Article 35A: इस्लाम विरोधी था अनुच्छेद 35A: शाहनवाज हुसैन
नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के स्पेशल दर्जा हटाए जाने का विरोध करने वाले 'मुस्लिम बुद्धिजीवियों' को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 35 ए पूरी तरह से 'इस्लाम विरोधी' था इसलिए उसे खत्म किया जाना बहुत जरूरी था, मोतिहारी में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हुसैन ने आरोप लगाया कि 35 A ने जम्मू-कश्मीर के बाहर के किसी व्यक्ति से शादी करने की स्थिति में पैतृक संपत्ति पर महिला के अधिकार को छीन लिया था, जो शरिया के खिलाफ था।

'इस्लाम के खिलाफ था अनुच्छेद 35A'
जो कानून समानता का अधिकार ना दें, भेद भाव करे, उसके रहने का कोई फायदा नहीं है, उन्होंने सवाल किया कि जो मुस्लिम बुद्धिजीवी जम्मू-कश्मीर को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं और इसे हिंदू बनाम मुस्लिम मुद्दा बना रहे हैं, उनसे एक सवाल है कि क्या उन्हें लगता है कि अनुच्छेद 35 ए इस्लाम के शरिया कानून के मुताबिक था।

'एक बेटी का अधिकार कोई नहीं छीन सकता'
एक बेटी जब जन्म लेती है तो उसके पास बेटी होने के सारे हक होते हैं, उसका अपने मां-बाप और उनकी चीजों पर पूरा अधिकार होता है, जो हक ऊपर वाले ने बक्शा है उसे कोई नहीं छीन सकता है लेकिन अनुच्छेद 35ए ने उसे शर्तिया बना दिया था, जिसे हटाना बहुत जरूरी थी, इस्लाम किसी भी चीज में भेदभाव नहीं करता इसलिए मैं कहता हूं कि 35 A इस्लाम विरोधी है, मुस्लिम बुद्धिजीवियों को इस मुद्दे पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।

अनुच्छेद 35A के खत्म किए जाने से नाराज हैं कुछ मुस्लिम संगठन
आपको बता दें कि अनुच्छेद 35A के तहत जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी भी राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में कोई संपत्ति नहीं खरीद सकता इसके साथ ही वहां का नागरिक भी नहीं बन सकता था, इसके साथ ही अगर जम्मू-कश्मीर की लड़की किसी बाहरी लड़के से शादी करती थी तो उसके सारे अधिकार समाप्त हो जाते थे। इसके साथ ही उसके बच्चों को भी किसी तरह के अधिकार नहीं मिलने वाले थे, फिलहाल मोदी सरकार ने अब कश्मीर के स्पेशल कोटे को ही खत्म कर दिया है, जिसके बाद कुछ मुस्लिम संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।












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