Ahmedabad Crash: क्या बढ़ने लगे हैं विमान हादसे? पिछले 20 साल में कितने प्लेन क्रैश और कितनों की मौत?
Ahmedabad Crash: दक्षिण कोरिया में 29 दिसंबर 2024 को लैंडिंग के दौरान एक हवाई जहाज़ दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 179 लोगों की मौत हो गई। उसके एक महीने बाद वॉशिंगटन डीसी में एक सैन्य हेलिकॉप्टर और पैसेंजर विमान की टक्कर हुई थी, जिसमें 67 लोगों को जान गवानी पड़ी। और इसी साल 12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ़्लाइट टेक-ऑफ़ के कुछ ही देर बाद हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में विमान में सवार 242 और ग्राउंड पर 18, कुल मिलाकर 260 लोगों की मौत हुई थी। सिर्फ़ भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश सुरक्षित बच पाए थे।
हालांकि इस विषय पर ज़्यादा सर्वे नहीं हुए हैं, बावजूद इसके बीबीसी द्वारा जारी किए पिछले 18 सालों के आंकड़े बताते हैं कि कैसे साल दर साल विमान हादसों की संख्या और इनमें जान गंवाने लोगों की संख्या में कमी आई है। जहां साल 2005 में विमान हादसे में 824 लोगों की मौत हुई थी तो वहीं 2023 में 72। जबकि 2005 से लेकर अभी तक उड़ानों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
हादसों की संख्या में गिरावट
साल 2005 की शुरुआत तक भारत में सिर्फ 85 एयरपोर्ट थे, जबकि साल 2024 तक भारत में कुल 157 ऑपरेशनल एयरपोर्ट हैं जहां से रोजाना पैसेंजर उड़ाने भरते हैं। तकरीबन 19 साल में भारत में 90 प्रतिशत तक एयरपोर्ट बढ़ें हैं। लेकिन विमान हादसों की संख्या देखें तो उसमें गिरावट हुई है। बावजूद इसके भारत के सिविल एविशन तंत्र पर सबूतों के साथ लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं।

UN के आंकड़े क्या कहते हैं?
संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइज़ेशन (आईसीएओ) के डेटा के मुताबिक़, 2005 से 2023 के बीच पूरी दुनिया में प्रति 10 लाख विमान उड़ानों पर होने वाले हादसों में भी गिरावट दर्ज की गई है। आईसीएओ की विमान हादसे की परिभाषा काफ़ी विस्तृत है। इसमें न सिर्फ़ वो घटनाएं शामिल हैं, जिनमें यात्री या चालक दल के लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं या मर जाते हैं, बल्कि वो भी शामिल हैं जब विमान को नुक़सान पहुंचता है और उसकी मरम्मत करनी पड़ती है, या वह लापता हो जाता है। दुनिया भर में हवाई हादसों में मौतों की संख्या पर नज़र डालें, तो इसी अवधि में इसमें गिरावट दर्ज की गई है। हालाँकि कुछ सालों में बड़े हादसों के कारण यह संख्या अचानक बढ़ी भी है।

2014 में कैसे अचानक बढ़े थे आंकड़े?
2014 में दो बड़ी घटनाओं की वजह से हवाई हादसों के आंकड़ों में अचानक उछाल आ गया। मार्च में मलेशियाई एयरलाइंस की फ़्लाइट एमएच 370 कुआलालंपुर से बीजिंग जाते हुए 239 लोगों के साथ लापता हो गई। उसी साल जुलाई में मलेशियाई एयरलाइंस का ही एक और विमान, एमएच17, पूर्वी यूक्रेन में रूसी मिसाइल से गिरा दिया गया, जिसमें क़रीब 300 लोग मारे गए।
हादसों का आपस में कनेक्शन
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के स्टैटिक्स एक्सपर्ट प्रोफ़ेसर सर डेविड स्पीगेलहॉल्टर ने कहा कि ऐसे आंकड़ों में अचानक बड़ी उथल-पुथल आना आम है। उनके मुताबिक़, "अगर आप हादसों की जगह मौतों की गिनती करें, तो आंकड़े बहुत ही उतार-चढ़ाव वाले हो जाते हैं। किसी एक बड़े हादसे से ही काफ़ी प्रभावित हो जाते हैं।" उन्होंने कहा, "ऐसे रैंडम हादसे एक समान तरीक़े से नहीं होते, अक्सर एक ही समय पर कई हादसे हो जाते हैं। जिससे हमें लगता है कि इनका आपस में कोई कनेक्शन है, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता"
