West Nile Fever: आखिर क्या है यह संक्रमण, कैसे फैलता है, क्या हैं इसके लक्षण
केरल के तीन राज्यों में वेस्ट नाइल बुखार के मामलों ने प्रशासन की चिंता को बढ़ा दिया है। केरल के तीन राज्य मलप्पुरम, कोझिकोड और त्रिशूर जिले में वेस्ट नाइल बुखार के फैलने की खबर सामने आई है।
यहां तकरीबन 10 से अधिक बुखार के मामले सामने आ चुके हैं। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से बचाव को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और लोगों से अपील की गई है कि बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

वेस्ट नाइल बुखार की बात करें तो इसे डब्ल्यूएनवी भी कहा जाता है। सही समय पर इलाज नहीं कराने पर यह संक्रमण काफी गंभीर रूप ले सकता है।
कैसे फैलता है?
यह संक्रमण तब फैलता है जब मच्छर किसी संक्रमित पक्षी को काटने के बाद इंसानों को काटते है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि संक्रमित मच्छर के काटने से सभी पीड़ितों को यह बीमारी हो।
यह संक्रमण 60 वर्ष से अधिक आयु वालों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वालों के लिए गंभीर साबित हो सकता है। ऐसे में इसका जल्द से जल्द इलाज कराना जरूरी है। जल्द इलाज शुरू होने पर इस संक्रमण के ठीक होने की संभावना अधिक रहती है।
लक्षण
वेस्ट नाइल वायरस के लक्षण की बात करें तो 3 से 14 दिन के भीतर इस संक्रमण के लक्षण लोगों में दिखने लगते हैं। वेस्ट नाइल से संक्रमित व्यक्ति को बुखार, भ्रम, मांसपेशियों में कमजोरी, दिखने में समस्या, याददाश्त कमजोर हो सकती है।
यह संक्रमण काफी गंभीर होता है और मरीज में कई दिनों तक रह सकता है। कुछ गंभीर मामलों में यह संक्रमण मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है और सही समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।
हालांकि हल्का संक्रमण होने पर यह लंबे समय तक नहीं रहता है। हल्के लक्षण होने पर अक्सर लोग इसे सामान्य बुखार समझ लेते हैं। हल्का संक्रमण होने पर मरीज को बुखार, सिर दर्द, शरीर में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आना, पेट-पीठ में दर्द, छाती में दर्द की शिकायत होती है।
कैसे फैलता है संक्रमण
यह संक्रमण मुख्य रूप से मच्छर के काटने से फैलता है। जब किसी संक्रमित पक्षी को मच्छर काटता है और इसके बाद यह संक्रमित मच्छर इंसानों को काटता है तो यह संक्रमण फैलता है।
दुर्लभ मामलों में अंग प्रत्यारोपण, स्तनपान, गर्भावस्था से यह वायरस स्थानांतरित हो सकता है। यह संक्रमण किसी दूसरे व्यक्ति को छूने या चूमने से नहीं फैलता है।
बचाव एवं इलाज
इस संक्रमण से बचने के लिए अपने आस-पास मच्छरों को पनपने ना दें, साफ-सफाई रखें। मच्छरदानी, रेपेलेंट का इस्तेमाल करें। इस संक्रमण के इलाज के लिए कोई एंटीवायरल दवा नहीं है।
हल्के लक्षण का इलाज ओवर द काउंटर यानि ओटीसी दवाओं से किया जाता है। संक्रमण होने पर और इसके लक्षण महसूस होने पर नजदीकी डॉक्टर की तुरंत सलाह लें और इलाज शुरू करें ।












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