अमित शाह पर महरबानियों की मूसलधार बारिश

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चुनाव आयुक्त एचएस ब्रह्मा ने यहां कहा, ‘मैंने खुद भाषण देखा है। हमें ज्यादा कुछ नहीं मिला। हमारे लोगों ने वीडियो भी देखा है। उन्होंने जो कुछ भी कहा उसमें खासतौर पर कुछ भी गलत नहीं है।' उन्होंने इंडियन वुमन प्रेस कोर में बातचीत के दौरान कहा, ‘हमने उन्हें बोलने और प्रचार अभियान की अनुमति (शाह) सिर्फ तब दी जब उन्होंने अपने पिछले बयान पर खेद प्रकट किया और उन्होंने हमसे वादा किया कि वह फिर ऐसा नहीं करेंगे।'
सवालों का जवाब देते हुए चुनाव आयुक्त ने कहा कि ‘घृणा फैलाने वाले भाषणों' की समस्या को रोकने के लिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में पर्याप्त प्रावधान हैं। कानून साफ तौर पर कहता है कि पार्टी उम्मीदवार और नेता जाति, धर्म या समुदाय के नाम पर भाषण नहीं दे सकते।
उन्होंने कहा, ‘ईमानदारी से एक नागरिक के तौर पर मैं कहूंगा कि हम कोई भी ऐसी बात बोले जाने की अपेक्षा नहीं करते हैं, जो लोगों की भावना को आहत करे।' ब्रह्मा ने कहा कि देश में करीब 1600 पंजीकृत राजनैतिक दलों के बीच से ‘आधे दर्जन से कम'' पार्टियां कानून के उल्लंघन और घृणा फैलाने वाले भाषण देने में शामिल हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही इशरत जहां मामले में शाह को राहत मिली थी। अब चनाव आयोग ने भी उन पर नर्मी बरतते हुए पाक-साफ बताया है।












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