क्या स्लीपर बसें असुरक्षित हैं, बुलढाणा हादसे के बाद एक्सपर्ट क्यों कर रहे हैं बैन की मांग?

Maharashtra Buldhana bus accident: महाराष्ट्र के बुलढाणा बस हादसे के बाद एक बार फिर से ओवरनाइट स्लीपर बसों के सुरक्षित होने पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। यह पहली घटना नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में इस तरह की अबतक की सबसे बड़ी दुर्घटना है।

समृद्धि महामार्ग एक्प्रेसवे पर 1 जुलाई को हुए बस हादसे के बाद बसों की बॉडी डिजाइन करने वाले डिजाइनरों ने देश में स्लीपर बसों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने देशभर में चलने वाली लंबी दूरी की ऐसी बसों की तुलना 'चलते हुए ताबूत' से करके इसकी गंभीरता को उजागर करने की कोशिश की है।

are sleeper buses safe

स्लीपर बस या 'चलते हुए ताबूत'?
बुलढाणा में स्लीपर बस के हादसाग्रस्त होने के बाद बस में आग पकड़ लेने की घटना पहली नहीं है। नागपुर से पुणे जा रही इस बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से 26 लोगों की जान चली गई। इसी साल अप्रैल में कन्याकुमारी से कोयंबटूर जा रही एक स्लीपर बस में भी आग लग गई थी। हालांकि, इसमें समय रहते सभी लोग सुरक्षित बच निकलने थे।

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स्लीपर बसों के साथ हो रही हैं बड़ी दुर्घटनाएं
पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र के ही नासिक में एक लग्जरी स्लीपर बस ट्रक से टकराकर धू-धू कर जल उठी थी। उसमें भी कम से कम 12 यात्रियों की मौत हो गई थी और 40 से ज्यादा बुरी तरह जल गए थे। इसी तरह यूपी से गुजरने वाली लंबी दूरी की कई स्लीपर बसें हादसे का शिकार हो चुकी हैं।

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स्लीपर बसों की ज्यादा ऊंचाई खतरनाक- एक्सपर्ट
महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कमीशन (MSRTC) के लिए बस डिजाइन करने वाले रवि महेंदले का कहना है, 'स्लीपर बसें यात्रियों को लेटने की सुविधा तो देती हैं, लेकिन इसमें आने-जाने के लिए जगह बहुत ही कम रहती है। ये बसें आमतौर पर 8 से 9 फीट ऊंची होती हैं। इसलिए, अगर वह एक तरफ पलट जाती हैं, तो यात्रियों के लिए इमरजेंसी गेट तक पहुंचा असंभव हो जाता है। बाहर से जो लोग रेस्क्यू करना चाहते हैं, उनके लिए भी बहुत मुश्किल होती है। क्योंकि, यात्रियों को खींचकर बाहर निकालने के लिए पहले उन्हें 8-9 फीट चढ़ना पड़ता है।'

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परिवहन मंत्रालय से की जा चुकी है प्रतिबंध की मांग
एमएसआरटीसी की नई बसों को डिजाइन करने वाले महेंदले का कहना है कि वह सड़क परिवहन मंत्रालय को कई खत लिख चुके हैं, जिसमें उन्होंने स्लीपर बसें बनाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उनके मुताबिक, 'मुझे अभी तक एक भी जवाब नहीं मिला है।' उनके दावे के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के अलावा किसी भी अन्य देश में स्लीपर बसें नहीं चलतीं। हालांकि, वन इंडिया स्वतंत्र रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।

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एक्सपर्ट हाइवे पर चलने वाली बसों की स्पीड लिमिट पर भी जोर देने लगे हैं। मसलन, समृद्धि महामार्ग पर अधिकतम स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित है। लेकिन, कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि पहले हम यह सुनिश्चित कर लें कि ये वाहन 100 किलोमीटर की रफ्तार में चलने के लिए सुरक्षित हैं। इनका कहना है, जब इस स्पीड पर दुर्घटनाएं कम हो जाएं तो सरकार धीरे-धीरे स्पीड लिमिट को बढ़ा सकती है।

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कुछ एक्सपर्ट सभी हाइवे और एक्सप्रेसवे के अध्यय करने की आवश्यकता पर भी जोर दे रहे हैं।

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