दिल्ली के चुनाव मैदान से भागे असाउद्दीन ओवैसी
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अपने बेहद आपत्तिजनक बयानों के चलते खबरों में रहने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता असाउद्दीन ओवैसी अपने वादे से मुकर गए हैं। उन्होंने वादा किया था कि उनकी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार मुस्लिम बहुल्य इलाकों में खड़ा करेगी।

अब उन्होंने फैसला बदल दिया है। वे दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार नहीं उतार रहे। हालांकि वे दिल्ली के बाटला हाऊस कांड से जुड़े एक गांव को गोद लेने का इरादा जरूर रखते हैं।
बात चल रही थी
पहले खबर थी कि उनकी दिल्ली में चुनाव लडने के संबंध में दिल्ली विधानसभा के नेता शोएब इकबाल से बात चल रही है। जानकारों का कहना है कि दिल्ली में हाल के दौर में जिस तरह से अनेक जगहों में दंगे हुए हैं, उसे देखते हुए ओवैसी मुसलमानों का रहनुमा के रूप में अपने को प्रोजेक्ट करना चाहते थे। पर, उनके निजी सर्वेक्षणों में उन्हें अपनी पार्टी के लिए कोई उम्मीद नजर नहीं आई। इसलिए उन्होंने अपना फैसला बदला।
तब हिन्दू लामबंद होते
जानकारों का कहना है कि अगर ओवैसी मुसलमानों के वोट हासिल करने के लिए निकलते तो हिन्दू वोटर एकजुट हो जाते दिल्ली में। वे किसी एक दल के हक में वोट देने के संबंध में सोचने लगते। इससे भाजपा को ही लाभ होता।
महाराष्ट्र में कामयाबी
आपको ध्यान होगा कि ओवैसी की पार्टी का हालिया महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन बेहतर रहा था। उसे दो सीटों पर जीत मिली। कई सीटों पर उसके उम्मीदवारों ने अच्छी टक्कर दी।
गांव गोद लेंग
इस बीच,ओवैसी ने आजमगढ़ के एक गांव को गोद लेने का इरादा जाहिर किया है। ओवैसी संजरपुर गांव को गोद लेना चाहते हैं। संजरपुर गांव दिल्ली के बाटला एनकाउंटर के बाद खबरों में आया था। मुठभेड़ में मारे गए साजिद और आतिफ इसी गांव के थे। इसके जिस एकमात्र शख्स सैफ को पकड़ा गया था, वह भी इसी गांव का रहने वाला था। इतना ही नहीं, इसी गांव के 8 लोग फरार हैं, जिन पर 12 लाख तक का इनाम रखा गया है।
हालांकि इस बात की उम्मीद नहीं है कि ओवैसी को आजमगढ़ में गांव में गोद लेने की मंजूरी मिले। ओवैसी को कई बार संजरपुर में जाने से रोका जा चुका है। खैर, कहने वाले कह रहे हैं कि वे दिल्ली की सियासत में देर-सवेर उतरेंगे तो सही।












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