अरुणाचल प्रदेश: प्रदर्शनकारियों ने उप मुख्यमंत्री का घर फूंका, सीएम के घर भी हिंसा
ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश में आदिवासी समुदायों को स्थायी निवासी प्रमाण पत्र देने के प्रस्ताव पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हो रही है। रविवार को लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य के उप मुख्यमंत्री चौना मेन के राजधानी ईटानगर स्थित घर में भी आग लगा दी। इस दौरान उनकी गाड़ियां भी फूंक दी गईं। जिसके बाद चौना मेन को प्रशासन ने ईटानगर से नामासाई जिले में शिफ्ट किया है। वहीं सीएम प्रेमा खांडू के घर भी भीड़ ने धावा बोल दिया, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने गोली भी चलाई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई।

ईटानगर में लगा कर्फ्यू
अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में कर्फ्यू लगा हुई है। रविवार को अतिरिक्त सुरक्षाबल यहां भेजा गया है। सरकार ने ईटानगर में स्थिति को निंयत्रित करने के लिए आईटीबीपी की 6 कंपनियां नियुक्त की हैं। सेना को बुलाया गया है। सेना ने नाहरलागुन और ईटानगर के बीच फ्लैग मार्च किया है। प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है और प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। प्रदेश में खासतौर से राजधानी ईटानगर में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
स्थाई निवास प्रमाण पत्र के मुद्दे पर सुलगा अरुणाचल
स्थाई निवास प्रमाण पत्र (PRC)के मुद्दे पर अरुणाचल प्रदेश सुलग उठा है। प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार शाम को लगभग 50 वाहनों को जला दिया और 100 अन्य को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने कहा कि उन्होंने पुलिस पर पथराव किया है। इसमें 24 पुलिसकर्मियों सहित 35 लोग घायल हो गए। पुलिस ने 21 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। वहीं गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने छह आदिवासी समुदायों को स्थायी निवासी प्रमाण पत्र देने के प्रस्ताव के खिलाफ राज्य के कुछ हिस्सों में चल रहे विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर अरुणाचल प्रदेश के लोगों से शांति बनाये रखने की शनिवार को अपील की है।

पुलिस-प्रदर्शनकारियों में टकराव के बाद बढ़ी हिंसा
छह आदिवासी समुदायों को स्थायी निवासी प्रमाण पत्र देने के प्रस्ताव के खिलाफ बुलाए गए बंद के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में लोग सड़क पर उतर आए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गैर-अरुणाचलियों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) देने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त पैनल की सिफारिशों में बदलाव की मांग करते हुए ईटानगर में सिविल सचिवालय में प्रवेश की कोशिश की, उन्हें रोकने की कोशिश में पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। जिसके बाद हिंसा बढ़ गई।












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