अखिलेश ने दिखाई ताकत, साबित किया केवल मुलायम के बेटे ही नहीं वो
अखिलेश यादव अपनी सरकार में ऐसे किसी भी मंत्री को नहीं चाहते, जो अमर सिंह के समर्थक हों।
लखनऊ। आज यूपी की सियासत में बड़ा उलटफेर हुआ है जिसकी कल्पना खुद सपा पार्टी और सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को भी नहीं होगी। आज सीएम अखिलेश यादव ने पार्टी वरिष्ठ मंत्री व सपा के प्रदेश अध्यक्ष और अपने सगे चाचा शिवपाल यादव को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अखिलेश ने रविवार को ही पार्टी के विधायकों की एक बैठक बुलाई, जहां अखिलेश समर्थक पहुंचे थे।
इस मीटिंग में किसी को मोबाइल ले जाने की इजाजत नहीं थी लेकिन इस मीटिंग के बाद जो खबरें मीडिया में सामने आयीं वो एकदम से चौंकाने वाली थी। इस समय मीटिंग स्थल के सामने अखिलेश समर्थक उनके नाम के नारे लगा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस कदम के पीछे अमर सिंह को लेकर अखिलेश की नाराजगी है। वह अपनी सरकार में ऐसे किसी भी मंत्री को नहीं चाहते, जो अमर सिंह के समर्थक हों।
जबकि नारे लगा रहे लोगों का कहना है कि सीएम के इस कदम से वो खुश हैं, उन्होंने साबित किया कि वो नेतृत्व के साथ ही कठिन फैसले लेने का भी दम रखते हैं तो वहीं टीवी पर चल रही राजनैतिक पुरोधाओं की बहस के मुताबिक अखिलेश सिंह यादव का ये कदम ये साबित करता है कि वो केवल सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के बेटे ही नहीं हैं बल्कि उनके अंदर तीखे और कठिन फैसले लेने की ताकत है।
साल 2012 में भी अखिलेश ने अपने इस तेवर को लोगों के सामने दिखाया था, उस समय सपा के कभी बेहद सगे माने जाने वाले दागी डीपी यादव को पार्टी में लेने से उन्होंने इंकार कर दिया था। उस समय अखिलेश सीएम नहीं थे लेकिन आज उनके पास सीट भी है और अधिकार भी, जिसके चलते वो लोगों की उस कसौटी पर खरे उतरते हैं जिसमें उन्हें लोग एक स्वच्छ छवि वाला नेता मानते हैं।
देखते हैं अखिलेश के इस कदम का उनके पिता मुलायम सिंह क्या जवाब देते हैं और आने वाले चुनावों में अखिलेश यादव लोगों के हीरो बनते हैं या फिर जीरो साबित होते हैं।













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