Operation Delimitation क्‍या है? तृणमूल में मचे बवाल के बाद क्यों है चर्चा में? बीजेपी से जुड़ रहा नाम

What is Operation Delimitation: देश की राजनीति में इन दिनों बड़ी ही उथल-पुथल देखने को मिल रही है। यह लड़ाई सिर्फ सत्ता संघर्ष तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करते वाली बन चुकी है। टीएमसी में टूट-फूट के बाद संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।

राजनीतिक गलियारों में भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' के नए अवतारों की चर्चा जमकर हो रही है। इसने राजनीति के पंडितों को भी हैरान कर दिया है क्योंकि इस बार रणनीति केवल सरकारें गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा संसद के भीतर बड़े संवैधानिक बदलावों तक फैलता नजर आ रहा है।

What is Operation Delimitation

पश्चिम बंगाल में एक तरफ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ खेला हो चुका है और वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के भीतर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। शिंदे शिवसेना का ऑपरेशन टाइगर चल रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है ये बड़े घटनाक्रम केवल दल-बदल की राजनीति नहीं, बल्कि राजनीतिक बदलाव का संकेत है। इसे राजनीति विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर 'ऑपरेशन डीलिमिटेशन' का नाम दे रहे हैं। आइए जानते हैं क्‍या है 'ऑपरेशन डीलिमिटेशन'? क्‍यों दावा किया जा रहा है कि अगर ये सफल हुआ तो भविष्‍य में भाजपा को चुनाव में हरा पाना नामुमकिन होगा!

Operation Delimitation क्‍या है, क्‍यों हो रही इसकी चर्चा?

डीलिमिटेशन (Delimitation) को हिंदी में परिसीमन कहते हैं। परिसीमन जिसके तहत देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण किया जाता है। इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखना होता है। हालांकि संख्‍या बल के अभाव में परिसीमन से संबंधित 'संविधान संशोधन विधेयक' संसद में मोदी सरकार पारित नहीं करवा पाई है।

इस‍ीलिए इस राजनीतिक उठापटक को संसद के आगामी मानसून सत्र और सरकार के बड़े विधायी एजेंडे परिसीमन बिल से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक को संसद से पारित कराना हो सकता है। इसीलिए इसे मोदी सरकार का 'ऑपरेशन डिलिमिटेशन' का नया नाम जा रहा है।

क्‍या अन्‍य पार्टियों में भी होगी टूट?

संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यदि टीएमसी के नए 20 बागी सांसदों के समर्थन को मान्‍यता मिलती है तो एनडीए का आंकड़ा सुरक्षित दायरे में पहुंच सकता है। लोकसभा की वर्तमान स्थिति में इस बदलाव के लिए करीब 360 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी। हालांकि माना जा रहा है कि आने वाले दिनों मे तमिलनाडु में द्रमुक (डीएमके) और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे भी भाजपा के ऑपरेशन लोटस का असर दिखेगा और टूट होगी।

Delimitation सफल हुआ तो भविष्‍य में भाजपा को चुनाव हरा पाना नामुमकिन होगा!

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के बाद परिसीमन की प्रक्रिया देश की राजनीति की दिशा बदल सकती है। लोकसभा सीटों के संभावित बढोत्‍तरी का असर सीधे तौर पर 2029 के आम चुनाव और उसके बाद बनने वाले राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा और 2029 का लोकसभा चुनाव विपक्ष के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे ही विपक्षी पार्टियां में टूट और बिखराव होता रहा तो राष्ट्रीय विपक्षी दलों की एकजुटता कमजोर हो जाएगी और जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा इसीलिए दावा किया जा रहा है कि भविष्‍य में भाजपा को हरा पाना नामुमकिन होगा?

परसीमन के बाद किन राज्‍यों को होगा सबसे अधिक लाभ?

पिछले कई दशकों में देश के विभिन्न राज्यों में जनसंख्या वृद्धि की दर अलग-अलग रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में आबादी तेजी से बढ़ी, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। ऐसी स्थिति में यदि भविष्य में परिसीमन लागू होता है तो हिंदी भाषी राज्यों की लोकसभा सीटों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे राष्ट्रीय राजनीति का शक्ति संतुलन भी बदल सकता है और केंद्र की सत्ता पर इन राज्यों का प्रभाव पहले से कहीं अधिक हो सकता है।

संसद में NDA को मजबूत बहुमत की जरूरत क्यों?

यदि भविष्य में परिसीमन से जुड़े बड़े बदलाव लागू किए जाते हैं, तो उससे संबंधित कई संवैधानिक और विधायी प्रक्रियाओं में संसद की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। कई मामलों में विशेष बहुमत की आवश्यकता पड़ सकती है । राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसी वजह से राष्ट्रीय स्तर पर संख्या बल बढ़ाने की कोशिशें महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। विपक्षी दलों में हो रही टूट-फूट को भी इसी व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर सस्पेंस खत्म! ममता बनर्जी या ऋतब्रत किसको हाईकोर्ट से लगा झटका?
पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर सस्पेंस खत्म! ममता बनर्जी या ऋतब्रत किसको हाईकोर्ट से लगा झटका?
NCPI किसकी पार्टी है? जिसमें शामिल हुए TMC के बागी सांसद बोले- 'PM मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ करेंगे काम'
NCPI किसकी पार्टी है? जिसमें शामिल हुए TMC के बागी सांसद बोले- 'PM मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ करेंगे काम'
'15 दिनों के अंदर माफी मांगो', कौन हैं Dr. Baidyanath Ghosh? जिन्होंने भेजा ममता समेत TMC नेताओं को नोटिस
'15 दिनों के अंदर माफी मांगो', कौन हैं Dr. Baidyanath Ghosh? जिन्होंने भेजा ममता समेत TMC नेताओं को नोटिस
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+