एयर इंडिया हादसा: मां की त्वचा ने बचा ली 8 माह के बेटे की जान, जले हुए शरीर की स्किन ग्राफ्टिंग कैसे हुई?
Air India Crash: अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे में 242 यात्रियों, पायलट और क्रू मेंबर में से एकमात्र विश्वास कुमार का जिंदा बचना किसी चमत्कार से कम नहीं था। अब विमान हादसे के महीने भर बाद उसी हादसे से जुड़ा एक अलग तरह का चौंका देने वाला मामला सामने आया है। उस प्लेन हादसे में एक मां मनीषा अपने आठ माह के बच्चे ध्यांश को न सिर्फ मौत के मुंह से बाहर खींच लाई बल्कि अपनी त्वचा दान करके बेटे को नई जिंदगी दी।
दरअसल, 12 जून 2025 की दोपहर को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के गैटविक के लिए उड़ान भरने के चंद सेकंड बाद ही क्रैश हो गई थी। हादसा एयरपोर्ट के पास रिहायशी इलाके मेघाणीनगर में हुआ और प्लेन बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रावास की छत पर जाकर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इससे हादसे में प्लेन में सवार 241 लोगों के अलावा जमीन पर मौजूद 19 लोगों की भी जान चली गई।

बीजे मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजी में सुपर-स्पेशियलिटी एमसीएच छात्र कपिल कछाड़िया हादसे के समय ड्यूटी पर थे। उनकी पत्नी मनीषा कछाड़िया व आठ माह का बेटा ध्यांश भी मौजूद थे। प्लेन हादसे के बाद घटनास्थल के आस-पास चारों तरफ आग की लपटें फैल गई थीं।
आग से घिरते देख मनीषा ने आठ माह के बेटे ध्यांश को अपने शरीर से ढककर बचाने की पूरी कोशिश की, मगर मनीषा का चेहरा व हाथ 25 प्रतिशत और ध्यांश का चेहरा, हाथ, पेट का 36 प्रतिशत हिस्सा गंभीर रूप से जल गया था। मां-बेटे को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
ध्यांश को केडी अस्पताल के पीआईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया। हादसे के बाद ध्यांश के फेफड़ों में खून भर गया था, जिसके इलाज के लिए पसलियों के बीच ड्रेनेज ट्यूब (इंटरकोस्टल ट्यूब) लगानी पड़ी। ध्यांश के पिता कपिल ने डॉक्टर-पिता का फर्ज एक साथ निभाया। रात को वह खुद अपने बेटे की ड्रेसिंग करते थे।
प्लास्टिक सर्जन डॉ. रुतविज परिख के अनुसार 8 माह के ध्यांश की त्वचा काफी जल चुकी थी। इसलिए दूसरी त्वचा से स्किन ग्राफ्टिंग जरूरी हो गई थी ताकि संक्रमण व भविष्य के खतरे से बच्चे को बचाया जा सके। तब भी उसकी मां मनीषा आगे आईं और मनीषा की त्वचा से ध्यांश की स्किन ग्राफ्टिंग करके उसे नया जीवन दिया गया। मां-बेटे दोनों अभी स्वस्थ हैं। अस्पताल से उनको छुट्टी मिल चुकी है।
स्किन ग्राफ्टिंग क्या है?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्किन ग्राफ्टिंग (Skin Grafting) एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें शरीर के एक हिस्से से त्वचा को लेकर किसी दूसरे हिस्से पर लगाया जाता है। यह आमतौर पर तब की जाती है जब त्वचा का कोई हिस्सा जल गया हो, कट गया हो, सड़ गया हो या किसी कारण से पूरी तरह से नष्ट हो गया हो और वह खुद से ठीक नहीं हो सकता।
कैसे की जाती है स्किन ग्राफ्टिंग?
1. डोनर साइट का चुनाव
त्वचा शरीर के किसी अन्य हिस्से जैसे जांघ, नितंब, पेट या बांह से ली जाती है।
2. ग्राफ्ट के प्रकार
Split-thickness graft (STSG):
- - इसमें त्वचा की ऊपरी सतह (epidermis और थोड़ा-सा dermis) ली जाती है।
- - यह आमतौर पर जल्दी ठीक होती है और बड़े क्षेत्र के लिए उपयोग होती है।
Full-thickness graft (FTSG):
- - इसमें पूरी त्वचा (epidermis + पूरा dermis) ली जाती है।
- - यह अधिक टिकाऊ होती है और हाथ, चेहरा आदि प्रमुख हिस्सों में प्रयोग होती है।
3. सर्जरी की प्रक्रिया
डोनर साइट से त्वचा काटी जाती है। फिर उस त्वचा को ज़रूरत वाली जगह पर सिल दिया जाता है या चिपकाया जाता है। बाद में पट्टी बाँधी जाती है और संक्रमण से बचाने के लिए देखरेख की जाती है। आमतौर पर 1 से 2 हफ्ते में डोनर साइट और ग्राफ्ट वाली साइट ठीक हो जाती है। फुल रिकवरी में कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं।












Click it and Unblock the Notifications