अभिमान: अमिताभ-जया बच्चन की इस फ़िल्म का जलवा 50 साल बाद भी बरक़रार

ज़ंजीर, दीवार और शोले जैसी दमदार फ़िल्मों ने Amitabh bachchan को एंग्री यंगमैन के तौर पर मशहूर बनाया.

ज़ंजीर, दीवार और शोले जैसी दमदार फ़िल्मों ने अमिताभ बच्चन को एंग्री यंगमैन के तौर पर मशहूर बनाया.

Amitabh-Jaya Bachchans film still alive after 50 years

लेकिन कुछ विश्लेषकों के मुताबिक़, इंसानी रिश्तों के उतार-चढ़ाव पर आधारित संगीतमय फ़िल्म 'अभिमान' में अमिताभ बच्चन की भूमिका, उनके करियर की सबसे बेहतरीन भूमिका रही है.

इस फ़िल्म में अमिताभ ने एक लोकप्रिय गायक की भूमिका अदा की है जो शादी के तुरंत बाद अपनी पत्नी को स्टेज पर साथ गाने के लिए तैयार करता है. जल्दी ही पत्नी स्टार गायिका के तौर पर स्थापित हो जाती है तो पति के अहंकार को ठेस लगती है और ईष्या का भाव मुखर हो जाता है.

प्रसिद्ध निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने अमिताभ और उनकी पत्नी बनी जया बच्चन को लीड भूमिकाएं दी थीं. तब इन दोनों को रोमांस चल रहा था और अभिमान के प्रदर्शन से महज़ एक महीने पहले दोनों ने शादी की थी. इस फ़िल्म में दमदार भूमिका निभाने के लिए जया बच्चन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का प्रतिष्ठित फ़िल्मफेयर सम्मान मिला था.

इस साल जुलाई में अभिमान के 50 साल पूरे हो जाएंगे. इस फ़िल्म का मेरे ऊपर गहरा असर रहा है- मुझे अमिताभ बच्चन की जो पहली फ़िल्म देखने को मिली, वो अभिमान ही थी और आज भी उनकी सभी फ़िल्मों में मुझे सबसे बेहतर लगती है.

1973 में अमिताभ बच्चन की कम से कम आधी दर्जन फ़िल्में रिलीज हुई थीं. इसमें उस साल ऑस्कर की होड़ में शामिल होने के लिए भेजी गई फ़िल्म 'सौदागर' और भारत के सबसे बड़े एक्शन हीरो के तौर पर उन्हें स्थापित करने वाली 'ज़ंजीर' जैसी फ़िल्में शामिल थीं.

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फ़िल्म की कामयाबी की वजह

फ़िल्म समीक्षक और लेखक सैबाल चटर्जी ने बीबीसी से बताया, "अभिमान को लेकर उस साल सबसे ज़्यादा बातें हुई थीं. और यह अमिताभ की उस साल की सबसे हिट फ़िल्म थी."

सैबाल के मुताबिक़, उस दौर में प्रशंसकों की भीड़ इस फ़िल्म को देखने के लिए थियटरों में पहुंचती थी. माता-पिता और बच्चों सहित पूरा परिवार सिने थिएटरों तक पहुंच रहा था, दोपहर और शाम के शो में काफ़ी भीड़ हुआ करती थी.

थिएटर अभिनेत्री और ख़ुद को अमिताभ बच्चन की बहुत बड़ी फ़ैन बताने वाली मोनिषा भास्कर ने कहा, "पत्नी की कामयाबी से नाराज़ और दुखी पति की सदाबहार कहानी ने दर्शकों की संवेदनाओं को मोह लिया था क्योंकि यह सामाजिक यथार्थ के तौर पर गहरे धंसा हुआ था."

मोनिषा भास्कर ने बताया, "अभिमान की कहानी पर हर कोई भरोसा कर रहा था क्योंकि पति-पत्नी के ईगो आपस में टकराने को यहां किसी अचंभे से नहीं देखा जाता. भारतीय समाज में अधिकांश पति अपनी पत्नियों के बेहतर करने पर, और करियर में आगे निकलने से असहज हो जाते हैं."

मोनिषा बताती हैं, "विडंबना यह है कि पति ने सबसे पहले पत्नी को गाने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन जब वह उससे ज़्यादा लोकप्रिय हो गई तो वह संभाल नहीं सका. हालांकि पत्नी, पति से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं कर रही थी, उसकी आवाज़ कहीं ज़्यादा अच्छी थी."

