आंध्र प्रदेश में मिला 15 दुर्लभ खनिजों का भंडार, जानें देश किन क्षेत्रों में होगा मालामाल?

आंध्र प्रदेश में वैज्ञानिकों ने 15 दुर्लभ खनिजों का पता लगाया है। जम्मू कश्मीर के रियासी में लीथियम मिलने के बाद देश के लिए प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में यह दूसरी बहुत बड़ी खुशखबरी है।

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आंध्र प्रदेश में 15 दुर्लभ खनिजों का अकूत भंडार मिला है। यह ऐसे खनिज हैं, जो आए दिन उद्योगों में इस्तेमाल हो रहे हैं। बल्कि, आधुनिक प्रौद्योगिकी ऐसे ही खनिजों पर निर्भर है। देश के लिए यह बहुत ही सुकून देने वाली बात है। क्योंकि पिछले दिनों ही जम्मू-कश्मीर के रियासी में लीथियम का विशाल भंडार मिला था। तमाम तरह के गजेट में लगने वाली बैटरी में इसी लीथियम का इस्तेमाल होता है। इसी तरह से आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में जिन दुर्लभ खनिजों का भंडार में मिला, वो सारे के सारे आधुनिक प्रौद्योगिकी में इस्तेमाल किए जाते हैं।

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आंध्र प्रदेश में मिला 15 दुर्लभ खनिजों का भंडार
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में दुर्लभ खनिजों का अद्भुत भंडार का पता चला है। जम्मू-कश्मीर में लीथियम मिलने के बाद यह देश के लिए लगातार दूसरी बहुत बड़ी खुशखबरी है, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में कई मामलों में देश के आत्मनिर्भर बनने का रास्ता खुल सकता है। हैदराबाद स्थित नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने यहां 15 दुर्लभ भू पदार्थों (rare earth elements-REE) का पता लगाया है। ये ऐसे महत्वपूर्ण घटक हैं, जो कई तरह के उद्योगों और रोजमर्रा के कार्यों में इस्तेमाल होते हैं।

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रेडियोऐक्टिव पदार्थों की मौजूदगी के भी संकेत
एनजीआरआई के वैज्ञानिक साइनाइट जैसी गैर-पारंपरिक चट्टानों का सर्वे कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें लैंथेनाइड श्रृंखला में इन महत्वपूर्ण खनिजों का पता चला। वैज्ञानिकों ने जिन पदार्थों का वहां पर होने का पता लगाया है, उनमें एलानाइट, सेरिएट, थोराइट, कोलंबाइट, टैंटालाइट, एपेटाइट, जिरकोन, मोनाजाइट, पायरोक्लोर यूक्सेनाइट और फ्लोराइट शामिल हैं। एनजीआरआई के वैज्ञानिक पीवी सुंदर राजू ने कहा है कि वहां पर अलग-अलग आकार के जिरकोन की मौजूदगी देखी गई है। यही नहीं, रेडियल क्रैक वाले विभिन्न रंगों के मोनाजाइट के दाने वहां पर रेडियोऐक्टिव पदार्थों की मौजूदगी के संकेत हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन दुर्लभ भू पदार्थों के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए वहां पर और ज्यादा गहरी खुदाई की जाएगी।

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देश किन क्षेत्रों में होगा मालामाल?
आंध्र प्रदेश में जिस 15 दुर्लभ खनिजों के भंडार की खोज हुई है, उससे देश कई क्षेत्रों में मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकता है। अगर भविष्य में संभावना बनी तो यह विदेशी मुद्रा कमाने का भी बहुत बड़ा स्रोत बन सकता है। क्योंकि ये खनिज सेलफोन से लेकर टेलीविजन, कंप्यूटर और ऑटोमोबाइल के निर्माण तक में काम आते हैं। यही नहीं इन पदार्थों का इस्तेमाल स्वच्छ ऊर्जा, एयरोस्पेस, डिफेंस से लेकर स्थायी चुंबक के निर्माण तक में होता है, जो कि मॉडर्न इलेक्ट्ऱॉनिक्स के प्रमुख हिस्से हैं। यही नहीं, यह वायु टर्बाइन से लेकर जेट विमान और अन्य अनेकों उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें से कई पदार्थों के लिए हमें अभी दूसरों की ओर मुंह ताकना पड़ जाता है।

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    REE का विस्तार से हो रहा है मूल्यांकन
    उच्च प्रौद्योगिकी में दुर्लभ भू पदार्थों (REE) का इस्तेमाल इनके स्वभाविक रूप से चमकदार (luminescent) और उत्प्रेरक गुणों के कारण होता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अब इन दुर्लभ तत्वों का आंध्र के क्षारीय साइनाइट परिसर में मेटलोग्राफी को लेकर मूल्यांकन किया जा रहा है। यह भूविज्ञान का वह क्षेत्र है, जिसमें संबंधित क्षेत्र के भूवैज्ञानिक इतिहास और वहां से प्राप्त खनिज भंडारों का अध्ययन किया जाता है। ऐसे परिसर अनंतपुर जिले में ही पैलियोप्रोटेरोजोइक कडप्पा बेसिन के पश्चिम और दक्षिण पश्चिमी हिस्से में मौजूद है।

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    अभी और भी खनिजों की हो सकती है खोज
    वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने जो कई क्षारीय साइनाइट डिपॉजिट के बारे में बताया था, उसे दुर्लभ भू पदार्थों वाले खनिजों के नए सिरे से तलाश की गई थी। अनंतपुर और चित्तूर जिलों में दनचेरला, पेद्दावडुगुरु, दंडुवरिपल्ले, रेड्डीपल्ले चिंतलचेरु और पुलिकोंडा परिसर आरईई वाले इन खनिजों के संभावित हब हैं। दनचेरला का मुख्य क्षेत्र अंडाकार है, जो कि 18 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। एक वैज्ञानिक के मुताबिक 300 सैंपलों का और अध्ययन किया जाना है, ताकि उनमें ऐसे दुर्लभ खनिजों के होने की संभावना का पता लगाया जा सके। (तस्वीरें- सांकेतिक)

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