आंध्र प्रदेश के 100 विधायकों ने आखिर क्यों एक साथ मांगी छुट्टी, स्पीकर ने इस शर्त के साथ स्वीकार की
हैदराबाद। आंध्र प्रदेश विधानसभा के विधायक एक बार फिर से चर्चा में हैं, पहले यहां के विधायकों ने खुद की सैलरी को 95000 रुपए से बढ़ाकर 1.2 लाख रुपए कर ली थी और अब एक साथ 100 विधायक छुट्टी पर जा रहे हैं। जी हां आंध्र प्रदेश के एक साथ 10 विधायकों ने छुट्टी के लिए आवेदन किया, बड़ी बात यह है कि जैसे उनकी खुद की सैलरी को बढ़ाने का प्रस्ताव एक मत में पास हो गया था, उसी तरह से इन विधायकों की छुट्टी का आवेदन भी स्वीकार कर लिया गया है। प्रदेश के विधायकों ने यह छुट्टी किसलिए ली है यह सुनकर भी आपको आश्चर्य हो सकता है। दरअसल सभी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर शादी में जाने की अनुमति मांगी है। इन सभी विधायकों ने दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी का आवेदन अलग-अलग शादियों में जाने के लिए किया था। आंध्र प्रदेश में शीतकालीन सत्र चल रहा है जोकि इसी महीने की शुरुआत में शुरू हुआ था, यह सत्र 30 नवंबर को खत्म हो रहा है। लेकिन सत्र के बीच में सभी विधायकों ने दो अन्य छुट्टियों का आवेदन किया है।

शादी के मौसम में 1.2 लाख शादियां
विधायकों ने छुट्टी के लिए वजह दी है कि यह शादियों का मौसम है और अगले कुछ दिनों में तकरीबन 1.2 लाख शादियां हैं, शादी के लिए यह शुभ मुहुर्त है जिसके चलते इतनी बड़ी संख्या में शादियां हो रही हैं। टीडीपी के 100 विधायकों ने स्पीकर कोडेला शिवप्रसाद राव को पत्र लिखकर दो अतिरिक्त दिनों की छुट्टी मांगी है। विधायकों की इस मांग को स्वीकार कर लिया गया है, हालांकि इसके लिए स्पीकर ने यह शर्त रखी थी कि शीतकालीन सत्र को दो दिनों के लिए बढ़ाया जाएगा, जिसपर विधायक सहमत हो गए।

पहले भी नहीं चला था सदन
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में 176 विधायक हैं, जिसमें 67 विधायक विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस के हैं, जोकि इस सत्र का पहले से ही बहिष्कार कर रहे हैं। ऐसे में विधानसभा सत्र टीडीपी व भाजपा के विधायकों की उपस्थिति से ही चल रहा था। इससे पहले विधायकों ने पिछले हफ्ते भी दो दिन की छुट्टी ली थी और वह सदन नहीं आए थे। प्रदेश में सरकार व बिल गेट्स- मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से आयोजित एगटेक समिट की वजह से विधायक सत्र में हिस्सा नहीं ले सके थे।

खुद बढ़ा ली थी सैलरी
आपको बता दें कि आंध्र प्रदेश के विधायक देश में सबसे अधिक वेतन पाते हैं। पिछले साल विधायकों ने अपनी सैलरी 95000 रुपए की जगह प्रति माह 1.25 लाख रुपए कर ली थी। सैलरी में इस बढ़ोत्तरी का सिर्फ एक विधायक ने विरोध किया था, वह वाईएसआर के विधायक थे, हालांकि वाईएसआर कांग्रेस ने इस बढ़ोत्तरी का समर्थन किया था। जगन मोहन रेड्डी ने बढ़ोत्तरी का समर्थन किया था, यह बढ़ोत्तरी विधायकों के भत्तों, सुविधाओं और कार अलाउंस में की गई थी।
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