कश्मीर में अगर लोकतंत्र की हार होगी तो जीतेगा कौन?

श्रीनगर। कश्मीर के लोगों के लिए 5 दिसंबर काला शुक्रवार साबित हुआ। कायरतापूर्ण कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों ने कई हमलों को अंजाम दिया, जिसमें 21 लोग मारे गए। दो चरणों का चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से कराने को लेकर खुद को शाबासी देने वाला प्रशासनिक अमला इस घटना से हिल सा गया है।

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भारी हथियारों से लैस छह आतंकवादियों ने बारामूला जिले के सीमांत उरी इलाके में एक सैन्य शिविर तथा पुलिस चौकी पर हमले किए। इसके अलावा, तीसरी जगह पर सुरक्षाकर्मियों के दलों पर ग्रेनेड से हमले किए। त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) द्वारा सैन्य शिविर में मार गिराए जाने के पहले आतंकवादियों ने सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल तथा एक जूनियर कमीशंड अधिकारी की हत्या कर दी।

दूसरा हमला श्रीनगर में हुआ, जहां दो आतंकवादियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला किया और मुठभेड़ के दौरान मारे गए। वहीं, पुलवामा जिले में आतंकवादियों द्वारा फेंके गए ग्रेनेड के फटने से दो नागरिकों की मौत हो गई।

कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) अब्दुल गनी मीर ने कहा कि मारे गए दोनों आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा संगठन के हैं। श्रीनगर में सोमवार को मोदी एक चुनावी जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। राज्य में पांच चरणों के तहत विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। अगले चरण के मतदान के चार दिन पूर्व यह हमला हुआ है। मतदान नौ दिसंबर को होना है।

उल्लेखनीय है कि राज्य विधानसभा चुनावों के तहत पहले दोनों चरणों के मतदान के दौरान कश्मीर में 70 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है, जबकि घाटी में दो तथा जम्मू क्षेत्र में एक चरण का मतदान बाकी है। शुक्रवार को हुई हिंसा के बाद यही सवाल उठता है कि अगर लोकतंत्र की हार होती है, तो फिर जीत किसकी होगी?

आतंकी हमले के एक दिन बाद शनिवार को मागम के बीरवाह निर्वाचन क्षेत्र में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की एक चुनावी जनसभा में लोगों की भारी भीड़ दिखी। इसका तो यही अर्थ निकलता है कि लोगों ने हर हाल में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करने का फैसला कर लिया है।

प्रधानमंत्री के सोमवार की जनसभा को लेकर श्रीनगर शहर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। लेकिन यह देखना अब दिलचस्प होगा कि इन घटनाओं के बाद मतदाताओं में पहले वाला ही जोश बरकरार रह पाता है या नहीं। हालांकि कुछ राजनीतिज्ञों ने शनिवार की अपनी जनसभाओं को रद्द कर दिया या उसे पुनर्निधारित किया।

उधर, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ज्यादा मतदान की खबरों को प्रमुखता से दिखाने को लेकर मीडिया की आलोचना की और कहा कि इसके कारण ही आतंकवादियों ने मतदाताओं में भय पैदा करने के लिए हमले किए।

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