जब यह फ़िल्म रिलीज़ हुई थी तब मोनिषा चार साल की थीं और उनके माता-पिता उसे ये फ़िल्म दिखाने ले गए थे. इसके बाद वह कई बार 'अभिमान' फ़िल्म को देख चुकी हैं. उन्होंने बताया, "पहली बार तो मुझे ये फ़िल्म समझ में नहीं आयी थी. लेकिन मुझे गाने और धुन अच्छे लगे थे. इसके बाद मैं कई बार इसे देख चुकी हूं और हर बार मुझे पहले से कहीं ज़्यादा आनंद आया."

मोनिषा के मुताबिक, "फ़िल्म में अमिताभ बच्चन की भूमिका उनके 'करियर की सर्वश्रेष्ठ भूमिका' थी और जया बच्चन भी उनकी पत्नी की भूमिका में बहुत विश्वसनीय दिखीं. फ़िल्म का संगीत शानदार और गीतों ने फ़िल्म की कहानी को बढ़ाने में मदद की."

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टाइमलेस फ़िल्म

समय बीतने के साथ 'अभिमान' को फ़ैंस, समीक्षक और बच्चन दंपति के फिल्म इंडस्ट्री के सहकर्मियों से काफ़ी प्रशंसाएं मिलीं. फ़िल्मकार करण जौहर इसे अपनी पसंदीदा फ़िल्म बता चुके हैं. उन्होंने ये भी माना कि 'जब भी फ़िल्म देखी, आंसू निकल आए.' कुछ साल पहले अभिनेत्री विद्या बालन ने भी स्वीकार किया था कि वे कई बार इस टाइमलेस फ़िल्म को देख चुकी हैं.

दिसंबर, 2022 में कोलकाता में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव की शुरुआत इस क्लासिक फ़िल्म से हुई थी. इस मौके पर अमिताभ बच्चन ने 'अभिमान' को दिल से याद करते हुए कहा, "इस फ़िल्म में जया और मैं, दोनों ने अपने करियर का सबसे यादगार चरित्र निभाया था. इसके गाने आज भी याद आते हैं और कइयों के लिए वे किसी स्वपन से कम नहीं हैं."

सैबाल चटर्जी के मुताबिक़, अमिताभ बच्चन के करियर में 'अभिमान' को हमेशा एक उपलब्धि के तौर पर याद किया जाएगा, क्योंकि ये फ़िल्म उनके मर्दाना और एंग्री यंग मैन वाली छवि से अलग थी. उन्होंने कहा, "इस फ़िल्म में उनका अलग ही रूप देखने को मिला था. उन्होंने अभिमान में एक वास्तविक हीरो का करिदार निभाया था जो असुरक्षा और ईष्या से भरा हुआ है. इस किरदार से उनके अभिनय क्षमता की विविधता ज़ाहिर हुई. इस फ़िल्म ने दिखाया कि वे निर्देशक की लिखी कोई भी भूमिका निभा सकते हैं."

सैबाल चटर्जी के मुताबिक़, इस फ़िल्म का स्थायी आकर्षण इसलिए भी है क्योंकि बॉलीवुड की वैवाहिक रिश्तों पर आधारित फ़िल्में अक्सर बहुत लाउड होती हैं, लेकिन अभिमान बिलकुल अलग तरह की फ़िल्म थी जिसमें किसी तरह की मुखरता नहीं थी.

सितारों के आपसी संबंध

पिछले कई सालों में कई विश्लेषकों ने कयास लगाया कि यह फ़िल्म अपने सितारों के आपसी संबंधों पर आधारित थी - जया पहले से ही एक स्थापित अभिनेत्री थीं जबकि बच्चन बॉलीवुड में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. वहीं इस फ़िल्म की कहानी की तुलना सितार वादक रविशंकर और लगभग उतनी ही प्रतिभाशाली उनकी पहली पत्नी अन्नपूर्णा देवी के संबंधों से भी हुई.

लेकिन निर्देशक मुखर्जी ने इन कयासों का खंडन किया और फ़िल्म की पटकथा का राज भी सार्वजनिक कर दिया. उन्होंने कहा कि उनकी फ़िल्म बॉलीवुड के मशहूर गायक किशोर कुमार और उनकी पहली पत्नी रूमा देवी के जीवन पर आधारित थी. रूमा देवी बंगाली फ़िल्म उद्योग में एक सफल अभिनेत्री और गायिका थीं.

