Air India Crash: हवा में बंद हुई फ्यूल सप्लाई, सेकंडों में क्रैश हुआ प्लेन, पायलटों को दोषी ठहराने पर विवाद

Air India Crash: अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के दर्दनाक हादसे को लेकर अब नए और हैरान करने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जहां एक ओर शुरुआती जांच रिपोर्ट में पायलटों पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की गई, वहीं दूसरी ओर अमेरिका से आई एक रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विमान के कप्तान ने खुद उड़ान भरने के चंद सेकंड बाद इंजन की फ्यूल सप्लाई बंद कर दी थी।

ब्लैक बॉक्स में दर्ज बातचीत और डेटा से यह साफ हुआ है कि कॉकपिट में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल था, लेकिन कप्तान शांत बने रहे। इस बीच पायलटों के संगठन ने भी जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि बिना पूरी जांच के किसी पर दोष लगाना जल्दबाज़ी होगी। हादसे की सच्चाई अब अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इन नए खुलासों ने विमानन सुरक्षा को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है।

Air India Crash

पायलटों को दोषी ठहराने पर विवाद

एयर इंडिया फ्लाइट AI 171 हादसे को लेकर शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पायलटों के संगठन ने नाराज़गी जताई है। संगठन का कहना है कि रिपोर्ट में सीधे तौर पर पायलटों को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाज़ी है और यह निष्पक्ष जांच के खिलाफ है।
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ब्लैक बॉक्स रिकॉर्डिंग से चौंकाने वाला खुलासा

वहीं अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया है कि ब्लैक बॉक्स रिकॉर्डिंग में यह साफ सुनाई दिया कि विमान के कप्तान ने खुद ईंधन नियंत्रण स्विच को 'रन' से 'कट-ऑफ' मोड में कर दिया था। यह कदम टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद उठाया गया, जिससे इंजन को जाने वाली फ्यूल सप्लाई बंद हो गई।

कॉकपिट में घबराहट और हैरानी

रिपोर्ट में बताया गया कि जैसे ही कप्तान ने स्विच बदले, पहले अधिकारी क्लाइव कुंदर घबरा गए और उन्होंने सवाल भी पूछा कि ऐसा क्यों किया गया। उस वक्त कप्तान सुमीत सभरवाल शांत बने रहे। ये बातचीत कॉकपिट रिकॉर्डिंग में दर्ज है, जो अब जांच का अहम हिस्सा बन गई है।

एयर इंडिया विमान दुर्घटना पर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट पर फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने कहा, "...रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि पायलट की गलती से ईंधन नियंत्रण स्विच को बंद किया गया। मैं वॉल स्ट्रीट जर्नल के लेख की निंदा करता हूं। उन्होंने लेख में लिखा कि यह पायलट की गलती थी। उन्होंने रिपोर्ट ठीक से नहीं पढ़ी है, और हम FIP के माध्यम से उनके खिलाफ कदम उठाएंगे। हमने कल एक प्रेस बयान जारी किया था कि कोई भी चैनल, टिप्पणीकार या किसी भी एजेंसी का अध्यक्ष ऐसे विचार नहीं दे, जिसका कोई प्रमाण नहीं है..."

कौन हैं कैप्टन सी.एस. रंधावा?

कैप्टन सी.एस. रंधावा अनुभवी और प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं। उन्होंने करीब 48 वर्षों तक भारतीय नौसेना, एयर इंडिया और नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। रंधावा अब Federation of Indian Pilots (FIP) के अध्यक्ष हैं और हाल ही में एयर केरला में ऑपरेशंस के उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हुए हैं।

कैप्टन रंधावा बोइंग B-777, B-787 और एयरबस A-310 जैसे बड़े विमान उड़ा चुके हैं और फाइटर जेट्स उड़ाने का भी उन्हें अनुभव है। इसके अलावा वह एक प्रशिक्षित फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (A-2 QFI) भी हैं। DGCA में रहते हुए उन्होंने देश की उड़ान सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।

कौन थे पायलट?

हादसे के समय फ्लाइट AI 171 की कमान 56 साल के कप्तान सुमीत सभरवाल के पास थी, जिनके पास 15,638 घंटे की उड़ान का अनुभव था। उनके साथ 32 साल के फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर थे, जिन्होंने अब तक 3,403 घंटे की उड़ान भरी थी।

हादसा कैसे हुआ?

लंदन जा रही यह बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के चंद सेकंड बाद ही नियंत्रण खो बैठा और सीधे बी.जे. मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की इमारत से टकरा गया। इस दर्दनाक हादसे में 260 लोगों की जान चली गई, जिनमें 241 यात्री और क्रू सदस्य विमान में सवार थे, जबकि 19 लोग जमीन पर मारे गए।

AAIB की शुरुआती रिपोर्ट में भी यही संकेत

भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती रिपोर्ट में भी यह सामने आया था कि विमान के दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच टेकऑफ के ठीक बाद 'रन' से 'कट-ऑफ' मोड में एक-एक सेकंड के अंतर से बदले गए थे। अब यही जानकारी अमेरिकी रिपोर्ट से और पुख्ता हो गई है।

क्या कहती है पायलटों की संस्था?

पायलटों के संगठन का कहना है कि दुर्घटना की पूरी जांच होनी चाहिए और तकनीकी पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाए और पायलटों को दोषी करार देना उचित नहीं होगा।

निष्पक्ष जांच की मांग

अब इस मामले में दोनों देशों की रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ मानवीय भूल थी या इसके पीछे कोई तकनीकी खामी भी थी। जांच जारी है और सभी की निगाहें अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस भयावह हादसे की असली वजह उजागर करेगी।
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