आंध्र प्रदेश: चंद्रबाबू नायडू को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने की याचिका खारिज की
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने कथित कौशल विकास घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की एफआईआर रद्द कराने की याचिका खारिज कर दी है। नायडू के वकील ने उनकी न्यायिक हिरासत रद्द करने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी।
जिसमें तर्क दिया गया था कि अपराध जांच विभाग (सीआईडी) का मामला अवैध है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। नायडू के वकील अब राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

यह फैसला विजयवाड़ा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अदालत द्वारा इस मामले में चंद्रबाबू नायडू की न्यायिक हिरासत रविवार तक बढ़ाए जाने के कुछ घंटों बाद आया है। क्योंकि नायडू की न्यायिक हिरासत शुक्रवार को समाप्त होने वाली थी। पूर्व मुख्यमंत्री को 9 सितंबर को तड़के गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 11 सितंबर से न्यायिक हिरासत में राजमुंदरी केंद्रीय कारागार में रखा गया है।
न्यायमूर्ति श्रीनिवास रेड्डी की अध्यक्षता वाली एकल न्यायाधीश पीठ ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा, याचिका खारिज कर दी गई है। हाई कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना कि धारा 17ए के तहत गिरफ्तारी अमान्य है।
दरअसल कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने अदालत से कहा कि नायडू यह आरोप लगाकर मामले से बचने की कोशिश कर रहे हैं कि यह सीआईडी द्वारा राजनीति से प्रेरित मामला है। वकीलों ने कहा, "भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 (ए) ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों को राजनीतिक अभियोजन से बचाने के लिए है। यह नायडू के लिए नहीं है जिन्होंने सार्वजनिक धन की लूट का सहारा लिया।"
चंद्रबाबू नायडू का प्रतिनिधित्व करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और हरीश साल्वे ने तर्क दिया कि चूंकि एफआईआर 2021 में दर्ज की गई थी, इसलिए जांच शुरू करने के लिए पीसी अधिनियम की धारा 17 (ए) के तहत राज्यपाल की अनुमति लेने की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि घोटाला 2014 में हुआ था लेकिन नायडू को अब गिरफ्तार किया गया।
वाईएसआरसीपी सरकार ने आरोप लगाया है कि टीडीपी शासन के दौरान एक परियोजना में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ, जिसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए राज्य भर में कई कौशल विकास केंद्र स्थापित करना था। इस परियोजना में आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम (एपीएसएसडीसी) और दो निजी कंपनियों - सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और डिजाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता हुआ था। इस परियोजना में राज्य सरकार कुल परियोजना लागत का 10% योगदान करने के लिए सहमत हुई थी। जिसकी राशि लगभग 371 करोड़ रुपये (करों सहित) थी।












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