उन्होंने कहा, "रूमा बहुत प्रतिभाशाली थीं वहीं किशोर को अपने करियर की शुरुआत में थोड़ा संघर्ष करना पड़ा था, वे एक कलाकार के रूप में रूमा को मिलने वाले उपहारों के प्रति हमेशा सचेत रहते थे."

हालांकि मुखर्जी ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया, लेकिन उनकी फ़िल्म अभिमान की तुलना 'ए स्टार इज बॉर्न' से भी की गई है - असुरक्षा बोध वाले पति की कहानी पर हॉलीवुड में चार-चार फ़िल्में बनी हैं. 1937 में इसके पहले संस्करण से लेकर 2018 में लेडी गागा और ब्रैडली कूपर की फ़िल्म तक.

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सैबाल चटर्जी कहते हैं, "मुखर्जी काफ़ी फ़िल्में देखते थे और उन्होंने 'ए स्टार इज बॉर्न' अवश्य ही देखी होगी. लेकिन यह एक ऐसी कहानी है जो सर्वविदित है और शायद विवाह की संस्था जितनी ही पुरानी है. अहम बात ये है कि मुखर्जी ने इसे भारतीय कहानी बना दी. उन्होंने इसे भारतीयता का रंग दिया. 'अभिमान' कहीं से पाश्चात्य फ़िल्म की नकल नहीं लगती है, यह भारतीय संस्कृति से जुड़ी मालूम पड़ती है, यह भी इसे बेमिसाल बनाता है."

हालांकि मौजूदा समय कुछ फ़ेमिनिस्ट फ़िल्म में जया बच्चन की विनम्र और आज्ञाकारी पत्नी की भूमिका के चलते फ़िल्म की आलोचना भी करती हैं. इन आलोचनाओं के मुताबिक़, जया बच्चन का किरदार अपने अधिकारों के लिए खड़ी नहीं होती है, उसके लिए पहली प्राथमिकता हमेशा पति ही रहा है.

पति-पत्नी के रिश्ते पर संदेश

मोनिषा भास्कर का कहना है कि 50 साल पहले फ़िल्म बनाई गई थी और इसमें पति-पत्नी को लेकर जो संदेश दिया गया था वो आज भी प्रासंगिक बना हुआ है. उन्होंने कहा,

"मुझे नहीं मालूम है कि कितने पुरुषों ने इस संदेश को समझा होगा, लेकिन 'अभिमान' ने स्पष्ट संदेश दिया था कि ईष्या और अहंकार की क़ीमत चुकानी होती है. वहीं महिलाओं के लिए भी संदेश था कि अपने पति के बुरे बर्ताव को एक सीमा से अधिक नहीं सहें."

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मोनिषा बताती हैं कि जया का किरदार अपने पति को छोड़कर अपने गांव लौट जाती है. मोनिषा ने कहा, "जया का किरदार उदास है, अवसाद में है. गर्भपात हो चुका है, लेकिन उसमें इतना आत्म सम्मान है कि वह अपने पति के पास नहीं ठहरती हैं, ख़ुद को साथ रखने की विनती नहीं करती है. वह अपने शर्तों पर ही वापस लौटती है, वह भी तब जब पति ना केवल लेने आता है बल्कि अपनी ग़लती भी मानता है."

'अभिमान' से जुड़े एक अन्य पहलू की चर्चा करते हुए मोनिषा ने बताया, "जिस दौर में ये फ़िल्म बनी थी, उस दौर की सामान्य फ़िल्मों का अंत सुखद होता था. इससे कुछ अलग फ़िल्मों को दर्शकों को पसंद नहीं आती थी. लेकिन 'अभिमान' अलग तरह की फ़िल्म थी. पति-पत्नी के चरित्र में पति का चरित्र कमज़ोर था, वह अपनी कामयाबी और लोकप्रियता को पत्नी की ओर शिफ़्ट होने का सामना नहीं कर सका."

वहीं अमिताभ बच्चन ने खामी भरे किरदार को उल्लेखनीय एवं वास्तविक अभिनय से हमेशा के लिए अपना बना लिया.

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