Air India Plane Crash: 260 मौतों के 40 दिन बाद बोइंग 787 के फ्यूल स्विच ऑफ का खुला राज! क्या थी कोई खामी?
Air India Plane Crash Update: 12 जून 2025-यह तारीख हर भारतीय के दिल में एक दर्दनाक याद बनकर रह गई है। उस दिन अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भर रहा एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान टेकऑफ के महज 32 सेकंड बाद मेघानी नगर में बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराकर क्रैश हो गया। इस भयावह हादसे में 260 लोगों की जान चली गई। हादसे की चीखें आज भी लोगों के कानों में गूंज रही हैं, और अपनों को खोने का दर्द रातों की नींद उड़ा रहा है।
दर्दनाक हादसे के 40 दिन...960 घंटे बाद, 21 जुलाई 2025 को, इस हादसे की जांच में एक नया मोड़ आया। एयर इंडिया ने अपने बोइंग 787 और 737 विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच (FCS) लॉकिंग तंत्र की जांच पूरी कर ली और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। लेकिन यह निष्कर्ष हादसे की पहेली को और उलझा रहा है। आइए, जानते हैं क्या खुलासा एयर इंडिया ने किया?

एयर इंडिया की जांच: फ्यूल स्विच में सब ठीक, फिर हादसा क्यों?
12 जून के हादसे के बाद भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने सनसनी मचा दी थी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद ही विमान के दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच 'रन' से 'कटऑफ' मोड में चले गए, जिससे इंजनों को ईंधन की सप्लाई रुक गई और विमान क्रैश हो गया। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) में एक पायलट को दूसरे से पूछते सुना गया, 'तुमने स्विच क्यों बंद किया? जवाब में दूसरा पायलट बोला, मैंने नहीं किया!'
इस रहस्यमयी सवाल ने पूरे देश को हैरान कर दिया। क्या यह मानवीय भूल थी? या फिर बोइंग 787 के फ्यूल स्विच सिस्टम में कोई तकनीकी खामी थी? इस सवाल का जवाब पाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने 14 जुलाई को आदेश जारी किया कि सभी बोइंग 787 और 737 विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच लॉकिंग तंत्र की जांच की जाए। एयर इंडिया ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। 12 जुलाई से ही स्वैच्छिक निरीक्षण शुरू कर दिए गए और 21 जुलाई की डेडलाइन से पहले सभी विमानों की जांच पूरी कर ली गई।
बोइंग 787-737 की जांच में क्या निकला?
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, 'हमने अपने बोइंग 787 और 737 बेड़े के फ्यूल कंट्रोल स्विच लॉकिंग तंत्र की गहन जांच की, और हमें कोई खराबी नहीं मिली। DGCA को इसकी सूचना दे दी गई है।' उन्होंने यह भी कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है।
फ्यूल स्विच की पहेली: आखिर गलती कहां हुई?
AAIB की 15 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया कि टेकऑफ के तीन सेकंड बाद, 08:08:42 UTC पर, विमान ने 180 नॉट्स की अधिकतम स्पीड हासिल की, लेकिन तभी दोनों इंजनों के फ्यूल स्विच एक सेकंड के अंतराल में 'कटऑफ' मोड में चले गए। इससे इंजनों की स्पीड तेजी से गिरने लगी, और विमान 625 फीट की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद नियंत्रण खो बैठा। पायलटों ने 10-14 सेकंड बाद स्विच को फिर से 'रन' मोड में लाने की कोशिश की, लेकिन समय और ऊंचाई की कमी के कारण विमान क्रैश हो गया।
रिपोर्ट में यह भी साफ हुआ कि न तो ईंधन की क्वालिटी में कोई खराबी थी, न ही बर्ड हिट या मौसम की वजह से हादसा हुआ। विमान का रखरखाव हाल ही में जून 2023 में किया गया था, और सभी तकनीकी जांचें सामान्य थीं। फिर सवाल उठता है-अगर फ्यूल स्विच में कोई खामी नहीं थी, तो वे अपने आप 'कटऑफ' मोड में कैसे चले गए?
2018 की चेतावनी: क्या एयर इंडिया ने नजरअंदाज की?
हादसे के बाद एक पुरानी चेतावनी सुर्खियों में आई। 2018 में अमेरिका के फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने बोइंग 737 के फ्यूल कंट्रोल स्विच लॉकिंग सिस्टम में खामियों की ओर इशारा किया था। FAA ने कहा था कि ये स्विच अनजाने में टच, हिलने, या टर्बुलेंस की वजह से 'कटऑफ' हो सकते हैं। यह डिजाइन बोइंग 787 में भी इस्तेमाल होता है, लेकिन FAA ने इसे अनिवार्य इंस्पेक्शन की कैटेगरी में नहीं रखा था। एयर इंडिया ने भी इसे केवल सुझाव मानकर नजरअंदाज कर दिया।
X पर @ShivaniV2901 ने इस पर सवाल उठाया, 'एयर इंडिया और बोइंग को क्लीन चिट दे दी गई, लेकिन दोष मृत पायलट पर डाल दिया गया, जो अब अपना पक्ष नहीं रख सकता। क्या यह सही है? हादसे के बाद जो दर्जनों बार Air India की फ्लाइट्स में देरी, टेक्निकल फॉल्ट और इमरजेंसी लैंडिंग हुईं - वो सब महज संयोग थीं?' यह सवाल कई लोगों के मन में है कि क्या यह हादसा टाला जा सकता था, अगर 2018 की चेतावनी को गंभीरता से लिया गया होता।
हादसे का दर्द: एक त्रासदी जो भुलाए नहीं भूलती
12 जून का हादसा, भारत के सबसे भयावह विमान हादसों में से एक है। विमान में सवार 242 लोगों में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, एक कनाडाई, और सात डच नागरिक थे। मृतकों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और कई मेडिकल स्टूडेंट्स भी शामिल थे। हादसे के बाद मेघानी नगर में काला धुआं और जले हुए शवों की बदबू ने पूरे इलाके को मातम में डुबो दिया।
कुरुक्षेत्र की अंजू शर्मा के परिजन प्रशांत ने कहा, 'किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। उनकी फ्लाइट थी, और कुछ देर बाद ही टीवी पर हादसे की खबर आई।' मणिपुर के एक परिवार को अपनी बेटी नगांथोई शर्मा का इंतजार है, जो एयर इंडिया में काम करती थी। उनकी मां ने कहा, 'हम अब भी उम्मीद करते हैं कि वो जिंदा है।'
मौतों का मुआवजा 25 लाख-1 करोड़?
एयर इंडिया ने हादसे के बाद मृतकों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये के अंतरिम मुआवजे का ऐलान किया है, और टाटा ग्रुप ने प्रत्येक परिवार को 1 करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की। AAIB की अंतिम जांच रिपोर्ट एक साल के भीतर आने की उम्मीद है, जिसमें यह साफ हो सकता है कि फ्यूल स्विच का 'कटऑफ' होना मानवीय भूल थी, तकनीकी खामी थी, या इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट की गड़बड़ी थी।
ये भी पढ़ें- Air India की यात्रियों से भरी फ्लाइट कैंसिल, IndiGo विमान में हुई मिड एयर इमजेंसी, एक दिन में टले 3 बड़े हादसे












Click it and Unblock the Notifications