Odisha: 'अमा ओडिशा, नबीन ओडिशा' योजना का रास्ता साफ, उड़ीसा हाईकोर्ट ने दी क्लीन चिट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने अमा ओडिशा, नबीन ओडिशा योजना के कार्यान्वयन में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सरकार के कार्यक्रम के कार्यान्वयन में सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों को शामिल करने पर विचार करने को कहा है। हाईकोर्ट ने यह आदेश 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जारी किया।
अमा ओडिशा, नबीन ओडिशा योजना के कार्यकारी विभागों द्वारा कार्यन्वयन में हस्तक्षेप की मांग की लेकर हाईकोर्ट में 40 से अधिक याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं में अधिकतर सरपंच और वार्ड सदस्य थे, जो यह चाहते थे कि परियोजनाओं का चयन और क्रियान्वयन ग्राम पंचायत के स्थानीय निर्वाचित निकाय द्वारा किया जाए।
बता दें कि 'अमा ओडिशा, नबीन ओडिशा' स्कीम के तहत राज्य सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत को 50 लाख रुपये तक आवंटित किए हैं। जिसमें से 10 लाख रुपये तक की राशि जगन्नाथ संस्कृति और परंपरा, पूजा स्थलों और तीर्थ सुविधाओं के प्रचार, संरक्षण और संरक्षण के उद्देश्य से उच्च मण्डली वाले स्थानों के लिए निर्धारित की गई है।

याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रौट्रे ने कहा कि सरकार ने ग्रामीण स्तर पर लोगों के विकास और सुधार के उद्देश्य से यह योजना शुरू की है, चूंकि यह योजना संविधान के प्रावधानों के साथ-साथ उड़ीसा ग्राम पंचायत अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुरूप पाई गई है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप की बहुत कम गुंजाइश है। पूरी योजना और परियोजनाओं के चयन, मंजूरी और धन जारी करने और कार्यों के निष्पादन से संबंधित इसके प्रावधानों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद अदालत योजना के कार्यान्वय के हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति बीपी राउत्रे की एकल न्यायाधीश पीठ ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि सरकार की ओर से योजना के तहत कार्यों के निष्पादन पर प्रतिबंध लगाना अवैध नहीं है। न्यायमूर्ति रौट्रे ने निर्णय में कहा, "इसलिए याचिकाकर्ताओं को कार्यों के निष्पादन में अपनी भागीदारी और भागीदारी का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।"












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