राहुल गांधी ही नहीं, खट्टर-महबूबा के बयान का भी पाक ने UN को लिखे पत्र में किया जिक्र

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    Pakistan के लिए UNSC में सबूत बना Rahul Gandhi और Manohar Lal Khattar का ये बयान | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने के बाद जिस तरह से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बयान दिया था, उसके बाद वह विवादों में आ गए थे। पाकिस्तान ने राहुल गांधी के बयान का हवाला देते हुए यूएन को पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि खुद राहुल गांधी ने माना है कि जम्मू कश्मीर में हालात ठीक नहीं है। राहुल गांधी के बयान का जिस तरह से पाक ने यूएन में हवाला दिया है उसको लेकर भाजपा के नेता लगातार राहुल गांधी पर हमलावर है।

    खट्टर के बयान का हवाला

    खट्टर के बयान का हवाला

    लेकिन बात करें तो अकेले राहुल गांधी ही नहीं हैं जिनके बयान का पाकिस्तान ने हवाला दिया है। इससे पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बयान का भी पाकिस्तान जिक्र कर चुका है। पाक सरकार में मानवाधिकार मंत्री शिरीन माजरी ने ट्वीट करके उस पत्र को जारी किया है जिसे उन्होंने यूएन को लिखा है। इस पत्र में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का जिक्र किया गया है, जोकि 10 अगस्त को खट्टर ने दिया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि पहले बहू बिहार से लाई जाती थीं, लेकिन अब हम कश्मीर से लाएंगे। हालांकि खट्टर ने इसके लिए हरियाणा में गिरते लिंगानुपात का हवाला देते हुए अपने बयान का बचाव किया था।

    गूगल सर्च का भी हवाला

    गूगल सर्च का भी हवाला

    इसके अलावा पाक ने अपने पत्र में 6 अगस्त 2019 कोक भाजपा के विधायक विक्रम सैनी के बयान का भी जिक्र किया है। जिसमे उन्होंने कहा था कि पार्टी के मुस्लिम कार्यकर्ता अब गोरी लड़कियों से भी शादी कर सकते हैं। साथ ही महबूबा मुफ्ती के बयान का हवाला दिया गया है, जिसमे 5 अगस्त को उन्होने कहा था कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 को खत्म किया जाना भारतीय लोकतंत्र का काला दिन है। यही नहीं पाकिस्तान ने गूगल सर्च का भी हवाला दिया है, जिसमे कहा गया है कि हाऊ टू मैरी कश्मीरी वुमेन को 5 अगस्त के बाद सबसे ज्यादा सर्च किया गया है।

    राहुल ने दिया था बयान

    राहुल ने दिया था बयान

    बता दें कि इससे पहले राहुल गांधी ने कहा था कि राहुल ने ट्वीट में लिखा था, 'जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों की आजादी और सामाजिक स्‍वतंत्रता को खत्‍म हुए 20 दिन हो चुके हैं। जो हमने कल श्रीनगर दौरे पर महसूस किया उसके बाद विपक्ष के नेताओं और मीडिया कर्मियों को जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों पर प्रशासन और निर्मम बल का अंदाजा लग चुका है।'

    इसे भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने पर केंद्र को SC का नोटिस, वार्ताकार नियुक्त करने का अनुरोध खारिज

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