TMC Controversy: 'पति छोड़ सकती हूं पार्टी नहीं', कौन है ये खूबसूरत नेता जिसने घर के बदले ममता दीदी को चुना?
TMC Controversy: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में मचा घमासान अब केवल पार्टी तोड़ने तक नहीं बचा है बल्कि दल का झगड़ा अब लोगों के घरों को तोड़ने में जुटा है, सुनने में आपको ये बात शायद काफी अटपटी लगे लेकिन सच यही है, दरअसल सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर नया ठिकाना ढूंढ लिया है लेकिन उनकी पत्नी अभी भी मजबूती के साथ ममता बनर्जी के साथ खड़ी हैं और जमकर उनके कसीदें पढ़ रही हैं।
जी हां यहां बात हो रही है लोकप्रिय नेता नयना बंद्योपाध्याय की जो बागी नेताओं के साथ नहीं बल्कि ममता बनर्जी के साथ तृणमूल को बचाने का प्रयास कर रही हैं। सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने बागी रुख अख्तियार करते हुए हाल ही में पार्टी का साथ छोड़ दिया और नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए।

पाला बदलने के तुरंत बाद, उन्होंने टीएमसी के 19 अन्य बागी सांसदों के साथ मिलकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र सौंपा, जिसमें स्पष्ट किया गया कि वे संसद में एनडीए सरकार का समर्थन करेंगे। आपको बता दें कि सुदीप बंदोपाध्याय कोलकाता से सांसंद हैं और नयना एमलए हैं।
'जिन्हें दुर्गा मानती हूं उन्हें कैसे छोड़ सकती हूं'
पति के पार्टी छोड़ने के बाद से अटकलें लग रही थीं कि नयना भी टीएमएसी छोड़ देंगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि बातें बनाने वालों को नयना बंद्योपाध्याय ने करारा जवाब देते हुए कहा कि 'उनके लिए टीएमसी छोड़ने या ममता बनर्जी का साथ छोड़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। मैं दीदी के साथ मजबूती से खड़ी हूं। भले ही वह मुझे छोड़ दें, लेकिन मैं उन्हें कभी नहीं छोड़ूंगी वह उस इंसान को कैसे छोड़ सकती हैं, जिसे उन्होंने साक्षात 'दुर्गा' का रूप माना है।'

एक ही छत के नीचे दो अलग राजनीतिक विचारधाराएं
यह मामला इस मायने में अनूठा है कि अब दोनों नेता एक ही घर में रहने के बावजूद दो बिल्कुल विरोधी खेमों का हिस्सा बन चुके हैं। सुदीप बंदोपाध्याय ने इस पूरे घटनाक्रम पर खुलकर बात की है। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी पत्नी नयना को समझाने और अपने साथ नए राजनीतिक सफर पर चलने के लिए मनाने की काफी कोशिश की थी। हालांकि, नयना अपने फैसले पर अडिग रहीं और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में ही बने रहने का फैसला किया।
कौन हैं नयना बंद्योपाध्याय?
नयना बंद्योपाध्याय बंगाली फिल्म जगत का खूबसूरत चेहरा रही हैं, वह 2014 से तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार के तौर पर चौरंगी विधानसभा क्षेत्र की विधायक हैं। इससे पहले, वह 2001 से 2006 तक इसी राजनीतिक पार्टी की उम्मीदवार के तौर पर बोबाज़ार विधानसभा क्षेत्र की विधायक थीं। जब वह दसवीं कक्षा में थीं, तब उन्होंने 15 बरस की उम्र में तरुण मजूमदार की फ़िल्म 'पथभोला' (1986) से प्रोसेनजीत चटर्जी के साथ डेब्यू किया था।

तरुण मजूमदार ने रखा नयना नाम, बंगाल सिनेमा में काफी किया काम
तरुण मजूमदार ने ही उनका नाम बदलकर 'नयना' रख दिया था। इसके बाद वह 'सुरेर आकाशे' (1988), 'आमार तुमी' (1989), 'प्रेम प्रतिज्ञा' (1989), 'तूफ़ान' (1989), 'अनुराग' (1990), 'बलिदान' (1990), 'पति परम गुरु' (1991), 'शैतान' (1992) और 'घर संसार' (1993) जैसी बंगाली फ़िल्मों में नज़र आईं। अनूप सेनगुप्ता की कमर्शियल हिट फ़िल्म 'सिंथिर सिंदूर' (1996) में सीता की भूमिका निभाकर उन्हें काफ़ी शोहरत और लोकप्रियता मिली।

चौरंगी विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की और ममता की बनीं करीबी
वह 2001 से 2006 तक उसी राजनीतिक पार्टी की उम्मीदवार के तौर पर बोबज़ार विधानसभा क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्य रहीं। उन्होंने 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में चौरंगी विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल करके कांग्रेस के अपने मज़बूत प्रतिद्वंद्वी सोमेन मित्रा को हराया था, उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फिर से चौरंगी निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करके अपनी सीट बरकरार रखी।














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