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'मिर्जापुर' वेब सीरीज के निर्देशकों और लेखकों की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लगाई रोक

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चर्चित वेब सीरीज 'मिर्जापुर' के निर्देशकों और लेखकों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

बॉलीवुड न्यूज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चर्चित वेब सीरीज 'मिर्जापुर' के निर्देशकों और लेखकों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। बता दें कि उनके खिलाफ मिर्जापुर शहर के 'अनुचित और अशोभनीय चित्रण' का आरोप लगाते मिर्जापुर जिले के कोतवाली देहात थाने एफआईआर दर्ज की गई थी।

Mirzapur

इसके पहले सीजन को करण अंशुमन और गुरमीत सिंह ने निर्देशित किया था, जबकि दूसरे सीजन का निर्देशन अकेले गुरमीत सिंह ने किया है। इसके अलावा इसके पहले सीजन के लेखक विनीत कृष्णा हैं जबकि दूसरे सीजन का लेखन पुनीत कृष्णा ने किया है। गुरुवार को अंशुमन, गुरमीत, पुनीत और विनीत की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और दीपक वर्मा की एक खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार और मामले में शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया और उन्हें मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

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मिर्जापुर जिले के कोतवाली देहात थाने में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के अनुसरण में 29 जनवरी को अदालत ने वेब श्रृंखला के निर्माता फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। वहीं, गुरुवार को एक निर्देश पारित करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच आगे बढ़ेगी और याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करेंगे और याचिकाकर्ताओं के जांच में सहयोग न करने की स्थिति में राज्य आदेश को बदलने के लिए आवेदन दे सकता है।

अदालत ने इस मामले को अगली सुनवाई के लिए फिल्म के निर्माताओं से संबंधित रिट याचिका के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। बता दें कि मिर्जापुर सीरीज के निर्माताओं पर धारा 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिसका उद्देश्य किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करना है) और आईपीसी की अन्य धाराओं और सूचना एवं प्रौद्योगिकी एक्ट 67-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

प्राथमिकी में मुख्य आरोप यह लगाया गया है कि मिर्जापुर के निर्माताओं ने शहर का अनुचित और अशोभनीय चित्रण कर लोगों की धार्मिक, सामाजिक और क्षेत्रीय भावनाओं को आहत किया है और घटिया और दुश्मनी की सोच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि इस तरह की वेब सीरीज का निर्माण उचित विचार-विमर्श के बाद किया गया है। इसने समाज को इतना प्रभावित किया है कि गैंग के लीडर को उसके दोस्तों ने 'कालीन भैया' कहना शुरू कर दिया है।

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