नागरिकता संशोधन कानून में बदलाव के संकेत? मेघालय के CM से मुलाकात के बाद शाह ने ये कहा
नई दिल्ली- गृहमंत्री अमित शाह ने नए नागरिकता कानून में बदलाव को लेकर पहली बार बड़ा बयान दिया है। झारखंड के धनबाद में एक चुनावी रैली में उन्होंने जो कुछ भी कहा है उससे लगता है कि सरकार के मन में इसको लेकर कुछ विचार चल रहा है। दरअसल, मेघालय के सीएम ने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ उनसे मुलाकात की थी और अपनी कुछ चिंताएं जाहिर की थीं। इसपर शाह ने उन्हें हर समस्या का समाधान करने के लिए क्रिसमस के बाद बातचीत के निमंत्रण दिया है। इसके साथ ही शाह ने नॉर्थ-ईस्ट में इस मसले को लेकर भड़की हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है।

नॉर्थ-ईस्ट के अधिकारों की रक्षा का भरोसा
नए नागरिकता कानून को लेकर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनार्ड संगमा ने गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर अपनी कुछ चिंताएं जताई हैं। इस दौरान शाह ने उन्हें भरोसा दिया है कि सरकार उनकी हर चिंताओं को दूर करने का प्रयास करेगी। गृहमंत्री ने मेघालय के सीएम को क्रिसमस के बाद इस मुद्दे पर बातचीत के लिए बुलाया है। इस दौरान शाह ने विधेयक के पास होने के बाद से नॉर्थ-ईस्ट में इसके खिलाफ जारी हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि वही हिंसा को भड़काने का काम कर रही है। अमित शाह ने असम समेत बाकी सभी नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को विश्वास दिलाया है कि इस कानून के चलते उनकी संस्कृति, भाषा, विशेष पहचान और उनके राजनीतिक अधिकारों को जरा भी नुकसान नहीं पहुंचने दी जाएगी।
मेघालय की समस्या का समाधान निकालेंगे- गृहमंत्री
झारखंड के धनबाद में बीजेपी की एक चुनाव रैली के दौरान पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उनसे मुलाकात करने वाले मेघालय सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बारे में बताया कि, "कल मेघालय के मुख्यमंत्री और उनके सारे मंत्री मुझसे मिलने आए...उन्होंने कहा मेघालय के लिए यह समस्या है...मैंने उन्हें समझाया कि समस्या नहीं है...फिर भी उनका आग्रह था कि कुछ परिवर्तन करने पड़ेंगे....मैंने संगमा जी को कहा है आप...क्रिसमस से फ्री हो जाओ....उसके बाद आओ आराम से बैठकर...सकारात्मक रूप से सोचकर मेघालय की समस्या का समाधान निकालेंगे। इसमें किसी को डरने की जरूरत नहीं है।"

शाह के निशाने पर कांग्रेस
बता दें कि नया नागरिकता कानून के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से उत्पीड़न की वजह से भागकर आने वाले हिंदू, पारसी, सिख,जैन,क्रिश्चियन और बौद्ध को भारत की नागरिकता का अधिकार देता है। इसी कानून के संसद में पास होने के बाद से असम समेत नॉर्थ-ईस्ट के कई राज्यों, पश्चिम बंगाल और दिल्ली के जामिया इलाके में उबाल आया हुआ है। नॉर्थ-ईस्ट में शनिवार को भी जारी रही हिंसा के चपेट में आकर मरने वालों की तादाद तीन हो चुकी थी। इसपर गृहमंत्री ने कहा है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार इन सबकी सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस की यह आदत है कि वह सभी महत्वपूर्ण फैसलों मसलन, तीन तलाक पर पाबंदी, आर्टिकल 370 का खात्मा और धार्मिक उत्पीड़न के शिकार पड़ोसी मुल्कों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने को वोट बैंक पॉलिटिक्स के कारण अल्पसंख्य विरोधी फैसले ठहराने की कोशिश करती है।












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