Ambedkar Row: प्रियंका-राहुल नीले कपड़े में संसद पहुंचे, क्यों गूंज रहा दलित सुर? पर्दे के पीछे क्या?
Ambedkar Row: संसद के मौजूदा सत्र में कांग्रेस के सांसदों का नीले रंग के कपड़े पहनना चर्चा का विषय बन गया है। खासतौर पर राहुल गांधी, जो आमतौर पर सफेद कपड़ों में नजर आते हैं, इस बार नीले कपड़ों में दिखे।
यह विरोध प्रदर्शन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर पर की गई टिप्पणी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से माफी की मांग के तहत किया गया। आइए समझते हैं, नीले रंग का अंबेडकर से क्या गहरा संबंध है और इसे क्यों दलित चेतना का प्रतीक माना जाता है।

अंबेडकर और नीले रंग का महत्व (Ambedkar and Blue Colour)
नीला रंग भारतीय दलित आंदोलन और अंबेडकर के विचारों का प्रतीक है।
- अंबेडकर की पसंद: अंबेडकर का पसंदीदा रंग नीला था, जिसे उन्होंने अपने जीवन में भी अपनाया। उनकी मूर्तियों और उनके आंदोलन के झंडे में भी यह रंग प्रमुखता से दिखता है।
- 1942 का झंडा: अंबेडकर ने जब अनुसूचित जाति महासंघ (Scheduled Castes Federation) की स्थापना की, तो उसका झंडा नीले रंग का था, जिसके केंद्र में अशोक चक्र था।
- आकाश का प्रतीक: नीला रंग आकाश का भी प्रतीक है, जो विशालता और समता का संदेश देता है। यह अंबेडकर की सोच को दर्शाता है, जो समानता और भाईचारे को बढ़ावा देने पर आधारित थी।
- दलित मुक्ति का प्रतीक: बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने भी नीले रंग को अपनाया, जिससे यह दलित मुक्ति और सामाजिक न्याय का प्रतीक बन गया।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का नीला पहनना (Rahul Priyanka Gandhi)
राहुल और प्रियंका गांधी ने इस विरोध प्रदर्शन में नीले रंग के कपड़े पहनकर अंबेडकर और दलित समुदाय के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
- राहुल का संदेश: आमतौर पर सफेद कपड़े पहनने वाले राहुल ने नीला कपड़ा पहनकर यह संकेत दिया कि कांग्रेस दलित समाज के साथ खड़ी है।
- प्रियंका का विरोध का तरीका: प्रियंका गांधी ने संसद में "फिलिस्तीन" और "बांग्लादेश" लिखे बैग लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह विरोध प्रदर्शन को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश थी।
गृह मंत्री पर माफी की मांग
कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह से अंबेडकर पर की गई टिप्पणी के लिए माफी मांगने और इस्तीफा देने की मांग की। संसद के बाहर अंबेडकर प्रतिमा के सामने कांग्रेस सांसदों ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया।
अंबेडकर का नीला क्यों बना प्रतीक?
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यह रंग समानता, न्याय, और विशालता का प्रतीक है।
- अंबेडकर ने इसे अपने आंदोलनों और झंडे में शामिल किया।
- दलित आंदोलन के लिए यह रंग स्वतंत्रता और समानता का संदेश देता है।
राहुल गांधी और कांग्रेस का यह कदम दलित समाज को एक स्पष्ट संदेश देने का प्रयास है कि कांग्रेस उनके अधिकारों और समानता की लड़ाई में उनके साथ खड़ी है। नीले रंग का यह प्रतीक न केवल अंबेडकर के विचारों को दर्शाता है, बल्कि सामाजिक न्याय की व्यापकता को भी उजागर करता है।
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