आईएनएस व‍िक्रमादित्य समेत सभी युद्धपोत हैं सैकंड हेंड

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नई दिल्ली। युद्ध पोत किसी भी देश के लिए विपरीत पर‍िस्थ‍ित‍ियों में ढाल की काम करते हैं। अपने डेक पर दर्जनों की संख्या में लड़ाकू विमानों को संभाले ये सुरक्षा कवच किसी ऐसे देश के लिए तो बेहद जरूरी हैं जिनकी सीमाएं समुद्र के किनारों से घिरी हुई हैं।

आज जिस विक्रमाद‍ित्य का डंका पूरी दुनिया में बजाया जा रहा है वह पूरी तरह नया है ही नहीं। इतना ही नहीं अब तक देश के हाथ लगे सारे युद्ध पोत सैकंड हैंड हैं। युद्ध पोत के असल योद्धा अमरीका और रूस हैं, जो खुद इन्हें तैयार करते हैं और वक्त आने पर अपनी ताकत दिखाने से भी नहीं चूकते।

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सबसे पहला युद्धपोत भारत ने उससे खरीदा जिसने उसे सैकड़ों साल तक गुलाम बनाए रखा-

1957 में पहला विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत उसी ब्रिटेन से खरीदा था जिसके शासन के खिलाफ लड़कर हम आजाद हुए थे। 1945 में ब्रिटेन में आईएनएस हरक्यूलिस नाम से तैयार किये गये आईएनएस विक्रांत को ब्रिटेन ने बारह साल बाद भारत को बेच दिया था। चालीस साल तक भारत की सेवा करने के बाद यह विमानवाहक पोत 1997 में रिटायर कर दिया गया और 2014 तक वह मुंबई में कफ परेड के समंदर में म्यूजियम बना रहा।

दूसरा सैकंड हैंड युद्धपोत-

आईएनएस विराट नाम से दूसरा युद्धपोत आया, जिस पर खूब चर्चाएं हुईं। आईएनएस विराट भी उसी ब्रिटेन से आया था जिससे हमने आईएनएस विक्रांत खरीदा था। 1959 में ब्रिटेन की सेवा में शामिल होनेवाले इस एयरक्राफ्ट कैरियर की कुल उम्र 25 साल थी। ब्रिटेन नेवी के लिए 27 साल सेवा देने के बाद 1986 में इसे दोबारा ठीक किया गया और भारत को बेच दिया गया।

तब से लेकर अब तक भारत चार बार इस विमानवाहक पोत की मरम्मत करवा चुका है और फिलहाल यही विमानवाहक पोत सेवा में था। इस विमानवाहक पोत को चौथी मरम्मत के बाद भी 2012 में रिटायर हो जाना था लेकिन आईएनएस विक्रमादित्य की डिलिवरी में होनेवाली देरी के कारण इसकी सेवाएं 2017 तक बढ़ा दी गई हैं।

इस लिहाज से आईएनएस विक्रमादित्य भारत का एकमात्र ताकतवर विमानवाहक पोत है। जल्द ही चीन भी इस बेड़े में शामिल हो जाएगा। इस लिहाज से भारत की तैयारियां भी कमजोर नहीं है।

अभी पूर होना बाकी है असली सपना-

2016-17 तक कोच्चि शिपयार्ड से विक्रमादित्य श्रेणी का अपना एयरक्राफ्ट कैरियर बनकर तैयार हो जाएगा। यूपीए सरकार की पहल पर 2009 में शुरू किये गये स्वदेशी आईएनएस विक्रमादित्य क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर की भार वाहन क्षमता भी उतनी ही है जितनी आईएनएस व‍िक्रमाद‍ित्य की। उम्मीद के मुताबिक 2016-17 तक सेवा में आने के बाद इस विमानवाहक पोत पर रूस निर्मित मिग 29 के अलावा स्वेदश निर्मित तेजस लड़ाकू विमान भी तैनात किये जाएंगे।

शुरु हो रही है एक महत्वाकांक्षी योजना-

विक्रमादित्य से भी महत्वाकांक्षी परियोजना है आईएनएस विशाल। अगर भारत आईएनएस विशाल पर ध्यान देता है तो 2025 तक भारत का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत बनकर तैयार हो सकता है। लेकिन फिलहाल आईएनएस विशाल को बनाने की योजना कागजों पर ही है। तो समझा जा सकता है कि अब तक भारत ने जितने भी युद्धपोत ख्ररीदे हैं, वो कभी भी पूरी तरह नए नहीं रहे।

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