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इलाहाबाद HC के जज के विहिप कार्यक्रम में भाषण को लेकर बवाल, ABAP ने की कार्रवाई की मांग

वकील और NGO, कैम्पेन फॉर ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (CJAR) के संयोजक प्रशांत भूषण ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शेखर कुमार यादव के हालिया बयानों को लेकर चिंता जताई है। भूषण ने भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को पत्र लिखकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक कार्यक्रम में दिए गए उनके भाषण के बाद न्यायाधीश यादव के आचरण की आंतरिक जांच का आग्रह किया। इस भाषण को न्यायिक नैतिकता और संवैधानिक आदेशों से समझौता करने वाला माना जा रहा है।

कार्यक्रम में न्यायाधीश यादव की टिप्पणियों में समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन शामिल था, जिसके बारे में उनका दावा था कि यह विभिन्न धर्मों के बीच कानूनी मतभेदों को समाप्त करके सामाजिक सद्भाव, लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देगा। हालांकि, भूषण और एनजीओ का तर्क है कि उनकी टिप्पणियों में मुस्लिम समुदाय को निशाने पर रखा गया था, जिससे न्यायिक औचित्य और संविधान को निष्पक्ष रूप से बनाए रखने की उनकी शपथ का उल्लंघन हुआ है।

Allahabad HC

न्यायाधीश यादव के निलंबन की मांग

भूषण के पत्र में न्यायमूर्ति यादव पर मुसलमानों के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया गया है, जिससे उनकी गरिमा का हनन हुआ है और कानून के शासन को कमजोर किया गया है। भूषण के अनुसार, इस तरह का व्यवहार न्यायपालिका की स्वतंत्रता और एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में इसकी भूमिका में जनता के विश्वास को कम करता है। न्यायिक जवाबदेही और सुधार अभियान (CJAR) ने न्यायाधीश यादव को तत्काल निलंबित करने और उनके आचरण की जांच की मांग की है।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की वृंदा करात और अखिल भारतीय वकील संघ (AILU) ने भी न्यायाधीश यादव की आलोचना की। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। एआईएलयू ने उनके भाषण को मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाला भाषण और संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का उल्लंघन बताया।

ओवैसी ने साधा जज यादव पर निशाना

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने VHP के कार्यक्रम में जज यादव की भागीदारी और उनके बयानों की निंदा की। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि इस तरह की हरकतें न्यायिक स्वतंत्रता, निष्पक्षता और अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा के लिए संविधान की प्रतिबद्धता के विपरीत हैं।
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