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Assam Beef Ban: अपने ही बुने 'बीफ' के जाल में फंस गई कांग्रेस? हिमंत बिस्वा ने मौके पर मारा चौका!

Assam Beef Ban: असम में कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी को उसी की पिच पर आसान बॉल देकर चौके-छक्के लगाने का मौका दे दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 'बीफ'को लेकर अपने और बीजेपी पर लगाए जा रहे आरोपों पर ऐसा पलटवार किया है,जो सियासी तौर पर कांग्रेस की परेशानियां और बढ़ा सकता है। खासकर असम में कांग्रेस के पहले ही कम हो रहे जनाधार में उसे और भी ज्यादा खामियाजाे भुगतना पड़ सकता है।

मामला कुछ यूं है कि हाल में असम की 5 विधानसभा सीटों पर जो उपचुनाव हुए हैं, वह सारी बीजेपी और उसके सहयोगियों को मिली हैं। लेकिन, कांग्रेस के पांव के नीचे से जमीन इसलिए खिसकी हुई है कि इनमें सामगुरी की मुस्लिम-बहुल सीट भी शामिल है,जो कांग्रेस पार्टी की हमेशा से गढ़ रही है।

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मुस्लिम-बहुल सीट पर बीजेपी के हिंदू उम्मीदवार की जीत से परेशान है कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं के लिए सामगुरी की हार इसलिए और बड़ी है, क्योंकि वहां बीजेपी के जो प्रत्याशी जीते हैं,वह हिंदू हैं। इस सीट पर बीजेपी के दिप्लू रंजन सरमा ने कांग्रेस प्रत्याशी तंजिल हुसैन को करीब 25 हजार वोटों से हराया है।

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सामगुरी की हार नहीं पचा पा रहे कांग्रेस नेता
सामगुरी के इसी नतीजे के बाद से इस सीट से पांच बार के कांग्रेस विधायक और मौजूदा पार्टी सांसद रकीबुल हुसैन बौखलाए हुए हैं। उनके इस्तीफे की वजह से यह सीट खाली हुई थी और उन्होंने यहां से अपने बेटे को कांग्रेस से टिकट दिलवाकर उतारा था। लेकिन, मुस्लिम-बहुल सीट होने के बावजूद वो एक हिंदू उम्मीदवार से हार गया और वो भी बहुत बड़े अंतर से।

कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर 'बीफ' पार्टी देकर वोट लेने का लगाया है आरोप
इस हार के बाद उन्होंने उत्तर असम और ऊपरी असम में जाकर कई जगहों पर सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि बीजेपी ने बंगाली मुसलमानों (मियां) को 'बीफ' का भोज देकर यह जीत दर्ज की है। उन्होंने भाजपा पर 'हिंदुओं' को धोखा देने तक का आरोप लगा दिया।

असम सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर 'बीफ' परोसने पर लगाया बैन
कांग्रेस नेता के इन्हीं आरोपों के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पार्टी को सीधी चुनौती दे डाली थी। उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा से कहा था कि अगर वह भी रकीबुल की तरह 'बीफ' बैन की वकालत करते हैं तो खुलकर कहें, वह इसपर फैसला लेंगे।

बुधवार को मुख्यमंत्री ने बीफ पर प्रतिबंध लागू भी कर दिया है। उन्होंने कहा,'गोहत्या के निषेध करने के लिए हम तीन साल पहले कानून लाए थे, हमें काफी सफलता मिली...लेकिन अब हमने यह निर्णय किया है कि असम में गोमांस किसी भी रेस्टोरेंट और होटल में नहीं परोसा जाएगा...साथ ही कोई पब्लिक फंक्शन और पब्लिक प्लेस में भी यह नहीं परोसा जाएगा। आज से यह निर्णय लिया है।'

मुख्यमंत्री ने बताया कि 'पहले हमारा निर्णय था कि मंदिर से पांच किलोमीटर के दायरे में, लेकिन अब हमने इसे पूरे राज्य में बढ़ा दिया है। किसी भी सामूदायिक जगह, सार्वजनिक जगह, होटल में आप इसे नहीं खा सकेंगे। हमने तीन साल पहले जो शुरू किया था, उसे आज और आगे बढ़ा दिया।'

कांग्रेस नेता ने 'बीफ' के बहाने की थी बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश
कांग्रेस नेता जिस उत्तर असम और ऊपरी असम में जाकर भाजपा पर सामगुरी सीट पर जीतने के लिए 'बीफ' पार्टी आयोजित करवाने का आरोप लगा रहे थे, वह मूल असमी निवासियों वाला क्षेत्र है। वहां उन्होंने यहां तक कहा था कि सीएम सरमा का दोमुहां चेहरा है। एक तरफ वह मियां (बंगाली मुसलमानों) की वजह से राज्य में समस्याएं बढ़ने की बात करते हैं और दूसरी तरफ वोट के लिए उसे 'बीफ' परोसते हैं।

जबकि, राज्य में देश के अन्य हिस्सों की तरह मुस्लिम वोट बैंक पर कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का ही कब्जा रहा है। हिमंत बिस्वा सरमा पहले ही राज्य में बढ़ती मुस्लिम आबादी के खिलाफ अभियान छेड़े हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस नेता की ओर से उठाए गए सवाल को हथियार बनाकर उन्होंने बीफ पर पाबंदी लगाकर कांग्रेस के उस वोट बैंक को ही हिलाने की कोशिश की है।

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असम में तेजी से मुस्लिम आबादी बढ़ने का दावा
2011 की जनगणना के मुताबिक असम में कुल 1.07 मुसलमान थे, जो कुल आबादी के 34.22% है। वहीं हिंदुओं की जनसंख्या 1.92 करोड़ थी, जो कि 61.47% होती है। कुछ महीने पहले सीएम ने दावा किया था कि राज्य में मुसलमानों की जनसंख्या हर 10 साल में 30% की रफ्तार से बढ़ रही है और यूं ही चलता रहा तो 2041 तक मुसलमान वहां बहुसंख्यक हो जाएंगे।

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