छत्तीसगढ़: इन सीटों पर बीजेपी का खेल बिगाड़ सकते हैं जोगी-माया
रायपुर। छत्तीसगढ़ चुनाव को लेकर इस बार देशभर में कौतुहल है, हमेशा चुपचाप आकर गुजर जाने वाले चुनाव से उलट इस बार सुर्खियों और रोमांच से भरा चुनाव प्रदेश में हो रहा है। चूंकि 90 सीटों वाले इतने से छोटे से राज्य के चुनाव के बारे में कम ही चर्चा की जाती है लेकिन जिस तरह से सियासी घटनाक्रम छत्तीसगढ़ में चल रहा है, लगता है मध्यप्रदेश और राजस्थान से ज्यादा लोगों की दिलचस्पी छत्तीसगढ़ में और उसका सबसे बड़े कारण हैं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी। जोगी के राजनीति दांव-पेंच ऐसे हैं कि हर दिन की हेडलाइन बदलती है, वे क्या, कब, कहां, कैसे कर रहे हैं इसे लेकर भाजपा-कांग्रेस में लेकर उथल-पुथल मची रहती है। हालिया दिनों में उनकी राजनीतिक उठापटक पर नजर डाले तो समझ आएगा कि वे किस हद तक परिणामों को प्रभावित करने वाले हैं जिसे देखकर ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि जोगी इस बार किंग मेकर की भूमिका निभाने वाले हैं।

बसपा- सीपीआई से गठबंधन सबसे बड़ी ताकत
जोगी की रणनीति का सबसे मजबूत पक्ष यदि कोई कहा जा सकता है तो वो मायावती की बसपा और सीपीआई से गठबंधन है। कांग्रेस लंबे समय तक इस जुगत में लगी रही कि हाथी हाथ आ जाएगा लेकिन हल जोतते किसान ने हाथी का हरण इस तरह किया कि किसी को कानो कान खबर तक नहीं हुई। छत्तीसगढ़ की 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी पिछड़ा वर्ग से आती है, 25-30 प्रतिशत करीब आदिवासी वोटर हैं, जिस पर मायावती का प्रभाव है। पिछड़ा वर्ग में जोगी भी काफी प्रभाव रखते हैं, सतनामी, कुर्मी, साहू वोटर्स को साधने में भी जोगी कामयाब हो सकते हैं, बाकि का काम मायावती करेंगी। दूसरी तरफ बस्तर की लड़ाई है, जहां सीपीआई काफी प्रभावशाली है, ऐसे में बस्तर से यदि एक या दो सीट भी निकल जाती हैं तो ये किसी करिश्मे से कम नहीं होगा।

जोगी फैमिली का पॉलीटिकल दांव
जोगी को अंदेशा है कि वे 15 से 20 सीटें निकाल सकते हैं और यदि इतनी सीटें जोगी के पाले में चली गई तो साफ है कि जोगी किंग मेकर बन गए क्योंकि 45 सीटें सरकार बनाने के लिए चाहिए ऐसे में जोगी के पास यदि 15 सीटें भी हुई तो भाजपा-कांग्रेस अकेले दम पर सरकार बना नहीं पाएगी और वहीं होगा जो कर्नाटक में हुआ। त्रिशंकु सरकार का ख्वाब बुन रहे जोगी ने फैमिली का पॉलिटिकल दांव फेंका है जो शायद राजनीति के अच्छे-अच्छे जानकारों को भी समझ नहीं आएगा। क्योंकि जोगी ने खुद के चुनाव न लड़ने पर संशय लगा रखा है। पत्नी रेणू जोगी को कांग्रेस से लड़ाना चाहते हैं, बेटा जकांछ से लड़ने तैयार है और बहू ऋचा जोगी को बसपा की सदस्यता दिलाकर चुनाव लड़ा रहे हैं। ऐसे में जोड़तोड़ में माहिर जोगी कई सीटों पर गणित बिगाड़ने में सक्षम हैं।

इन सीटों पर जोगी-माया का प्रभाव
बिलासपुर संभाग की लगभग 24 सीटें, बिलासपुर, बेलतरा, बिल्हा, कोरबा, रामपुर, कटघोरा, पाली, तानाखारा, मुंगेली, लोरमी, तखतपुर, मस्तूरी, कोटा, मरवाही (रायगढ़, जिला), लाइलुंगा, सारंगढ़, खरसिया, धर्मजयगढ़, जाजंगीर, चापां (जांजगीर चांपा जिला), अकलतरा, पामगढ़, जैजयपुर, चंद्रपुर, सक्ती इन पर ही जोगी और मायवती का प्रभाव है। 2013 के चुनावी गणित को ध्यान में रखें तो बीएसपी की 11 विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक मौजूदगी है और इन सीटों पर उसका वोट शेयर 1 से 30 फीसदी तक है. फिलहाल राज्य में पार्टी के एकमात्र विधायक केशव चंद्रा हैं, जिन्हें एक बार फिर से जैजैपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, अजीत जोगी का भी बिलासपुर जिले की कई सीटों पर प्रभाव है। भाजपा-कांग्रेस का खेल इन्हीं सीटों से बिगड़ सकता है। क्योंकि बाकि रायपुर, दुर्ग, सरगुजा, बस्तर में जोगी कांग्रेस और बसपा को कोई बड़ा जनाधार नहीं है।

सर्वे ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की चिंता
हालांकि हाल भी में आए इंडिया टीवी, सीएनएक्स-टाइम्स नाऊ और एबीपी के सर्वे में भाजपा पूर्ण बहूमत से सरकार बना रही है लेकिन जोगी-बसपा को 9 से 10 सीटों के अनुमान ने दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इस गठबंधन को यदि 5-6 सीटें सर्वे के अनुमान से ज्यादा मिल जाती हैं तो भाजपा-कांग्रेस दोनों को पूर्ण बहूमत नहीं मिलेगा और जोगी किंग मेकर या किंग की भूमिका में आ जाएंगे। बिल्कुल कर्नाटक की तरह। इसे ध्यान में रखते हुए दोनों दलों ने भी अलग से रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।
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