Army Day: 'एक ही शब्द में पूरी कायनात लिखेंगे', शादी के 5 माह बाद ही खोया कैप्टन पति, रूला देगी इनकी कहानी
Army Day 2025: उस दिन का सूरज भी शायद यह जानता था कि आज उसकी किरणें कैप्टन अंशुमान सिंह की आखिरी विदाई को देखेंगे। देश के एक वीर सपूत ने, अपने कर्तव्य और साहस के बल पर, अपने प्राणों की आहुति देकर यह सिद्ध कर दिया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए उनका जीवन समर्पित है।
15 जनवरी यानी आज इंडियन आर्मी डे 2025 के अवसर, पर कैप्टन अंशुमान सिंह की वीरता और उनकी पत्नी स्मृति की भावनाओं से भरी कहानी हर किसी की आंखें नम कर देती है। सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर अपने साथियों को बचाने के लिए अंशुमान ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी बहादुरी ने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया, लेकिन पीछे रह गईं उनकी पत्नी स्मृति, जो अपने पति की यादों और अधूरे सपनों में खोई हुई हैं। आइए आपको भी रूबरू कराते हैं, रूला देने वाली इस प्रेम कहानी से...

19 जुलाई 2023: जब परिवार ने खोया अपना वीर सपूत
बात है 19 जुलाई 2023 की। जब देवरिया के रहने वाले पंजाब रेजिमेंट की 26 वीं बटालियन की सेना मेडिकल कोर के कैप्टन अंशुमन सिंह के सियाचिन से शहादत की खबर आई। बंकर में आग लगने की घटना ने कैप्टन अंशुमान सिंह की जिंदगी छीन ली। उन्होंने आग में फंसे अपने साथियों को बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। ताबूत में तिरंगे से लिपटा पार्थिव शरीर देखकर पत्नी और परिवार के बीच कोहराम मच गया।
शहीद की पत्नी, जिनकी आंखों में आंसुओं का सैलाब था। शहीद के माता-पिता की करुण क्रंदन (दुख और विलाप से भरा रोना) हर किसी की आंखों में आंसू ले आया। उनकी मां ने कांपते हाथों से बेटे के माथे को छुआ और कहा, "मेरा बेटा अमर हो गया। पिता ने कांपती आवाज़ में कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा बेटा देश की सेवा में शहीद हुआ। कैप्टन अंशुमान ने AFMC पुणे से एमबीबीएस किया और सेना में शामिल हो गए थे।
पीछे रह गईं इंजीनियर पत्नी स्मृति, परिवार
कैप्टन अंशुमान ने AFMC पुणे से एमबीबीएस किया और सेना में शामिल हो गए थे। पत्नी स्मृति पेशे से इंजीनियर हैं, जो एक मल्टी नेशनल कंपनी में कार्यरत है। दोनों की प्रेम कहानी कॉलेज के फर्स्ट ईयर से ही शुरू हो चुकी थी। अंशुमान के परिवार में पिता रवि प्रताप सिंह सेना से सेवानिवृत्त जेसीओ, मां मंजू सिंह प्रधानाचार्य और भाई घनश्याम सिंह और बहन तान्या सिंह हैं। दोनों ही नोएडा में डॉक्टर हैं।
(नोट- उपरोक्त एंबेड वीडियो 6 महीने पुराना है।)
18 साल का प्रेम और 5 महीने की शादीशुदा जिंदगी
कैप्टन अंशुमान और स्मृति की कहानी कॉलेज के पहले साल से शुरू हुई। यह एक सादगी भरा प्रेम था, जो 18 सालों तक लंबा चला। स्मृति ने बताया कि अंशुमान ने उन्हें पहली नजर में ही प्रभावित कर दिया था। शादी के दो महीने बाद ही उनकी पोस्टिंग सियाचिन में हो गई। स्मृति ने बताया कि हमने अपने भविष्य के 50 सालों के सपने देखे थे। लेकिन दुर्भाग्य से, वह केवल पांच महीने की शादीशुदा जिंदगी जी सकीं।
पति की यादों में डूबी पत्नी!
इनके नाम से एक इंट्राग्राम एकाउंट (smriti_capt.anshuman.singh) पर स्मृति और अंशुमन की शादी और जीवन से जुड़ी तस्वीरें साझा की गई हैं। इनमें कुछ पंक्तियां भी लिखी गईं हैं, जो उनके जीवन को हूबहू चित्रार्थ करती हैं। आइए आपको भी रूबरू कराते हैं...
- 5 नवंबर 2024: कविता में लिखा गया- एक रात एक बात लिखेंगे, हर कोई पढ़ सके इतना साफ लिखेंगे, कोई ऐसी बात नहीं अपने अरमान लिखेंगे हसीन आलम नहीं अपने हालात लिखेंगे बहुत शिकायत है तुझसे ऐ ज़िन्दगी अब तेरे बारे में एक किताब लिखेंगे लिखते लिखते खत्म ना हो यह जिंदगी एक ही शब्द में पूरी कायनात लिखेंगे।'
- 10 सितंबर 2024: 'धुंधली सी हो गई हैं जिंदगी वक्त से जैसे बिछड़ गई ज़िंदगी वक्त आगे निकल गया और पीछे रह गई जिंदगी मुट्ठी से रेत की तरह फिसल रही हैं जिंदगी'
बहादुरी की पहचान: कीर्ति चक्र से सम्मानित
कैप्टन अंशुमान सिंह को उनकी वीरता के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। स्मृति ने कहा कि मेरे हाथ में यह कीर्ति चक्र है। वह एक हीरो हैं, रियल हीरो।
प्रेरणा की मिसाल
कैप्टन अंशुमान सिंह की शहादत और स्मृति का संघर्ष उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो देश के लिए बलिदान देने वाले वीर जवानों और उनके परिवारों का सम्मान करते हैं।
(नोट- खबर के साथ एंबेड किए गए वायरल वीडियो के लिए वनइंडिया उत्तरदायी नहीं है।)
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