आंध्र प्रदेश में खास तरह की बनेंगी बिल्डिंग, बिजली की होगी कम खपत

विजयवाड़ा, 12 सितंबर। वैश्विक स्तर पर पर्यावरण को बचाने के प्रति भारत की जो प्रतिबद्धता है उसे ध्यान में रखते हुए ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिसिएंसी यानि बीईई ने सुझाव दिया है कि सबी राज्य सरकारों को ऊर्जा को बचाने की दिशा में काम करना चाहिए, साथ ही ग्रीनहाउस गैस को उत्सर्जन को कम करना होगा और लोगों के जीवन को बेहतर बनाना होगा। बता दें कि बारत ने COP26 में अपनी प्रतिबद्धता जताई है कि वह 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल कर लेगा। इस दिशा में भारत लगातार काम कर रहा है। अन्य राज्यों को इसके लिए प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

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बीईई एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है, जिसकी थीम जीरो कार्बन ट्रांसमिशन बिल्डिंग होगी, इसे 14 से 16 सितंबर के बीच दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। सभी राज्य सरकारों को इसके लिए निमंत्रण भेजा गया है, जिसमे वह कैसे इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में काम करेंगे इसकी जानकारी देंगे। इस ऑनलाइन मीटिंग के दौरान राज्य सरकारें अपनी योजना को बताएंगी। जिस तरह से शहरीकरण बढ़ रहा है, उसकी वजह से बिल्डिंगों की संख्या और उनका आकार तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी वजह से बिजली की मांग भी काफी तेजी से बढ़ रही है। भारत में निर्माण क्षेत्र की बात करें तो इसमे 44 फीसदी सामग्री की मांग में बढ़ोत्तरी हुई है। आंध्र प्रदेश के विशेष सचिव के विजयानंद ने कहा कि हम प्रदेश में इको-निवास संहिता कोड को लागू करेंगे। इस कोड को रिहायशी बिल्डिंग निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा।

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