अमित शाह ने मणिपुर में रानी गैदिनल्यू आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय की रखी नींव, किया ये ऐलान
नई दिल्ली, 22 नवंबर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के लुआंगकाओ गांव में सिटी कन्वेंशन सेंटर और इंफाल ईस्ट में रानी गैदिनलिउ आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय की स्थापना रखी। अमित शाह इस कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। आपको बता दें कि इस परियोजना के लिए जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने 15 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत की मंजूरी दी थी।

'मोदी सरकार ने संग्रहालयों के लिए किया है 190 करोंड़ का निवेश'
इस कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि मणिपुर की तरह ही देश के विभिन्न हिस्सों में बन रहे आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालय हमारे समाज को एकजुट करने में मदद करेंगे। अमित शाह ने इस दौरान कहा कि देश को आजाद कराने में आदिवासी लोगों का कितना बड़ा योगदान रहा है, ये बात शहरी नहीं जानते, यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न राज्यों में इस तरह के संग्रहालय बनाने का फैसला किया। अमित शाह ने बताया कि सरकार ने इसके लिए 195 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिसमें से 110 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
इन राज्यों में और बनेंगे संग्रहालय
अमित शाह ने बताया कि मणिपुर के बाद ऐसे संग्रहालय गुजरात, झारखंड, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में भी तैयार होंगे। इन संग्रहालयों से लोगों के अंदर देशभक्ति की भावना जागृत होगी। अमित शाह ने कहा कि आदिवासी विकास पर पीएम मोदी ने कई तरह के प्रोजेक्ट किए हैं।
कौन हैं रानी गैदिनलिउ?
26 जनवरी 1915 को मणिपुर के तामेंगलोंग जिले में जन्मी रानी गैदिनलिउ 13 साल की उम्र में जादोनांग से जुड़ी हुई थीं और उनके सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक आंदोलन में लेफ्टिनेंट बन गईं। 1926 या 1927 के आसपास जादोनांग के साथ उनके चार साल के जुड़ाव ने उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ सेनानी बनने के लिए तैयार कर दिया। जादोनांग को फांसी दिए जाने के बाद गैदिनलिउ ने आंदोलन का नेतृत्व संभाला। जादोनांग की शहादत के बाद गैडिंल्यू ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया।












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