'हादसों से नतीजा न निकालें'
इन बड़े-बड़े विमान हादसों पर फ़िनलैंड के पूर्व फ्लाइट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन चीफ इस्मो आल्तोनेन ने कहा कि इससे ये नहीं समझ लेना चाहिए कि अब हवाई सफ़र कम सुरक्षित हो गया है। उन्होंने कहा, "ये महज़ दुर्भाग्य है कि एक ही वक़्त में कई तरह के हादसे हो गए, लेकिन लोग इसके आधार पर कोई नतीजा न निकालें, क्योंकि ये सब एक-दूसरे से बिल्कुल अलग वजहों से हुए हैं।" उन्होंने ये भी बताया कि बीते कुछ महीनों में हुए कुछ हादसों को तो पहले से रोका ही नहीं जा सकता था। जैसे दिसंबर में कज़ाख़स्तान में अज़रबैजान एयरलाइंस का विमान तब गिर गया, जब उसे रूसी एंटी-एयरक्राफ़्ट मिसाइल ने निशाना बना लिया।
विमान हादसों पर बन रहीं डॉक्यूमेंट्रीज
बकिंघमशर न्यू यूनिवर्सिटी में पूर्व पायलट और सीनियर लेक्चरर मार्को चान ने कहा कि हवाई हादसों को लेकर जागरूकता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि 'सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर अब इन हादसों को बहुत ज़्यादा दिखाया जा रहा है।' वहीं कई प्लेटफॉर्म्स इनकी डिटेल्ड डॉक्युमेंट्री भी बना रहे हैं। विमान हादसों को लेकर नेशनल जियोग्राफिक ने पूरी एक सीरीज भी बनाई है, इसे कोई भी आसानी से यूट्यूब पर देख सकता है।
सोशल मीडिया और विमान हादसे
टिकटॉक पर एक वीडियो ख़ूब वायरल हुआ, जिसमें सुपरमैन की फ़िल्म का सीन दिखाया गया है। इसमें सुपरमैन एक जेट को स्टेडियम में टकराने से बचाता है। इस वीडियो के साथ कैप्शन था, "पीट बुटीगिग पिछले चार साल से रोज़ ऐसा ही कर रहे हैं, अभी के हालात देखकर।" ये मज़ाकिया वीडियो इशारा करता है कि अमेरिका के पूर्व परिवहन मंत्री पीट बुटीगिग के जनवरी में पद छोड़ने के बाद से जैसे विमान हादसे बढ़ गए हों।
इफ इट्स अ बोइंग, आई एम नॉट गोइंग
बीते कुछ सालों में बोइंग 737 मैक्स एयरक्राफ़्ट से जुड़ी कई घटनाओं ने भी मीडिया और सोशल मीडिया पर काफ़ी सुर्ख़ियां बटोरीं, ख़ास तौर पर जनवरी 2024 में जब उड़ान के दौरान एक दरवाज़ा टूटकर निकल गया। इन घटनाओं की वजह से कई यूज़र्स ने बोइंग के बनाए विमानों में यात्रा से परहेज़ करना शुरू कर दिया और कंपनी के शेयरों की क़ीमत में भारी गिरावट आ गई।
एयरलाइन्स की जवाबदेही भी होती है तय
विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे हादसों और बड़े क्रैश की जांच बहुत गहराई से की जाती है। हादसों से जुड़े नए आंकड़े और जानकारियां पायलटों के ट्रेनिंग सिमुलेटर में डाली जाती हैं, ताकि वे भविष्य में ऐसी स्थितियों के लिए तैयार रह सकें। इस्मो आल्तोनेन ने कहा, "अगर आप आज के सिमुलेटर देखें, तो वो इतने एडवांस हैं कि बिल्कुल असली विमान जैसे लगते हैं। जब मैंने 40 साल पहले उड़ान शुरू की थी, तब से इसकी तुलना ही नहीं की जा सकती।"
नियमों की अनदेखी करने पर रेगुलेटर्स एयरलाइंस पर जुर्माना, लाइसेंस सस्पेंड करना या उनकी उड़ानों पर पाबंदी जैसी सख़्त कार्रवाई भी कर सकती हैं। अगर कोई एयरलाइन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करती, तो उसे किसी देश या समूह से बाहर भी कर दिया जाता है।
हवाई यात्रा अब भी सबसे सुरक्षित सफ़र
हाल के इन हादसों के बावजूद हवाई यात्रा अब भी सबसे सुरक्षित सफ़र माना जाता है। अमेरिका के परिवहन विभाग के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, 2022 में अमेरिका में परिवहन से जुड़ी जितनी भी मौतें हुईं, उनमें 95 फ़ीसदी से ज़्यादा सड़क पर हुईं। हवाई यात्रा से जुड़ी मौतें 1 फ़ीसदी से भी कम थीं।
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