पूर्वोत्तर के राज्यों से कब तक हट जाएगा AFSPA? जानें कानून को लेकर क्या बोले गृहमंत्री अमित शाह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नगालैंड में एक जनसभा के दौरान अफस्पा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि, उम्मीद कर रहे हैं कि पूरे पूर्वोत्तर भारत से जल्द अफस्पा कानून हटाया जा सकता है।

Guwahati News: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने नगालैंड (Nagaland) में एक जनसभा के दौरान नगा शांति समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने बताया कि, इस मुद्दे पर बातचीत जारी है। गृहमंत्री ने कहा कि, वह उम्मीद कर रहे हैं कि पूरे पूर्वोत्तर भारत से जल्द अफस्पा (AFSPA) कानून हटाया जा सकता है। इस मौके पर उन्होंने नागा समुदाय की महिलाओं को मिल रहे सम्मान का भी जिक्र किया। साथ ही बताया कि, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई पहल से उत्तर पूर्व में शांति आ सकती है।
नगा शांति समझौते पर बातचीत जारी
नगालैंड के तुएनसांग इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा कि पूर्वी नगालैंड में विकास संबंधी कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें जल्द सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगा शांति समझौते पर बातचीत चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई पहल से उत्तर पूर्व में शांति आ सकती है। उत्तर पूर्व में उग्रवाद का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि, भाजपा शासन में हिंसा की घटनाओं में 70 फीसदी की कमी आई है।
अगले तीन से चार साल में खत्म हो जाएगा अफस्पा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नगा शांति वार्ता को लेकर कहा कि, अगले तीन से चार साल के भीतर नागालैंड से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। शाह ने कहा कि, 'मैं आप सभी को 2014 से पहले के नागालैंड की याद दिलाना चाहता हूं। रक्तपात, गोलाबारी, विस्फोट और उग्रवाद ने राज्य को आघात पहुंचाया। मोदी जी ने तब चल रही शांति प्रक्रिया शुरू की, नागालैंड को स्थायी शांति और विकास के रास्ते पर नागा संस्कृति के संरक्षण के साथ रखा।
पूर्वोत्तर राज्यों में होने वाली हिंसा में आई 70 फीसदी की कमी
उन्होंने तुएनसांग में कहा, छह पूर्वी जिलों में से एक, जिन्होंने एक अलग 'फ्रंटियर नागालैंड' की अपनी मांग पूरी होने तक चुनाव बहिष्कार का हौआ खड़ा कर दिया था। शाह ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों से पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा और अन्य गड़बड़ी में 70% की कमी आई है। उन्होंने बताया कि, 'इस क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों के हताहतों की संख्या में 60% की कमी आई है जबकि हिंसा में नागरिकों की मृत्यु में 83% की कमी आई है।'
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उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा-एनडीपीपी सरकार के कार्यकाल के दौरान सात जिलों के 15 पुलिस थानों की सीमा से सशस्त्र बल कानून को वापस लेने से कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है। उन्होंने आदिवासियों के लिए बजटीय आवंटन को 2014 में 21,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2022 में 86,000 करोड़ रुपये करने की ओर भी इशारा किया, जो एनडीए के शासन के तहत परिवर्तन का उदाहरण है।
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