर्णायक भूमिका निभाता है। इसके अलावा चाय बगान के मजदूर, अनुसूचित जनजाति मतदाता और शहरी वोटर भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। बीते कुछ सालों में चाय बगान मजदूरों और आदिवासी समुदाय में भाजपा का प्रभाव बढ़ा है, जबकि शहरी इलाकों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलती है।
क्या है गठबंधन का गणित,100 सीटों पर कांग्रेस?
गौरव गोगोई ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस राज्य की 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि शेष 26 सीटें उनके गठबंधन सहयोगियों (जैसे रायजोर दल और असम जातीय परिषद) के लिए छोड़ी जाएंगी। कांग्रेस ने इस बार भी बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF के साथ किसी भी तरह के गठबंधन से साफ इनकार कर दिया है, ताकि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के कार्ड को नाकाम किया जा सके।
गौरव गोगोई के चुनौतियां भी कम नहीं
जहां एक तरफ गौरव गोगोई मोर्चा संभाल रहे हैं, वहीं कांग्रेस के लिए भूपेन बोरा का हाल ही में भाजपा में शामिल होना एक बड़ा झटका रहा है। भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस की 'टूट' के तौर पर पेश कर रही है, जबकि गौरव गोगोई इसे पार्टी की सफाई बता रहे हैं।
बीजेपी की 'जन आशीर्वाद यात्रा' के जवाब में कांग्रेस भी जल्द ही अपनी 'असम बचाओ यात्रा' के दूसरे चरण की शुरुआत कर सकती है। मार्च का दूसरा हफ्ता असम की राजनीति के लिए निर्णायक होने वाला है।












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