एक करोड़ 30 लाख 'बालिका वधु' के 60 लाख बच्चे
नई दिल्ली। भारत में बाल विवाह आज भी अहम समस्या है, राजस्थान जैसे प्रदेश में आज भी पचास फीसदी बाल विवाह हो रहे हैं। नए जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो लगभग 17 लाख बच्चों में से 6 फीसदी बच्चे जिनकी उम्र 10 से 19 के बीज है वह शादीशुदा हैं। साथ ही इनमें से कई बच्चें ऐसे हैं जिनकी शादी अपने से कई बूढ़े व्यक्तियों के साथ हुई है।

भारत में बाल विवाह की समस्या को इसी बात से समझा जा सकता है कि भारत में मौजूदा समय में 130 लाख बाल बहुए हैं जिन्होंने 60 लाख बच्चों को जन्म दिया। देश में मानव विकास दर के लिए यह आंकड़ा काफी चिंता का विषय है।
आंकड़ों में भारत में की बाल विवाह की समस्या
- 2011 जनगणना के अनुसार 76 फीसदी यानि 1 करोड़ सात लाख लड़कियों का बाल विवाह हुआ है।
- वहीं 40 लाख लड़कों का भी बाल विवाह हुआ है, यानि लड़कियों का बाल विवाह दर कहीं अधिक है।
- 2001 में 34 लाख लड़कों का बाल विवाह हुआ जोकि 2011 में बढ़कर 40 लाख हो गया।
- उत्तर प्रदेश में 7.73 लाख लड़को का बाल विवाह हुआ है, जबकि 20 लाख से अधिक लड़कियों का बाल विवाह हुआ है।
- वहीं इसके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और राजस्थान का नंबर आता है।
- 10-19 वर्ष की आयु के विवाहित बच्चे ही बच्चों को जन्म दे रहे हैं।
क्या है बाल विवाह की समस्या
- कम उम्र में बच्चा पैदा करने से मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
- बाल विवाह से पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को ज्यादा नुकसान होता है।
- भारत में मातृ मृत्यु दर प्रति लाख 2014 में 190 हो गयी है जोकि 2006 में 254 थी, लेकिन अभी भी यह आंकड़ा काफी चिंता का विषय है।
- शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 में से 56 हो गयी है 2014 में जोकि 2006 में 68 थी।












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